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बाल-महिला स्पेशल 20160407
2016-04-19 14:57:46 cri



यह चाइना रेडियो इन्टरनेशनल है। आज हम फिर मिलते हैं बाल महिला स्पेशल कार्यक्रम में। मैं हूं आप की दोस्त, चंद्रिमा। आज के कार्यक्रम में सबसे पहले हम बच्चों से जुड़ी एक रिपोर्ट पेश करेंगे। अब लीजिये सुनिये।

चीन-आसियान युवकों व बच्चों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान की खिड़की नाम की वेबसाइट को औपचारिक रूप से जारी करने का समारोह हाल ही में पेइचिंग चीनी बाल कला थिएटर में आयोजित हुआ। उपस्थितों ने यह आशा जताई है कि इस मंच से चीन व आसियान के युवकों, बच्चों के मन में मित्रता के बीजों को बोए जा सकेंगे, चीन व आसियान के युवकों, बच्चों के बीच मानवीय आदान-प्रदान किया जा सकेगा, और चीन-आसियान संबंधों के दीर्घकालीन और मित्रवत विकास के लिये एक सुदृढ़ आधार तैयार किया जा सकेगा।

इस गतिविधि का आयोजन चीन-आसियान केंद्र, चीन के सोंगछङलिंग कोष और चीनी संस्कृति वेबसाइट द्वारा एक साथ किया गया है। चीन-आसियान केंद्र की महासचिव यांग श्यूफिंग ने कहा कि चीन-आसियान के ग्यारह देशों की कुल जनसंख्या लगभग 2 अरब है। उनमें 14 वर्ष की उम्र से कम युवकों और बच्चों की संख्या 40 करोड़ से अधिक है, जो दोनों पक्षों की कुल जनसंख्या के एक बटे पाँच तक पहुंच गयी है। चीन-आसियान केंद्र विभिन्न पक्षों के साथ कोशिश करके इस वेबसाइट को चीन - आसियान के युवकों, बच्चों के बीच आदान-प्रदान का एक अच्छा मंच बनाएंगे।

उन्होंने कहा बच्चे देश का भविष्य हैं, राष्ट्र की आशा भी हैं। चीन-आसियान के युवकों व बच्चों के बीच मैत्रीपूर्ण भावना को विकसित करने में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अलावा दोनों पक्षों की समान कोशिश भी करना चाहिये। इस दृष्टि से चीन-आसियान केंद्र ने चीन-आसियान युवकों, बच्चों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान की खिड़की नामक वेबसाइट खोलने का सुझाव दिया। दोनों पक्षों के बीच युवकों, बच्चों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सहयोग को मजबूत करने में चीन - आसियान के विभिन्न देशों की सरकारों व जनता के बड़े समर्थन, सहायता की आवश्यकता है। चीन-आसियान केंद्र विभिन्न पक्षों के साथ कोशिश करके इस वेबसाइट को चीन-आसियान के युवकों, बच्चों के बीच आदान-प्रदान का मंच बनाएंगे, मित्रता को मजबूत करने और सहयोग का विस्तार करने का एक महत्वपूर्ण पुल बनाएंगे।

चीन स्थित फिलीपींस की राजदूत आयर लिंडा ने आसियान की ओर से भाषण देते समय कहा कि चीन-आसियान युवकों, बच्चों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान की खिड़की नामक वेबसाइट का उद्देश्य युवकों की मांग और रुचि पूरी करना है। वह चीन - आसियान के बच्चों को सेवा देने में मंच की भूमिका निभाएगा। आशा है कि इस कार्यक्रम से चीन - आसियान में युवकों, बच्चों से जुड़े संगठनों के बीच एक पुल स्थापित किया जाएगा। ताकि दोनों पक्षों की नयी पीढ़ियों के बीच मित्रता और समझ को मजबूत किया जा सके।

उन्होंने कहा हमें आशा है कि इस कार्यक्रम से भविष्य में हमारे देशों के नेता बनने वाले युवकों को आसियान के विभिन्न देशों और चीन की संस्कृति पर ज्यादा जानकारियां मिल सकेंगी। हमारी यह उम्मीद भी होती है कि इस कार्यक्रम से युवकों, बच्चों से जुड़े संगठनों के बीच एक पुल की स्थापना की जाएगी, ताकि बच्चों के लिये ज्यादा सार्थक सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा सके।

वर्ष 2016 चीन-आसियान के बीच वार्ता संबंधों की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ है। वह चीन-आसियान शिक्षा आदान-प्रदान वर्ष भी है। चीन की सोंगछङलिंग कोष की उपाध्यक्ष शचिंग ने कहा कि चीन-आसियान युवकों, बच्चों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान की खिड़की नामक वेबसाइट की स्थापना का लक्ष्य विभिन्न पक्षों की शक्ति को इकट्ठा करके बच्चों की सेवा करना, एक विशेष मंच की स्थापना करना, मित्रता के बीज की बुआई करना, चीन-आसियान के युवकों, बच्चों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करना, और चीन-आसियान संबंधों के दीर्घकालीन व मैत्रीपूर्ण विकास के लिये एक सुदृढ़ आधार तैयार करना है।

अच्छा, दोस्तो, यह रिपोर्ट सुनाकर हम आप लोगों को एक कहानी सुनाएंगे। इस कहानी का नाम है क्यों वे लगातार एक सबसे नीचे अंक वाले होमवर्क रखते रहे?

