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विदेशी पत्रकारों की नजर में सिनच्यांग
2009-12-28 12:39:09

ठीक जैसा कि उमरुछी शहर के उप मेयर ने कहा कि चीन सरकार द्वारा सुधार व खुले द्वार नीति लागू होने के पिछले तीस सालों में उरुमछी शहर में भारी परिवर्तन हुए है और शहर की बिलकुत नयी सूरत देखने को मिलती है । आर्थिक विकास से यहां के वासियों को ठोस लाभ हुआ है , उरुमछी शहर के प्रति व्यक्ति के हिस्से में औसत आय 1978 के 887 य्वान से बढ़कर 2008 के 22 हजार य्वान तक पहुंच गयी है । आम लोगों का जीवन स्तर स्पष्टतः उन्नत हो गया है , जिस से बड़ी तादाद में देशी विदेशी व्यापारियों को आकृष्ट किया गया है , बड़े आकार वाले डिपोर्टमेंट स्टोर , केर्लफोर सुपर मार्केट और विविधतापूर्ण पश्चिमी रेस्तरां एक के बाद एक स्थापित हो चुके हैं ।

उत्तर पश्चिम चीन स्थित सिनच्यांग वेगुर स्वायत्त प्रदेश की राजधानी उरुमछी विश्व में समुद्र से सब से दूरी पर स्थित शहर है और वह एशियाई महा द्वीप का भौगोलिक केंद्र भी है , प्राचीन काल से ही वह एशिया का हृदय माना जाता रहा है । आज का उरुमछी शहर सिनच्यांग वेगुर स्वायत्त प्रदेश का राजनीतिक , आर्थिक व सांस्कृतिक केंद्र ही नहीं , बल्कि जातीय सांस्कृतिक संगम का केंद्र भी है ।

18 अगस्त को उरुमछी शहर के उपमेयर चांग हुंग ने लाल पर्वत पार्क में सी आर आई के चीनी व विदेशी पत्रकार रिपोर्टिंग दल के साथ बातचीत की । लाल पर्वत पार्क पहले उरुमछी शहर का सब से ऊंचे स्थान पर स्थित पहाड़ है , पर आज वह आसपास के आकाश से बातें करने वाले ऊंचे ऊंचे भवनों के घेरे में दिखायी देता है ।

ठीक जैसा कि उमरुछी शहर के उप मेयर ने कहा कि चीन सरकार द्वारा सुधार व खुले द्वार नीति लागू होने के पिछले तीस सालों में उरुमछी शहर में भारी परिवर्तन हुए है और शहर की बिलकुत नयी सूरत देखने को मिलती है । आर्थिक विकास से यहां के वासियों को ठोस लाभ हुआ है , उरुमछी शहर के प्रति व्यक्ति के हिस्से में औसत आय 1978 के 887 य्वान से बढ़कर 2008 के 22 हजार य्वान तक पहुंच गयी है । आम लोगों का जीवन स्तर स्पष्टतः उन्नत हो गया है , जिस से बड़ी तादाद में देशी विदेशी व्यापारियों को आकृष्ट किया गया है , बड़े आकार वाले डिपोर्टमेंट स्टोर , केर्लफोर सुपर मार्केट और विविधतापूर्ण पश्चिमी रेस्तरां एक के बाद एक स्थापित हो चुके हैं ।

लाल पर्वत के ऊंचे स्थान पर खड़े होकर समूचे उरुमछी शहर पर नजर दौड़ाये , तो हम इस रौनकदार शहर को पांच जुलाई घटना से नहीं जोड़ सकते । हालांकि अब सप्ताहांत का समय नहीं है , पर पार्क में फिर भी बहुत से पर्यटक बड़ी निश्चिंतता से घूमते हुए दिखाई देते हैं । वे विभिन्न प्रकार वाले जातीय पोषाकों से सजधज कर आपस में मजाक उड़ाते या गपशप मारते हुए नजर आते हैं । हालांकि मेरी समझ में नहीं आयी है कि वे किस विषय के बारे में बातचीत कर रहे थे , पर यह स्पष्ट है कि भिन्न भिन्न जातियों व भिन्न भिन्न धर्मों पर विश्वास करने के लोग पिछले कई हजारों वर्षों से यहां बसते आये हैं और यह उन की समान प्यारी जन्मभूमि ही है ।

सिनच्यांग की राजधानी उरुमछी में ठहरने के दौरान हम अंगूर की जन्मभूमि के नाम से नामी तुरपान के दौरे पर भी गये । तुरपान सचमुच अंगर की जन्मभूमि कहने लायक है , जगह जगह पर रसदार अंगूर नजर आते हैं । अगस्त में अंगर की शानदार फसल का मौसम है , अंगूरों से लदे लताओं के गरियारे के नीचे तेज धूप के बजाये ठंडी हवा चलती है । यहां पर अगूर फल ही नहीं , उस के पीछे पुराना इतिहास व गहरी संस्कृति भी छिपी हुई है।

