
बताया जाता है कि अब चाम्पालिन मठ में भिक्षुओं के बीमा में भागीदारी की दर 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 146 अति गरीब भिक्षुओं के न्यूनतम जीवन बीमा को मूर्त रूप दिया गया है। वर्ष 2014 के जून माह तक चाम्पालिन मठ में 60 वर्ष के ऊपर के 29 वृद्ध भिक्षुओं को पेंशन मिली।
भिक्षु लुओगा को चाम्पालिन मठ में 20 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं। अब वह मठ के लोकतांत्रिक प्रबंधन समिति के उप प्रधान हैं। 13 सालों में वे तिब्बत स्वायत्त प्रदेश और छांगतु कांउटी में जन प्रतिनिधि सभा के सदस्य बने और चुनाव के अधिकार का उपभोग करते हैं। हाल में भिक्षुओं के लिए कार्यान्वित न्यूनतम जीवन बीमा, चिकित्सा बीमा और पेंशन बीमा की चर्चा करते हुए वे बहुत खुश हुए। भिक्षु लुओगा ने कहा:
"देश की नीति से हम जैसे भिक्षुओं को खुशी होती है और कोई चिंता नहीं है। न्यूनतम जीवन बीमा, चिकित्सा बीमा और पेंशन बीमा के कार्यान्वयन से भिक्षुओं के स्वास्थ्य की गारंटी होती है। और हमें अपने भविष्य के प्रति कोई चिंता नहीं होती।"
गौरतलब है कि पिछले वर्ष चाम्पालिन मठ को राष्ट्र स्तरीय प्रमुख सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण की सूची में शामिल किया गया। चाम्पालिन मठ का क्षेत्रफल 50 हज़ार वर्ग मीटर है, जिसमें महा सूत्र भवन, फाबाला जीवित बुद्ध समेत 4 जीवित बुद्धों के निवास स्थान, धर्मपाल देवताओं का भवन, सूत्र-बहस भवन और संन्यास भवन आदि भवन उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार ने मठ के दो चरणों में जीर्णोद्धार के लिए कुल 9 करोड़ युआन की राशि दी। अभी-अभी समाप्त हुई मरम्मत में कुल 1 करोड़ 80 लाख युआन खर्च किए गए, जिसमें मठ की प्रमुख इमारतों यानी त्सोछिंग भवन, फ़ाश्यांग भवन और बौद्ध सूत्र मुद्रण गृह का जीर्णोद्धार शामिल है।
भिक्षु लुओगा ने कहा कि देश के समर्थन के आधार पर चाम्पालिन मठ श्रद्धालुओं की और अच्छी तरह सेवा मुहैया करा सकता है। भविष्य में बौद्ध सूत्र मुद्रण गृह अनुयायियों के लिए निशुल्क बौद्ध सूत्र प्रिंटिंग करने की सेवा प्रदान करेगा। लुओगा ने कहा:
"मरम्मत किए जाने के बाद बौद्ध सूत्र मुद्रण गृह नए रूप में नज़र आया है। हम सरकार को धन्यवाद देना चाहते हैं। बौद्ध सूत्र की प्रिंटिंग शुरु होने के बाद हम श्रद्धालुओं को ज्यादा अच्छी सेवा प्रदान करेंगे। अगर अनुयायी हमारे यहां बौद्ध सूत्र का मुद्रण करना चाहता हैं, तो हम निशुल्क उनकी सेवा करेंगे।"