मोंटी रॉबर्ट अमेरिका के यूटा स्टेट में स्थित एक मिडिल स्कूल का विद्यार्थी था। उसका परिवार अमीर नहीं था, लेकिन उसका चरित्र बहुत सकारात्मक था। एक दिन अध्यापक ने सभी विद्यार्थियों को एक होमवर्क देते हुए सभी बच्चों से अपने भविष्य के बारे में लेख लिखने को कहा था।

मोंटी रॉबर्ट ने घर वापस आकर बहुत उत्साह के साथ अपना सपना लिखना शुरू किया। उसने आधी रात के समय सात पेजों में अपना सपना ठोस रूप लिखा। लेख में उसने लिखा कि मुझे आशा है कि भविष्य में मैं एक घोड़े का मैदान प्राप्त कर सकूंगा। साथ ही उसने इस 200 एकड़ वाले घोड़े के मैदान की नक्शा भी बनाया, इसमें अस्तबल, ट्रैक व उद्यान के अलावा मकानों की निर्माण डिजाइन योजना भी शामिल थे।

दूसरे दिन उसने बहुत खुशी के साथ अध्यापक के सामने यह होमवर्क दिया। लेकिन जब होमवर्क वापस दिया गया, तो उसने बहुत दुःख से देखा है कि अध्यापक ने पहले पेज़ पर एफ़ लिख दिया।

मोंटी रॉबर्ट को लगता था कि उसका होमवर्क बहुत अच्छा है, पर उसे नहीं पता कि उसे एफ़ क्यों मिला। कक्षा के बाद उसने अध्यापक से इसका कारण पूछा। अध्यापक ने गंभीरता से कहा कि मोंटी, मैं इस बात को स्वीकार करता हूं कि तुमने बहुत ध्यान से यह होमवर्क किया। लेकिन तुम्हारा सपना वास्तविकता से बहुत दूर है। तुम जानते हो कि तुम्हारे पिता सिर्फ एक घोड़े के ट्रेनर हैं। तुम्हारा एक स्थिर घर भी नहीं है, हमेशा स्थानांतरित करते रहते हो, बहुत पैसे भी नहीं हैं। पर एक घोड़े का मैदान प्राप्त करने के लिये बहुत पैसों की जरूरत होगी। तुम इतने पैसे कैसे हासिल कर पाओगे?

अंत में अध्यापक ने मोंटी से कहा कि अगर तुम फिर एक बार यह होमवर्क करना चाहते हो, और कुछ वास्तविक लक्ष्य निश्चित करना चाहते हो, तो मैं तुम्हें फिर अंक देने पर विचार करूंगा। मोंटी ने अपने होमवर्क के बारे में पिता जी से राय पूछी। पिता जी ने बेटे के सिर को छूते हुए कहा कि बच्चे, तुम अपनी इच्छा से यह फैसला करो। पर तुम गंभीरता से यह करो, क्योंकि यह फैसला तुम्हारे लिये बहुत महत्वपूर्ण होगा। मोंटी रात भर सोचता रहा। अंत में उसने अपने सपने पर कायम रहने का फैसला किया। यह कोई बात नहीं है कि अध्यापक ने एफ़ लिख दिया।

साल भर साल यह एफ़ हमेशा मोंटी को प्रोत्साहन देता । वह कदम-ब-कदम अपने सपने को पूरा करने के लिये कोशिश करता रहा। बहुत सालों के बाद मोंटी रॉबर्ट ने आखिर अपना सपना पूरा किया।

उधर जब मोंटी के अध्यापक ने एक बार अपने बीस विद्यार्थियों को लेकर एक 200 एकड़ वाले घोड़े मैदान का दौरा किया, और इसमें स्थित एक चार हजार वर्गमीटर वाली इमारत पर चढ़े। तो अध्यापक को पता चला कि इस घोड़े के मैदान का मालिक तो मोंटी रॉबर्ट है।

इसलिये हमें बच्चों के सपनों को नहीं मारना चाहिये। जब सपना होगा, तो आशा भी होगी। आशा होते ही बच्चों के पास कोशिश करने का उत्साह होगा। इसलिये बच्चों को अपना सपना प्राप्त करवाएं, और साहस के साथ आगे बढ़ाएं। तो उन्हें सफलता मिल सकेगी।

हर बच्चे के मन में अपना सपना होता है। शायद वह मां-बाप की आंखों में बहुत अवास्तविक है, बहुत दूर है। लेकिन शायद उनका सपना किसी न किसी दिन साकार हो सकेगा। इसलिये बच्चों को ज्यादा प्रोत्साहन व समर्थन दें, ताकि वे साहस के साथ अपने सपने के पीछे दौड़ सकें।

अच्छा, दोस्तो, आज का कार्यक्रम यहीं समाप्त होता है। अगले हफ्ते हम यहां फिर मिलेंगे। अब चंद्रिमा को आज्ञा दें, नमस्कार।

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