हालांकि तुरपान में अंगूरों का रंग व आकार प्रकार अलग अलग है , पर उन का स्वाद मिठा होता है । अंगूर का मिठास यहां के मौसम से जुड़ा हुआ है , क्योंकि यहां पर दिन का समय लम्बा है और दिन व रात के तापमान में बड़ा अतर है , यह अंगूर के मिठास के लिये फायदेमंद है । तुरपान का अंगूर स्वादिष्ट ही नहीं , बल्कि सौंदर्य व स्वास्थ्य का काम भी देता है और जूस व वाइन बनाने का सब से बढिया कच्चा माल भी है ।

अंगूर तुरपान की प्रमुख कृषि फसल है । तुरपान के किसान अपने कठोर परिश्रम के जरिये मीठे अंगूर से सुखी जीवन का रुप देने में जुटे हुए हैं ।

अंगूर के अलावा तुरपान में भूमिगत लम्बी दीवार के नाम से प्रसिद्ध केअड़ कुएं भी अत्यंत सराहनीय हैं । क्योंकि तेज धूप से पानी जलदी से सुख जाता है, इसलिये पुराने जमाने में सिनच्यांग वासियों द्वारा निर्मित विशेष भूमिगत जल संरक्षण सिंचाई परियोजना बहुत उपयोगी है । आज से दो सौ वर्ष पहले इसी प्रकार के कुएं काम में लाये गये है, बाद में मध्य एशियाई देशों में ये कुएं भी लोकप्रिय हो गये । वास्तव में ऊंचे थ्येनशान पर्वत से बर्फ का पिघलने वाला पानी भूमिगत नहरों से खेतों व गांवों में पहुंचाया जाता है । तुरपान क्षेत्र में कुल 11 सौ से अधिक केनअड़ कुएं उपलब्ध हैं , उन की कुल लम्बाई चार हजार किलोमीटर से अधिक है , जिन में सब से पुराना कुआं कोई 470 साल पुराना है । प्राचीन काल में सिनच्यांग वासियों ने अपने हाथों व कठोर परिश्रम के माध्यम से जो इतनी आश्चर्यजनक जल संरक्षण परियोजना निर्मित की है , उस से तत्कालीन लोगों द्वारा की गयी कड़ी मेहनत की कल्पना की जा सकती है । पर उन की यह मेहनत अत्यंम कीमती है , क्योंकि अपनी संतानों की भलाई करने के साथ साथ सिनच्यांग वासियों की बुद्धिमत्ता , मेहनत और एकता की झलक भी मिलती है ।

तुरपान के दौरे के बाद हम सिनच्यांग वेगुर स्वायत्त प्रदेश के ईली प्रिफेक्चर की राजधानी ईनिंग के लिये रवाना हुए । ईनिंग शहर प्राचीन काल में समुचे सिनच्यांग का राजनीतिक व आर्थिक केंद्र रहा था । इस कोई चार लाख से अधिक आवादियों वाले शहर में 196 छोटे बड़े मस्जिद पाये जाते हैं , जिन में पाइतुला मस्जिद व शेनशी महा मस्जिद सिनच्यांग के चार बड़े मस्जिदों की गिनती में आते हैं और वे सब दो सौ वर्ष से अधिक पुराने हैं । क्योंकि ये दोनों मस्जिदों का फासला दूर नहीं है , इसलिये हम ने दो घंटे के भीतर इन दोनों मस्जिदों का दौरा पूरा कर लिया ।

पाइतुला मस्जिद ईनिंग शहर के केंद्र में अवस्थित है , वह छिंग राजवंश के छ्येनलुंग राजा के आदेशानुसार मुसलिमों को नमाज पढ़ने की सुविधा के लिये निर्मित हुआ है । इस मस्जिद का नमाज भवन अरबी वास्तु शैली युक्त है , जबकि बगल का शिष्ट भवन चीनी पुरानी परम्परागत वास्तु शैली से स्थापित है । कहा जा सकता है कि इसी प्रकार का मस्जिद सारी दुनिया में भी कम देखने को मिलता है , यह चीन में इसलामी संस्कृति के विकास का साक्षी है ।

मस्जिद के इमाम ने हमें बताया कि सरकारी धन राशि से इस मस्जिद का संरक्षण व विस्तार हुआ है । अब इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिये तीन हजार से अधिक लोगों को समा सकता है , इस के अलावा यह मस्जिद परोपकारी संस्था की भूमिका भी निभा देता है । नव वर्ष या किसी पर्व के उपलक्ष में स्थानीय सरकार व उद्ममी मस्जिद की प्रबंधन कमेटी के माध्यम से कठन जीवन में पड़े मुसलीमों को राशि या वस्तुएं देते हैं ।

फिर हम शेनसी महा मस्जिद देखने गये । यह मस्जिद भी छिंग राजवंश काल में स्थापित हुआ है , देखने में वह एक खूबसूरत चीनी रुपी गार्टन मालूम पड़ता है , यह मस्जिद तत्काल में शेनसी प्रांत से य़हां रहने आये वासियों ने निर्मित किया है । आज यह मस्जिद स्थालीय मुस्लीमों का धार्मिक स्थल ही नहीं , बल्कि एक पर्यटल स्थल भी वन गया है ।

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