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    तिब्बती ग्रामीण महिला चिकित्सक आंग्च्वो और उनका प्यार
    2015-11-20 14:59:51 cri

    लूमा गांव के मुखिया च्यांगपेई त्सेरिन इन्टरव्यू देते हुए

    लूमा गांव में चिकित्सा स्थिति की चर्चा करते हुए गांव के मुखिया च्यांगपेई त्सेरिन ने कहा:"पिछले कुछ वर्षों में लूमा गांव में भारी परिवर्तन आया है। पहले काअर कांउटी में चिकित्सा स्थिति अच्छी नहीं थी। लेकिन आज गांव में चिकित्सकों और चिकित्सीय उपकरणों की दृष्टि से देखा जाए, तो पहले की तुलना में कहीं अधिक सुधार हुआ है। हर साल गांव में चिकित्सीय प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि चिकित्सकों के स्तर को उन्नत किया जा सके। पहले अगर गांववासी बीमार पड़ते थे, तो उन्हें आली प्रिफेक्चर के अस्पताल जाना पड़ता था। लेकिन आज शल्य चिकित्सा के अलावा, आम बीमारी का इलाज गांव में ही किया जा सकता है। चिकित्सा सेवा केन्द्र के चिकित्सक जिला स्तरीय अस्पताल से दवाईयां लेकर वापस लौटते हैं। गांव में चिकित्सकों को अधिक चिकित्सीय जानकारी हासिल करने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है।"

    हमारे संवाददाता को इन्टरव्यू देने के समापन पर डॉक्टर आंग्च्वो से यह पूछे जाने पर कि उनके विचार में वे खुद किसान हैं?चरवाहा हैं?या डॉक्टर?आंग्च्वो ने मकान की दीवार पर लगाए गए कई पुरस्कारों के प्रमाण-पत्र दिखाते हुए गर्व के साथ कहा कि मैं डॉक्टर हूँ। उनकी नज़र में दीवार पर लगे ये प्रमाण पत्र पिछले 40 से अधिक सालों में उनके चिकित्सीय जीवन के साक्षी हैं।


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