संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 51वें सत्र के "अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों के राजनीतिकरण के जोखिम और मुद्दे" के विषय पर साइड इवेंट आयोजित

2022-09-21 16:48:53

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 51वें सत्र के "अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों के राजनीतिकरण के जोखिम और मुद्दे" के विषय पर साइड इवेंट 19 सितंबर को चीन के चीलिन प्रांत के छांगछुन शहर में आयोजित हुए। इस साइड इवेंट के लक्ष्य मानवाधिकारों के राजनीतिकरण के संभावित नुकसान को बेनकाब करना, मानवाधिकारों के राजनीतिकरण की प्रवृत्ति का विरोध करना और एक और से अधिक निष्पक्ष, न्यायसंगत, उचित व समावेशी वैश्विक मानवाधिकार शासन प्रणाली के गठन को बढ़ाना हैं। दस से अधिक देसी-विदेशी विद्वानों व विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सदस्यों ने "अंतर्राष्ट्रीय पैटर्न पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों के राजनीतिकरण का प्रभाव" एवं "अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों के राजनीतिकरण के नुकसान और जोखिम" आदि विषयों पर गहन चर्चा की और आदान-प्रदान किया।

चीन के नानकाई विश्वविद्यालय के मानवाधिकार अनुसंधान केंद्र के उप निदेशक थांग यिंगक्सिया ने कहा कि मानवाधिकारों का राजनीतिकरण न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के उद्देश्य से असंगत है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की सार्वभौमिकता को भी कमजोर करता है। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मूल्यांकन मानकों का उल्लंघन करता है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून की नींव को कमजोर करता है। चीन के चीलिन विश्वविद्यालय के मानवाधिकार अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक ह चीपेंग ने कहा कि हालांकि कुछ पश्चिमी देश मानवाधिकारों का मौखिक रूप से नारा लगाते हैं, वे मानवाधिकारों का सम्मान करने के बजाय राजनीतिक संघर्ष के लिए एक उपकरण व बहाने के रूप में मानवाधिकारों का उपयोग करते हैं।

कंबोडियाई मानवाधिकार आयोग के आयुक्त और प्रवक्ता काटा औन ने कहा कि कुछ देश मानवाधिकारों की आड़ में अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं और आंख बंद करके अन्य देशों को अपनी राजनीतिक लाइनों का पालन करने की मांग करते हैं। यह कार्यवाही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के मूल इरादे के खिलाफ जाता है, जब मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा तैयार की गई थी।

अंतर्राष्ट्रीय प्रगति संगठन के अध्यक्ष और ऑस्ट्रिया के इंसब्रुक विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर एमेरिटस हंस कोहलर ने कहा कि वैश्विक मानवाधिकार एजेंडा में शक्ति राजनीति के तर्क ने वैश्विक व्यवस्था को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया है। सभी पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में स्थिरता और शांति प्राप्त करने के लिए वैश्विक न्याय की मांग करनी चाहिए। चीन के केंद्रीय दक्षिण विश्वविद्यालय के मानवाधिकार अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक माओ जूनश्यांग ने कहा कि सभी देशों को मानवाधिकारों की भावना को सम्मान व समानता के मूल में लेना चाहिए। साथ ही, उन्हें सहयोग व संवाद को मजबूत करना, मानवाधिकारों के राजनीतिकरण का विरोध करना और मानवाधिकारों के विकास को बढ़ाना चाहिए।

 (हैया)

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