जापान का अफ्रीका को सहायता बढ़ाने की वास्तविक मंशा क्या है?

2022-08-30 10:41:29

जापान के प्रवर्तन में 8वां अफ्रीका विकास सम्मेलन 27 से 28 अगस्त को तुनिस में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में जापानी प्रधानमंत्री फुमिया किशिदा ने वीडियो भाषण देते हुए घोषणा की कि जापान आगामी तीन सालों में अफ्रीका में 30 खरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगाएगा और 3 लाख प्रतिभाएं तैयार करेगा। उन्होंने विशेष तौर पर बल दिया कि जापान की कार्रवाई चीन की कार्रवाई से अलग है।

वहीं, जापान के प्रमुख अख़बार असाही शिनबुन ने 28 अगस्त को जारी रिपोर्ट में कहा कि जापानी प्रधानमंत्री फुमिया किशिदा चीन के साथ मुकाबला करने के लिए अफ्रीकी देशों के साथ संबंध मजबूत बना रहे हैं।

इधर के कुछ सालों में दक्षिण-पूर्वी एशिया से अफ्रीकी महाद्वीप तक तथाकथित बुनियादी ढांचे का निवेश  बेल्ट एंड रोड पहल की स्पर्धा के लिए जापान सरकार द्वारा चीन के साथ मुकाबला करने का अहम तरीका बन चुका है। जापान ने अनेक बार अफ्रीका में निवेश बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन असली आंकड़े निरंतर घट रहे हैं। पिछले दो सालों में ये आंकड़े कम होकर सिर्फ 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक रह गये। मौजूदा डांवांडोल परिस्थिति के बीच यह अनिश्चित है कि जापान अंत में अफ्रीका में कितने निवेश करेगा।

उधर, कई विश्लेषकों के विचार में जापान अफ्रीका में निवेश बढ़ाने से यूएन सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए व्यापक अफ्रीकी देशों का समर्थन प्राप्त करना चाहता है। दूसरे विश्व युद्ध में पराजित होने के नाते जापान सिर्फ आर्थिक शक्ति पर संतोष नहीं रहता और एक तथाकथित सामान्य देश बनना चाहता है। यह लक्ष्य पूरा करने के लिए यूएन सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनना जापान का एक अहम तरीका बन गया है। इधर के कुछ सालों में जापान ने अनेक बार अफ्रीका विकास सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय मौके पर दावा किया कि यूएन सुरक्षा परिषद का सुधार जापान और अफ्रीका का समान लक्ष्य है।

अफ्रीका अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बड़ा बाजार है, न कि शून्य एंड सम गेम का अखाड़ा है। जापानी अखबार ने कहा कि अगर जापान अफ्रीका के साथ समान विकास करना चाहता है, उस को चीन की तरह अफ्रीकी जनता के प्रति सदिच्छा होनी चाहिए। (वेइतुंग)  

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