
दक्षिण एशियाई थलीय व्यापारिक रास्ते के निर्माण वाले निर्णय का कार्यान्वयन शुरु होने से लेकर अब तक पिछले कुछ वर्षों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने चीलोंग पोर्ट में करीब 20 करोड़ युआन की राशि दी, जिसका प्रयोग मुख्य तौर पर मार्ग सुविधा, बिजलीघर निर्माण और सीमा व्यापार बाज़ार की स्थापना जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। चीलोंग पोर्ट में सीमा शुल्क विभाग के प्रधान वांग लोंग ने जानकारी देते हुए कहा कि आगामी अक्तूबर माह में पोर्ट का विस्तार होगा, जहां चीनी और नेपाली नागरिकों के अलावा तीसरे देश के नागरिकों को सीमा पारगमन और सीमा व्यापार करने की मंज़ूरी दी जाती है। इस पोर्ट से लोगों की आवाजाही और सीमा व्यापार नई मंजिल पर पहुंचेगा।
केंद्र सरकार और तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार की उदार नीतियों से सीमा व्यापरियों को बड़ा व्यापारिक अवसर मिला। सीमा व्यापार करने वाले तिब्बती व्यापारी ने हमारे संवाददाता को बताया कि चीलोंग पोर्ट में खुलेपन के विस्तार से स्थानीय लोगों का वास्तविक लाभ मिलेगा। चीलोंग कस्बे के तिब्बती व्यापारी लाबा का कहना है:
"पहले सीमा शुल्क विभाग बंद हुआ था, हम माल को पीठ पर लादकर नेपाल से वापस लेकर छोटे-मोटे सौदे करते थे। अब सीमा शुल्क विभाग पुनः खुल जाएगा, तो कस्टम की सहायता से हम जरूर ज्यादा कमाएंगे। कस्टम कर्मचारी के सुझावों के मद्देनज़र हम आयात-निर्यात करते हैं। वे बहुत अच्छे लोग हैं।"
जल्द ही खोले जाने वाले सीमा शुल्क विभाग की चर्चा करते हुए चीलोंग कस्बे के दूसरे सीमा व्यापारी लोबू ने कहा:
"सीमा पोर्ट में खुलेपन के विस्तार के बाद हम नेपाल से ज्यादा माल का आयात कर सकेंगे। मैं अधिक वस्त्र और आटे का आयात करूंगा। हमारे यहां लोग जो चीज़ पसंद करते हैं, मैं नेपाल से निर्यात करूंगा। मेरा विचार है कि पोर्ट के विस्तार से स्थानीय लोग शीघ्र ही समृद्ध होंगे और उन्हें लाभ मिलेगा। हम सरकार के आभारी हैं।"
चीलोंग कांउटी के उप शीर्ष नेता वांग वनश्यांग के विचार में चीलोंग पोर्ट के विकास में भारी निहित शक्ति मौजूद है। बुनियादी संस्थापनों और व्यावसायिक उपकरणों की सुविधा की प्राप्ति के बाद चीलोंग शिकाज़े क्षेत्र में आर्थिक विकास की पहली पंक्ति में शामिल होगा। वांग वनश्यांग ने कहा:
"चीलोंग पोर्ट में दो श्रेष्ठताएं मौजूद हैं। पहली, यहां भौगोलिक स्थिति अच्छी है, भूभाग विशाल है और राजमार्ग की सुविधा भी है। दूसरी, रअसोछ्याओ और काठमांडू के बीच दूरी चांगमू पोर्ट से काठमांडू तक की तुलना में 40 किलोमीटर कम है। अब चीलोंग को सुधार और खुलेपन का सुनहरा अवसर मिला है। निकट भविष्य में लोजिस्टिक्स और पर्यटन उद्योग का विकास किए जाने के बाद चीलोंग की अर्थव्यवस्था पूरे शिकाज़े क्षेत्र में आगे रहेगा।"
ध्यान रहे, चांगमू पोर्ट वर्तमान में चीन और नेपाल के बीच सबसे बड़ा सीमा व्यापार पोर्ट है, जो तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शिकाज़े प्रिफैक्चर में स्थित है।
तिब्बती भाषा में"चीलोंग"का अर्थ"आरामदेह गांव"और"खुशहाल गांव"है। यहां आदिम जंगलों में विविधतापूर्ण दुर्लभ वनस्पतियां और जंगली जानवर हैं। आर्थिक विकास के दौरान लोगों की आवाजाही और यातायात की बढ़ोत्तरी से स्थानीय पारिस्थितिक और पर्यावरण पर भारी दबाव पड़ेगा। विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच अंतरविरोध के निपटारे में चीलोंग कांउटी के उप शीर्ष नेता वांग वनश्यांग विश्वासबद्ध हैं। उन्होंने कहा:
"तिब्बत का पर्यावरण कमज़ोर है। अगर इसे नष्ट किया गया, तो भारी नुकसान पहुंचेगा। इस तरह हम विकास के दौरान पर्यावरण के संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं। स्थानीय लोग पर्यावरण संरक्षण का ख्याल भी रखते हैं। तो सरकार को पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विकास करना चाहिए।"
चीलोंग कस्बे की सड़क पर खड़े होकर दूर की ओर देखा जाए, एक-दो मंजिल वाली इमारत का निर्माण किया जा रहा है। सड़क के शोर-शराबे में एक संगीत हॉल से गाने की आवाज़ कभी कभार सुनाई दे रही है। चीलोंग कस्बे की कुछ प्रमुख सड़कों पर विभिन्न प्रकार के रेस्त्रां, नेपाली वस्तुओं की दुकानें, होटल और नाच-गाने के हॉल बने हुए हैं। अब यह कस्बा चीन में आर्थिक विकास के चलते तेज़ गति से विकसित हो रहा है।









