जापान में फुकुशिमा प्रथम परमाणु संयंत्र की मरम्मत कार्य में तेजी आ रही है। वर्तमान रिसाव घटना से न सिर्फ परमाणु संयंत्र के पास समुद्री जल, बल्कि भूमिगत जल पर भी प्रभाव पड़ा है। फुकुशिमा केन में उत्पादित गाय का माँस भी इससे प्रभावित हुआ है।
टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर ने 31 मार्च को घोषणा की कि फुकुशिमा प्रथम परमाणु संयंत्र के नम्बर 1 जनरेटर-सैट के पास भूमिगत जल की जांच से पता चला कि पानी में रेडियोधर्मी पदार्थों की मात्रा का स्तर सामान्य स्तर से 10 हजार गुना अधिक है। जिससे वहां उत्पादित गाय का माँस भी प्रभावित हुआ है। जापानी स्वास्थ्य, श्रम व कल्याण मंत्रालय ने 31 मार्च को कहा कि फुकुशिमा केन में उत्पादित बीफ़ में सानान्य स्तर से अधिक रेडियोधर्मी पदार्थों का पता लगाया गया है।
इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय नाभिकीय ऊर्जा एजेंसी के विशेषज्ञों ने परमाणु संयंत्र के उत्तर-पश्चिम से 40 किलोमीटर की दूरी पर प्राप्त मिट्टी की जांच की। परिणामस्वरूप मिट्टी की सतह पर रेडियोधर्मी पदार्थों की मात्रा का स्तर इस संस्था द्वारा निर्धारित लोगों के हटने वाले स्तर से दुगुना अधिक है। जापानी गृह मंत्री एतानो युकिओ ने कहा कि यह स्तर शीघ्र ही लोगों के स्वास्थ्य पर नुकसान नहीं पहुंचेगा, लेकिन लम्बे समय तक वहां रहने से स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ेगा।
परमाणु संयंत्र के निपटारे पर जापानी प्रधानमंत्री नाओटो कान ने 31 मार्च को कहा कि संयंत्र के 6 जनरेटर-सैट पूरी तरह बंद होंगे।
जबरदस्त भूकंप और नाभिकीय इंधन रिसाव घटना के मद्देनज़र नाओटो कान ने कहा कि वे जापान में नाभिकीय ऊर्जा की विकास योजना पर पुनर्विचार करेंगे। गौरतलब है कि योजनानुसार 2030 से पहले और 14 नाभिकीय रिएक्टर स्थापित होंगे। नाओटो कान ने कहा कि अब विकास की पूर्वशर्त बदल गई है, इसलिए योजना पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
(ललिता)















