

नानमूलिन कांउटी के उप गवर्नर मङ श्यांगथाओ ने जानकारी देते हुए कहा कि तिब्बत में वनरोपण करने के दौरान वनों के जीवित होने की दर बहुत कम है। एक तरफ़ यहां मौसम बहुत सूखा है और दूसरी तरफ़ वनरोपण के बाद संबंधित प्रबंधन कमजोर होता है। स्थानीय सरकार वनरोपण के दौरान कोशिश करती है, और तीन पहलुओं में कदम उठाकर पेड़-पौधों के जीवित होने की गारंटी देती है। उन्होंने कहा:
"वनरोपण करने के पूर्व जल सिंचाई को प्राथमिकता देते हैं। हमने भू-स्थिति के अनुसार जल सिंचाई से संबंधित संस्थापनों का निर्माण किया, जिससे अधिकांश क्षेत्रों में जल सिंचाई वाली समस्या का समाधान हुआ। दूसरी बात, वनरोपण के दौरान हम वैज्ञानिक उपाय अपनाते हैं। मसलन भूमि में खोदे गये गड्ढे की गहराई, खराब भूमि को उपजाऊ भूमि में बदलने के बाद खादों का अनुपात, कीड़े-मकोड़े की रोकथाम और पेड़ पौधों का चयन इत्यादि। तीसरी बात, हमने वनरोपण के बाद संबंधित प्रबंधन पर जोर देते हैं। पेड़-पौधों की सुरक्षा के लिए हम विशेष तौर पर आसपास के कुछ गांवों में से 30 से अधिक किसानों को किराए पर बुलाते हैं।"
नानमूलिन कांउटी के उप गवर्नर मङ श्यांगथाओ ने बताया कि इस वर्ष करीब 867 हेक्टेयर पर पेड़-पौधे उगाए गए, जिनमें 95 प्रतिशत जीवित हैं। अगर संबंधित सुरक्षा मज़बूत किया जाए, तो पेड़ों की गुणवत्ता और उन्नत होगी। तीन सालों के भीतर पेड़-पौधों की जीवित दर 85 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना होगी। यह तिब्बत में एक रिकॉर्ड बन जाएगा।
पारिस्थितिकी आदर्श मिसाल क्षेत्र की स्थापना वाली परियोजना के कार्यान्वयन के बाद इस वर्ष जनवरी से मई तक स्थानीय रेतीले तूफ़ान पहले की तूलना में एक तिहाई कम हुआ। वनरोपण से जल स्रोत की सुरक्षा हुई और रेत के उड़ने से बचाने और रेत नियंत्रण करने से प्रारंभिक परिणाम नज़र आए। वायु में आर्द्रता 10 प्रतिशत बढ़ी। इसेक साथ ही वनरोपण करने वाले मज़दूर और संबंधित मशीनें स्थानीय गाँवों से आते हैं। उन्हें वनरोपण से लाभ मिला है। वनरोपण के दौरान स्थानीय लोगों की औसतन आय में 3 हज़ार युआन का इजाफा हुआ, साथ ही किसानों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिला हैं। हमारे संवाददाता की मुलाकात कई किसानों से हुई, उन्होंने सरकार के इस परियोजना का भारी समर्थन व्यक्त किया। उनका कहना है:
"वनरोपण से रेत की स्थिति कम होगी। हमारे यहां का प्राकृतिक दृश्य और अधिक सुन्दर होगा। साथ ही वायु में आर्द्रता बढ़ेगी। इससे खेतों में फ़सलों को लाभ मिलेगा।"









