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रमणील पर्यटन स्थल प्राचीन फिंगलह कस्बे का दौरा
2010-05-04 08:57:25

आज हम आप को दो हजार वर्ष पुराने कस्बे फिंग लह के दौरे पर ले चलते हैं । दक्षिण पश्मिम चीन स्थित सछ्वान प्रांत की राजधानी छंगतू शहर खशहाली राज्य के नाम से सारे चीन में जाना जाता है , यहां पर सुहावना मौसम ही नहीं , बल्कि सन्साधानों की खूब भरमार भी होती है , इस से यहां के स्थानीय निवासी बड़े निश्चिंत रुप से आरामदेह जीवन बिताने के आदी हो गये हैं । इसी कारण से बहुत से देशी विदेशी पर्यटक यहां के आरामदेह जीवन पर मोहित हो जाते हैं । छंतू शहर के पास बिखरे छोटे प्राचीन कस्बे भी देशी विदेशी पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र रहे हैं , जिन में दो हजार वर्ष पुराने प्राचीन कस्बा फिंग लह भी शामिल है । पर आज का दौरा शुरु होने से पहले हम आप से एक सवाल पूछते हैं कि प्राचीन कस्बे फिंग लह का इतिहास कितना पुराना है । आप को गौर से यह कार्यक्रम सुनने से सही जवाब मिल जायेगा ।

दो हजार वर्ष प्राचीन फिंग लह कस्बा दक्षिण पश्चिम छंतू शहर से 93 किलोमीटर दूर अवस्थित है , वह प्रसिद्ध चीनी राष्ट्रीय ऐतिहासिक व सांस्कृतिक कस्बों की नामसूची में शामिल हो गया है ।

पानी हरित पर्वतों से घिरे फिंगलह प्राचीन कस्बे की आत्मा है , फिंगलह कस्बे के पुराने निर्माणों के बीच घूमते हुए पानी ही पानी दिखाई देते हैं , वातावरण बहुत ताजा और शांत है । गाइड चू तान ने इस का परिचय देते हुए कहा

अभी हम जिस सड़क पर खड़े हुए हैं , उस का नाम है श्वी चिंग च्ये यानी जलीय दृश्य सड़क है । कोई पांच सौ मीटर लम्बी नहर इसी सड़क से होकर आगे बह जाती है , हालांकि यह नहर ज्यादा लम्बी नहीं है , पर उस पर दसेक सेतु स्थापित हुए हैं , और तौ और हरेक सेतु का आकार प्रकार अलग अलग दिखायी देता है । इतना ही नहीं , इस जलीय सड़क पर विविधतापूर्ण स्वादों वाले मटन , दुग्ध नुडल, चिकन , सोयाबिन पनीर और तिल रोटी जैसी लोकप्रिय स्थानीय व्यजन खोने को मिलते हैं ।

प्राचीन फिंगलह कस्बे की विशेष विशेषताओं में पुरातन सब से मुख्य है । कहा जाता है कि ईसा पूर्व 150 में तत्कालीन पश्चिम हान राजवंश काल में इस स्थल ने रौनकदार कस्बे का रुप ले लिया था , तब से लेकर आज तक इस कस्बे का इतिहास कोई दो हजार वर्ष पुराना हो गया , इतने लम्बे ऐतिहासिक दौर में संरक्षित प्राचीन सड़क , प्राचीन मंदिर , प्राचीन पुल , प्राचीन पेड़ , प्राचीन बांध , प्राचीन मंडप , पुराने रीति रिवाज और पुराने गायन ने इस छोटे कस्बे को और चार चांद लगा दिया है ।

फिंगलह प्राचीन कस्बा पाइ मो नदी के किनारे पर अवस्थित है , स्थानीय लोग इस नदी को माता नदी के रुप में मानते हैं । इस कस्बे के छोर पर खड़ा एक पुराना पेड इस कस्बे की आत्मा मानी जाती है । गाइड चू तान ने इस पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहा अभी हम ने जो पुराना पेड़ देखा है , उस का इतिहास कोई एक हजार पांच सौ वर्ष पुराना हो गया है , पर आज तक वह फिर भी फलता फूलता नजर आ रहा है , यहां के स्थानीय लोग हजारों वर्ष में उसे इसी कस्बे की आत्म समझते आये हैं । इसी विश्वास के साथ यहां के लोग अपनी जन्मजात संतान को इसी पेड के सोतेले बेटे बेटी का रुप देते हैं , ताकि वे जिंदगी भर में सहा सलामत व सुखी रह सके । साथ ही चीनी पंचांग के अनुसार हर माह की पहली व 15 तारीख को बड़ी तादाद में व्यापारी इस पेड़ की पूजा करने आते हैं , ताकि अपना व्यापार सफल होकर मालामाल हो सके ।

प्राचीन फिंगलह कस्बे में हजारों वर्षिय पुराने प्राकृतिक भू दृश्य और विशेषताओं से युक्त रिहायशी मकान देखने को मिलते ही नहीं , बल्कि तराताजा आदिम सांसारिक समृद्ध संस्कृति भी देखी जा सकती है । तीन पीढियों द्वारा संचालित सौ वर्ष पुराना लौहा शोधन वर्गशाप , सौ वर्ष पुरानी फोटो शाप और सौ वर्ष पुराने स्थानीय स्वादित व्यंजन भी पाये जाते हैं । क्योंकि यहां पर कोई पर्यटन स्थल नहीं है , इसलिये यहां के स्थानीय निवासी पीढ़ी दर पीढ़ी यहां रहते आये हैं और अपने आदिम जीवन तौर तरीके बनाये रखे हुए हैं ।

