ल्हासा-न्यिंगची रेलवे - बर्फीले पठार पर उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए एक "बूस्टर" है

2022-06-23 15:28:37

25 जून 2021 को तिब्बत में पहले विद्युतीकृत रेलवे ल्हासा-न्यिंगची रेलवे की सेवा शुरू हुई। यह रेल मार्ग सछ्वान-तिब्बत रेलवे का एक हिस्सा है। इसके चलते दक्षिण-पूर्वी तिब्बत में रेलवे की पहुंच न होने का इतिहास समाप्त हो गया और बर्फीला पठार औपचारिक तौर पर विद्युतीकृत बुलेट ट्रेन युग में प्रवेश कर गया ।

ल्हासा-न्यिंगची रेलवे की कुल लंबाई 435 किलोमीटर है और डिजाइन की गई गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ल्हासा से शुरू होती है और शैनान शहर की गोंगगर काउंटी, झानांग काउंटी, नेदोंग जिला, सांगरी काउंटी, जियाचा काउंटी व न्यिंगची शहर लैंग काउंटी, मिलिन काउंटी से गुजरकर न्यिंगची शहर के शहरी क्षेत्र में समाप्त होती है। यारलूजांगबो नदी को 16 बार पार करते हुए इस रेलवे के किनारे कुल 47 सुरंगों व 121 पुलों का निर्माण किया गया है और इस रेलवे का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से ऊपर है। इन आंकड़ों के पीछे एओलियन रेत, उच्च-निम्न तापमान और मोराइन परत आदि विश्वव्यापी समस्याओं पर काबू पाते हुए ल्हासा-न्यिंगची रेलवे के निर्माण के लिये छह वर्षों की कड़ी मेहनत है।

ल्हासा-न्यिंगची रेलवे के माध्यम से स्थानीय लोगों का जल्दी यात्रा का सपना पूरा किया गया है। ल्हासा-न्यिंगची रेलवे के कारण तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा से न्यिंगची शहर की यात्रा का समय एक दिन से घटकर तीन घंटे हो गया है। इस रेलवे की सेवा के आरंभ के बाद लगभग 6 महीनों में 62.1 लाख से अधिक यात्रियों और 7.9 हजार टन से अधिक माल को परिवहन किया गया है। “फूक्सिंग” बुलेट ट्रेन द्वारा यात्रा करना स्थानीय लोगों की सबसे पसंदीदा बना है।

ल्हासा-न्यिंगची रेलवे स्थानीय पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। यह रेलवे 2.26 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसका अनुपात तिब्बत के कुल क्षेत्रफल में 18.4 प्रतिशत पहुंचा है। साथ ही ल्हासा-न्यिंगची रेलवे के कारण प्रत्यक्ष लाभार्थी जनसंख्या 13.1 लाख पहुंची है, जिसका अनुपात तिब्बत की कुल जनसंख्या में 38.2 प्रतिशत पहुंचा है। इन आंकड़ों के मुताबिक ल्हासा-न्यिंगची रेलवे स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिये एक अवसर है।

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पर्यटन संसाधन बहुत समृद्ध हैं। ल्हासा-न्यिंगची रेलवे के किनारे जंगल, बर्फ़ीले पहाड़ पहाड़, पवित्र झीलें, घास के मैदान आदि वांछनीय दृश्य हैं। लेकिन पहले में यातायात कारक से ये पर्यटन संसाधन पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे।

ल्हासा-न्यिंगची रेलवे की सेवा शुरू होने से ल्हासा, शैनान और न्यिंगची में यातायात की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। साथ ही इस रेलवे के किनारे दर्शनीय पर्यटन स्थलों ने भी दुनिया भर के यात्रियों के लिए अपने दरवाजे खोले हैं। इसी तरह, यह निश्चित है कि तिब्बत में पर्यटन के तेजी से विकास को बढ़ाया जाएगा और किनारे क्षेत्रों में नए आर्थिक विकास बिंदु पैदा होंगे।

परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में रेलवे परिवहन जलवायु से कम प्रभावित होता है। ल्हासा-न्यिंगची रेलवे की सेवा शुरू होने से दक्षिण-पूर्वी तिब्बत में रेलवे की पहुंच नहीं होने का इतिहास समाप्त हो गया और स्थानीय निवासियों के जीवन, अध्ययन और कार्य में सुविधा हुई है। इसके चलते इन मौजूदा परिवहन विधियों की कमियों को पूरा किया जाता है, जो पठारीय जलवायु से आसानी से प्रभावित होते हैं।  इसके कारण स्थानीय परिवहन की सुगमता और स्थिरता में सुधार हुआ है।


यात्रियों को बेहतर सेवा देने के लिए ल्हासा-न्यिंगची रेलवे पर सभी ट्रेनों में ऑक्सीजन आपूर्ति उपकरण, शौचालय, इलेक्ट्रिक चाय स्टोव और मुफ्त वाईफाई से लैस हैं। इन ट्रेनों में काम करने वाले सभी कर्मचारी अच्छी छवि, पेशेवर और अनुभवी हैं। चयन के बाद उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण भी दिया गया है। ट्रेनों में वे यात्रियों को अनुवाद, गाइड और यहां तक कि साधारण चिकित्सा सेवाएं भी प्रदान कर सकते हैं।

रेलवे प्रत्येक शहर और क्षेत्र में तेजी से विकास के लिए एक "बूस्टर" है, जो विभिन्न शहरों और क्षेत्र को निकटता से जोड़ता है। अपने संचालन के आगे विकास के साथ-साथ ल्हासा-न्यिंगची रेलवे किनारे स्थलों में यातायात की सुविधा प्रदान करना और लोगों व सामानों के परिवाहन को मजबूत करना जारी रखेगा। इसके चलते लोगों के बेहतर यातायात अनुभव को अधिक से अधिक संतोषजनक किया जाएगा और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ाया जाएगा। भविष्य की विकास प्रक्रिया में ल्हासा-न्यिंगची रेलवे तिब्बत के आर्थिक विकास को फिर से उन्नत करने और उच्च गुणवत्ता वाले विकास हासिल करने में निश्चित रूप से मदद करेगी।

(हैया)

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