जापान की टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने 6 अप्रैल को एलान किया कि विशेष सामग्री डालने का कदम उठाए जाने के बाद फुकुशिमा दायची संयंत्र के न0.2 रिएक्टर के परमाणु विकिरण युक्त पानी का कुएं में आई दरारों से निकलकर समुद्र में बहना बन्द हो गया है।
इससे पूर्व यानी मंगलवार को इस कंपनी ने न0.2 रिएक्टर के निकट कुंए के निचले भाग की पत्थरीली परत में 8 छेद बनाए और उन में दूषित पानी को बहने से रोकने के लिए 6000 लिटर विशेष द्रव्य उड़ेल दिए।
लेकिन फुकुशिमा दायची संयत्र के भीतर जमा हुए हजारों टन के परमाणु दूषित पानी को कहां लाया जाए?अब भी इसपर जापान सरकार और संबंधिक पक्ष दिमाग खपा रहे हैं।
जापानी अर्थतंत्र मंत्रालय के आणुविक ऊर्जा सुरक्षा गार्ड कार्यालय ने मंगलवार को कहा कि न0.1,न0.2 और न0.3 रिएक्टरों के दरबाइन-कक्षों के तहखानों और बाहर के कुएँ में उच्च स्तर के परमाणु विकिरण युक्त पानी कोई 60 हजार टन है।टोक्यो इलेक्टिक पावर कंपनी न0.2 रिएक्टर के करीब 3000 टन दूषित पानी को कुलिंग पात्र में और 30 हजार दूषित पानी को परमाणु संयंत्र के कबाड़ी-निपटान केंद्र में स्थानांतरिक करेगी।अन्य परमाणु दूषित पानी को सिज़ोका शहर द्वारा प्रत्तद कृत्रिम टापू और अस्थाई पात्रों में ले जाया जाएगा।
अन्य एक रिपोर्ट के अनुसार टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने 4 अप्रैल को परमाणु संयंत्र के कबाड़ी-निपटान केंद्र में पहले से ही जमा किए गए करीब 10 हजार टन के कम स्तर वाले परमाणु विकिरण युक्त पानी को समुद्र में बहाया,ताकि उच्च स्तर के विकिरण युक्त पानी रखने के लिए जगह खाली की जाए।यद्यपि इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने दावा किया है कि दूषित पानी को समु्द्र में डालने पर भी निकट जलक्षेत्र में पाए जानी वाली मछलियों के सेवन का लोगों की सेहत पर पड़ने वाला प्रभाव बहुत कम होगा।लेकिन इस पर कोरिया गणराज्य ने अपना विरोध जताया।उस के विदेश व व्यापार मंत्रालय ने 5 तारीख को कहा कि परमाणु विकिरण युक्त पानी को समुद्र में बहाने की जापान की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून का संभावित उल्लंघन है।
यह भी उल्लेखनीय है कि टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने न0.5 और न0.6 रिएक्टरों के नजदीक कुओं में जमा परमाणु दूषित पानी को भी समुद्र में बहाया है।इस पानी में रेडियोएक्टिविटी कानूनी सीमा की लगभग 500 गुनी पाई गई है।यह कंपनी आगे भी कम स्तर के परमाणु विकिरण युक्त पानी को समुद्र में बहाएगी।