इस प्राचीन छोटे कस्बे की सड़क पर स्थित दादी छन की सौयाबिन पनीर दुकान सब से चर्चित है , विशेष तरीके से तैयार सोयाबिन पनीर का सुगंध चारों तरफ व्याप्त रहा है , इस दुकान के गेट पर एक बोर्ड लगा हुआ है , जिस पर फिंगलह की सब से पुरानी दुकान शब्द अंकित हुए हैं । इस दुकान की मालकिन दादी छन ने कहा मेरी दुकान का नाम सरकार ने मुझे दिया है , यह मेरा मर्यादा है , इस से साबित हुआ है कि मुझे पचपन से ही यह पनीर बनाना आता है । यह दुकान बहुत पुरानी है , ग्राहक खरीदने से पहले पनीर चख सकते हैं , यदि उन्हें इस का स्वाद पसंद आता है , तो वे अपनी इच्छा से ले सकते हैं ।( आवाज ) यह सुनकर एक पर्यटक ने तुरंत ही आगे चलकर पूछा कि क्या यह चख सकता है , उन्हों ने बड़े उत्साह के साथ कहा कि बिलकुल , चखिये , देखिये, यह सुन्न व तीखा स्वाद है , वह शिमला मिर्च का है और यह सोयाबिन जाम का है , सब कुछ हैं , अपनी मर्जी से चख लीजिये ।

कोई पर्यटक प्राचीन फिंगलह कस्बे में और कुछ ज्यादा दिन ठहरना चाहता है । क्योंकि इस छोटे प्राचीन कस्बे का बड़ा शांतिमय व निश्चिंत वातावरण पर्यटकों को मोह लेता है , यहां ठहरने के दौरान मानसिक तनाव व तरह तरह की परेशानियां एकदम कायब हो जाती हैं । गाइड चू तान ने कहा

यहां आने पर पर्यटक तुरंत ही हमारे प्राचीन कस्बे के वातावरण में घुल मिल जाते हैं और यहां के आदिम जीवन स्थिति व रहन सहन महसूस कर सकते हैं । इस का प्राकृतिक दृश्य भी बेहद सुंदर है , हरे भरे पर्वत व स्वच्छ पानी एक दूसरे से जुड़े हुए दिखायी देते हैं , साथ ही यहां के स्थानीय वासी भी बड़े आराम से दिन काटते हैं । वे आम तौर पर काम करने के बाद कई दोस्तों के साथ चाय पीते हुए गपशप मारते हैं ।

फिंगलह कस्बे में कोई रंगारंग मनोरंजन नहीं है , पर्यटकों का यहां आने का मकसद भी इतना सीधा सादा है कि पाइ चू नदी के तट पर बैठकर दोस्तों के साथ चाय पीते हुए गपशप मारा जाया , ताश खेला जाये या आंखें बंद कर ताजा हवा खायी जाये ।

जी हां , स्थानीय लोग अपना उत्सब मनाने के लिये विविधतापूर्ण आयोजन भी करते हैं । गाइड चू तान ने इस का परिचय देते हुए कहा हमारे फिंगलह प्राचीन कस्बे में छिंग मिंग उत्सब के उपलक्ष में नदी दीप मेला लगा जाता है , चीनी पंचांग के अनुसार तीसरे माह की 11 तारीख को मंदिर मेला आयोजित किया जाता है , छठे माह की छ तारीख को चिन ह्वा पर्वत बुद्ध का जन्म दिवस मनाया जाता है । गर्मियों में जलीय प्रेम गायन प्रतियोगिता भी होती है , स्थानीय वासी और पर्यटक नाम दर्ज कर इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं ।

यह प्राचीन छोटा कस्बा छंगतु शहर से काफी नजदीक है , यातायात भी बड़ा सुविधाजनक है , साथ ही स्थानीय वासियों का पारिवारिक होस्टल सस्ता ही नहीं , बहुत साफ सुथरा भी है , बहुत ज्यादा छंगतू वासी सप्ताहांत में यहां आने के आदी हो गये हैं । छंगतू वासी हू ने कहा कि चालू वर्ष के वसंत में वे अपने परिवारजनों के साथ हर सप्ताह के अंत में छुट्टी मनाने यहां आते हैं ।

हर सप्ताह में यहां आता हूं , यहां छंगतू से दूर नहीं है , आम दिनों में काम का दबाव भारी है , सप्ताहांत में यहां आकर मन बहलाने के लिये निश्चिंत रुप से ताश खेलते हैं या गपशप मारते हैं , बड़ा अच्छा लगता है ।

आज का यह कार्यक्रम समाप्त करने से पहले हम फिर एक बार पूछा जाने वाला प्रश्न दोहराते हैं कि प्राचीन फिंगलह का इतिहास कितना पुराना है । हम आप के सही जवाब के इंतजार में हैं ।

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