
अमेरिकी लॉस एन्जर्स टाइम्स की वेबसाइट ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार जापान में बूढ़ापे की समस्या पेश की गयी। जापान में आबादी कम होने से भालू व जंगली सुअरों को स्कूलों व मठों के आसपास घूमते हुए देखा जा सकता है। जापान के एक गांव में केवल पांच बच्चे हैं। मठ के बंद होने के बाद गांव में चाय कारखाना और प्राइमरी स्कूल भी बंद हो गये। अब गांव के छात्रों को एक घंटा बस में सवार होकर प्राइमरी स्कूल जाना पड़ता है।
स्थानीय गांववासी ने पत्रकार को बताया कि तीस साल पहले इस गांव में 100 बच्चे थे, लेकिन अब यहां केवल पांच बच्चे ही रह गये हैं।
काकेगावा शहर से अधिन्न मूल स्प्रिंग गांव में अब करीब 250 परिवार हैं। दस साल बाद यहां की आबादी आधी रह जाएगी। हर साल की प्रार्थना रस्म में इस गांव के पुरुषों के अभाव से परम्परागत परेड भी नहीं किया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार अनेक सालों में जापान के विभिन्न स्थलों में मूल स्प्रिंग गांव जैसे गांव नजर आ जाते हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों में आबादी धीमी गति से बढ़ती है। लेकिन पूरे देश में आबादी की कटौती जल्दी ही नहीं रोकी जा सकती है। गत वर्ष की जनगणना से जाहिर है कि 2010 में जापान की आबादी 12.8 करोड़ तक पहुंचने के बाद हर साल कम हो रही है। अभी तक करीब 9 लाख आबादी कम हो चुकी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2060 में जापान की आबादी में एक तिहाई यानी 4 करोड़ की गिरावट आएगी । जबकि आगामी 30 वर्षों में जापान में 39 प्रतिशत के लोगों की उम्र 65 से ज्यादा हो जाएगी।
जापान में ज्यादा से ज्यादा खाली मकानों के अस्तित्व की सुरक्षा समस्या पैदा हो रही है। यातायात विभाग सोच रहा है कि किस मार्ग या किस बस रूट को बरकरार रखा जा सके। बूढ़े उद्योगपति और किसानों को अपनी संपति का उत्तराधिकार देने के लिए कोई उत्तराधिकारी नहीं मिल रहा। जापान को हर साल 500 स्कूलों को बंद करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार गत शरत में जापान के प्रधानमंत्री शिन्जो आबे ने कैबिनेट मंत्रियों और विद्वानों को बुलाकर एक खास बैठक बुलायी। बैठक में उन्होंने वचन दिया कि उनकी सरकार जन्मदर और बूढ़ेपन की कटौती को रोकेगी, ताकि आने वाले 50 सालों में आबादी को 10 करोड़ के पास बरकरार रखी जा सके।
लेकिन विद्वानों के विचार में आबे का लक्ष्य साकार नहीं किया जा सकता है। जापानी राष्ट्रीय सामाजिक गारंटी और आबादी समस्या की अनुसंधान संस्था की अनुसंधानकर्ता लिन लिनजी ने कहा कि हालांकि सरकार ने जन्म दर को बढ़ाने के लिए कुछ प्रेरित कदम उठाये हैं, फिर भी काफी देरी हो चुकी है और यह केवल एक सुन्दर सपना है। यदि जापान आप्रवासी नीति को नहीं बदलेगा, तो 10 करोड़ आबादी बढ़ाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकेगा। 30 सालों में जापान में आधी स्थानीय सरकारें गायब हों जाएंगी।









