जापान की टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने 5 अप्रैल को घोषणा की कि फुकुशिमा दायची परमाणु संयत्र के विकिरण युक्त पानी को निकाने का तरीका पुष्ट हो गया है और जल-निकासी गेट(कुएं) पर आई दरारों को कंकरीट से भरने का कदम शुरूआती तौर पर सफल रहा है।लेकिन संयंत्र में उच्च स्तर के परमाणु विकिरण युक्त कम से कम 60 हजार टेन पानी होने का अनुमान है।किस तरह से इस पानी क सफाया किया जाए?यह अब भी जापान सरकार और संबंधित पक्षों के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती है।
टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी के अनुसार न0.2 रिएक्टर का परमाणु दूषित पानी संभवतः जमीन की पत्थरीली परत से कुएं में जमा हो गया था,फिर कुएं में आई दरारों के जरिए समुद्र में जा गिरा है।इसे आगे बहने से रोकने के लिए इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने पत्थरीली परत में देर-सारी दवा जैसी विशेष सामग्री डाली,जिससे परमाणु दूषित पानी का बहाव कम होता दिख रहा है।हालांकि कर्मचारी इस की सख्त निगरानी जारी रखेंगे।
फुकुशिमा दायची संयत्र के भीतर जमा हुए हजारों टन के परमाणु दूषित पानी को कहां लाया जाए?इसपर जापान सरकार और संबंधिक पक्ष दिमाग खपा रहे हैं।
जापानी अर्थतंत्र मंत्रालय के आणुविक ऊर्जा सुरक्षा गार्ड कार्यालय ने मंगलवार को कहा कि न0.1,न0.2 और न0.3 रिएक्टरों के दरबाइन-कक्षों के तहखानों और बाहर के कुएँ में उच्च स्तर के परमाणु विकिरण युक्त पानी कोई 60 हजार टन है।टोक्यो इलेक्टिक पावर कंपनी न0.2 रिएक्टर के करीब 3000 टन दूषित पानी को कुलिंग पात्र में और 30 हजार दूषित पानी को परमाणु संयंत्र के कबाड़ी-निपटान केंद्र में स्थानांतरिक करेगी।अन्य परमाणु दूषित पानी को सिज़ोका शहर द्वारा प्रत्तद कृत्रिम टापू और अस्थाई पात्रों में ले जाया जाएगा।
अन्य एक रिपोर्ट के अनुसार टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने 4 अप्रैल को परमाणु संयंत्र के कबाड़ी-निपटान केंद्र में पहले से ही जमा किए गए करीब 10 हजार टन के कम स्तर वाले परमाणु विकिरण युक्त पानी को समुद्र में बहाया,ताकि उच्च स्तर के विकिरण युक्त पानी रखने के लिए जगह खाली की जाए।यद्यपि इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने दावा किया है कि दूषित पानी को समु्द्र में डालने पर भी निकट जलक्षेत्र में पाए जानी वाली मछलियों के सेवन का लोगों की सेहत पर पड़ने वाला प्रभाव बहुत कम होगा।लेकिन इस पर कोरिया गणराज्य ने अपना विरोध जताया।उस के विदेश व व्यापार मंत्रालय ने 5 तारीख को कहा कि परमाणु विकिरण युक्त पानी को समुद्र में बहाने की जापान की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून का संभावित उल्लंघन है।















