
अकादमिक कक्षा के अलावा, स्कूल के छात्र नियमित रूप से पर्वतारोहण का अभ्यास भी करते हैं। त्सेरिंग वांगतू और ताशी केम्पोट दोनों दो बार पर्वत पर चढ़ चुके हैं। उन दोनों ने कहाः
"मैंने रेव किरगिज़ फंग और नींचिन गेशा पर्वत पर चढ़ाई की है। हम इस व्यवसाय को बहुत पसंद करते हैं।
मैंने रेव किरगिज़ फंग और चेसांग लामू पर्वत पर चढ़ाई की है। अब तक मैं चुमुलांग्मा चोटी पर नहीं चढ़ा सका, सिर्फ वहां गया हूं।"
प्रशिक्षण और कक्षा के अलावा, पर्वतारोहण तकनीक को अन्तरराष्ट्रीय मानकों के साथ जोड़ने के लिए स्कूल ने वर्ष 2002 में फ्रांसीसी राष्ट्रीय क्लाइम्बिंग और स्कीइंग स्कूल के साथ दीर्घकालीन सहयोग संबंध स्थापित किए। तिब्बत पर्वतारोहण स्कूल के संस्थापक न्यीमा त्सेरिंग ने कहाः
"फ्रांस के साथ सहयोग में तकनीकी आदान-प्रदान ज्यादा है, जैसे अधिकतम ऊंचाई पर बचाव कार्य आदि। हम छात्रों को फ्रांस में शिक्षा लेने के लिए भी भेजते हैं।"
अभी तक 300 से अधिक छात्र तिब्बत पर्वतारोहण स्कूल से स्नातक होने के बाद शिक्षित क्लाइम्बिंग गाइड, सहयोगकर्ता, फोटोग्राफर, राहत कर्मी, रसोईंये और अनुवादक बन गए हैं। ऐसे में चीन में पर्वतारोहियों की कमी के सवाल का समाधान हुआ है।
स्कूल के अध्यापक, तिब्बती पर्वतारोहण दल के पूर्व सदस्य त्सेरिंग तेंता ने कहा कि स्नातक होने के बाद तमाम छात्र तिब्बती पवित्र पर्वत पर चढ़ाई और अन्वेषण सर्विसेज लिमिटेड में काम करने जाते हैं और अन्य कुछ को तिब्बती पर्वतारोहण दल या तिब्बती पर्वतारोहण संघ में काम करने का अवसर मिलता है और बाकी कुछ तिब्बत के सीमा रक्षा विभाग में काम करने जाते हैं। त्सेरिंग तेंता ने कहा कि स्कूल ने सचमुच बहुत ज्यादा व्यावसायिक व्यक्तियों का प्रशिक्षण किया है और स्थानीय रोजगार और विकास को बढ़ावा दिया है। उनका कहना हैः
"पर्वतारोहण स्कूल ने दो सवालों का समाधान किया है। पहला, इससे पहले पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले तमाम किसानों और चरवाहों के बच्चों को शिक्षा और काम करने का अवसर नहीं मिल पाता था, लेकिन हमारे स्कूल में उन्होंने न सिर्फ ज्ञान पाया, बल्कि उन्हें रोज़गार भी मिला। दूसरा, छात्र स्कूल से स्नातक होने के बाद धीरे धीरे पर्वतारोहण से जुड़े उद्यमों और व्यापार का विकास आगे बढ़ाते हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है।"









