संयुक्त राष्ट्र परमाणु विकिरण के प्रभाव पर वैज्ञानिक समिति के एक विशेषज्ञ ने 6 अप्रैल को वियना में कहा कि जापानी फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्र घटना का प्रभाव संभवतः वर्ष 1986 में सोवियत संघ के चेरनोबिल परमाणु संयंत्र घटना से कम है। लेकिन वह वर्ष 1979 में अमेरिका की तीन माइल आइलैंड परमाणु संयंत्र घटना से गंभीर है।
इस समिति के विशेषज्ञ के अनुसार अमेरिका के तीन माइल आइलैंड परमाणु संयंत्र में हुई घटना से बाहर दुनिया पर सीमित प्रभाव पड़ा, जबकि चेरनोबिल परमाणु संयंत्र घटना से आसपास के वातावरण को भारी नुकसान हुआ। अभी जापानी फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्र घटना की तीव्रता उक्त दोनों घटनाओं के बीच है और इस से समुद्र प्रभावित हो गया है।
इस समिति के अध्यक्ष ने कहा कि फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्र घटना से सचमुच परमाणु प्रदूषण पैदा हुआ है। इसके लिए जापान ने एक हफ्ते पहले बच्चों के प्रति थायराइड कैंसर की जांच की योजना शुरू की। अभी तक जापानी परमाणु घटना की स्थिति और गंभीर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। (मीनू)















