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    परोपकारी कार्य में नए तरीके की खोज:मीरा प्लैनेट
    2014-05-31 19:37:01 cri

    मिरा प्लैनेट का लोगो

    रोज़गार के संदर्भ में प्रशिक्षण दे रही हैं शिक्षक

    मीरा प्लैनेट संगठन की स्थापना के दिन चू थङफ़ेई ने अपने टीम सदस्यों की ओर से संगठन का पहला परोपकारी अभ्यास का कार्यान्वयन किया। यानी आत्मविमोही से परेशान हुए चित्रकार वांग हानपिन को तिब्बती जाति के पारंपरिक थांगखा चित्र सीखने का अवसर दिया गया। इस संगठन की सहायता से वांग हानपिन चीन में मशहूर थांगखा शिल्पकार चङ थाईच्या के शिष्य बन गये। चू थङफ़ेई के विचार में थांगखा चित्र बनाने की तकनीक सीखने से आत्मविमोही से परेशान हुए वांग हानपिन की पेंटिंग प्रतिभा और निपुण होगी। इसके साथ ही देश के बाजार में थांगखा चित्र की अच्छी बिक्री के चलते वांग हानपिन से थांगखा चित्र बनाकर आमदनी भी अर्जित कर सकते हैं और उसका आर्थिक मूल्य दिखाया जाएगा। थांगखा चित्र बनाने से वांग हानपिन को स्थिर आर्थिक स्रोत मिलेगा। इसकी चर्चा में चू थङफ़ेई ने कहा:"आत्मविमोही से परेशान हुए बच्चों द्वारा चित्रित दूसरे चित्रों की तुलना में थांगखा चित्र बाज़ार में ज्यादा आसानी से बेचा जा सकता है। वास्तव में आत्मविमोही बच्चों की चित्र-रचनाओं की बिक्री अधिक तौर पर परोपकारी व्यक्तियों की सहायता पर निर्भर रहती है। लेकिन बाज़ार में थांगका चित्र का मूल्य स्पष्ट है और संबंधित व्यवस्था भी सुनिश्चित हुई है। इस तरह हमारी आशा है कि आत्मविमोही से प्रभावित चित्रकार थांगखा चित्र बनाने की ज्यादा तकनीक प्राप्त कर स्थिर कमाई कर सकेंगे। मुझे लगता है कि यह हमारे देश में आत्मविमोही लोगों के इतिहास में एक सार्थक कदम है।"

    लेकिन वांग हानपिन जैसी पेंटिंग प्रतिभा के धनी सौभाग्यशाली आत्मविमोही व्यक्ति कम हैं। अधिकांश आत्मविमोही रोगियों के परिजनों को ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह है भविष्य में अपने बच्चे के रोज़गार को लेकर आने वाली मुश्किलें। माता पिता और परिजन जिंदगी भर आत्मविमोही पीड़ित बच्चों के साथ नहीं रह सकते। अपने देहांत के बाद बच्चे का जीवन कैसा होगा इस बात की चिंता सभी माता पिता को रहती है? इस बार आत्मविमोही रोगी वांग हानपिन और तिब्बती थांगखा शिल्पकार चङ थाच्या के बीच गुरु और शिष्य का संबंध बना है। यह जातीय पारंपरिक हस्तकला और आत्मविमोही रोगी की विशेष प्रतिभा के बीच जोड़ने का मूल्यवान अवसर है, जिसे आत्मविमोही व्यक्तियों को रोज़गार दिलाने की खोज भी मानी गई है। चीन में आत्मविमोही बच्चों के प्रारंभिक प्रशिक्षण और ट्रेनिंग देने वाली पहली संस्था के रूप में पेईचिंग शिंगशिंग यानी सितारा शिक्षा अनुसंधान केंद्र की संस्थापक थ्यान ह्वेईफिंग ने कहा:"चीन में पले-बढ़े आत्मविमोही व्यक्तियों के रोज़गार संबंधी सवाल का समाधान फिर भी नहीं हो पाया है। चू थङफ़ेइ और उनके साथी इस प्रकार वाले परोपकारी संगठन स्थापित कर आत्मविमोही समुदाय पर ध्यान देते हैं। मुझे लगता है कि वे बहुत साहसी हैं। क्योंकि वे आत्मविमोही व्यक्तियों का ख्याल रखने, सहानुभूति व्यक्त करने और देखभाल करने जैसे स्तर पर ही नहीं ठहरे। उन्होंने इस काम को स्वयंसेवकों से आगे बढ़ाते हुए पेशेवर काम के स्तर तक पहुंचाया और दिनों दिन वे इनके लिये विकास के कदम आगे बढ़ाते जा रहे हैं।"

    चीनी परोपकारी संगठन मीरा प्लैनेट के संस्थापक चू थङफ़ेई ने जानकारी देते हुए कहा कि मीरा प्लैनेट ने विशेष तौर पर एक कार्य रूम खोला है, जिसमें आत्मविमोही व्यक्ति हस्त निर्मित कलात्मक वस्तुओं के उत्पादन से जुड़ी शिक्षा और अभ्यास प्राप्त कर सकते हैं। यही नहीं, मीरा प्लैनेट इन व्यक्तियों द्वारा बनाई गई वस्तुओं के लिए उचित बिक्री तरीका भी खोज निकालेगा। बाज़ार में स्वीकृत वस्तुओं के उत्पादन में आंशिक कार्य आत्मविमोही रोगियों को सौंप दिया जाता है। लक्ष्य ये है कि ये आत्मविमोही व्यक्ति सच्चे मायने में समाज में प्रवेश कर जीवन बिताने के लिए आत्मनिर्भर रह सकते हैं। चू थङफ़ेई ने योजना बनाई कि ज्यादा से ज्यादा उपक्रमों, समुदायों और संगठनों के साथ मिलकर अधिक से अधिक आत्मविमोही पीड़ितों को रोज़गार के लिए मदद दी जाए। भविष्य में मीरा प्लैनेट संगठन के विकास की चर्चा में उन्होंने कहा कि वे और अपने संगठन के दूसरे साथी विभिन्न प्रकार वाली चुनौतियों का मुकाबला करने को तैयार हैं। चू थङफ़ेई का कहना है:"भविष्य में हमारे सामने तरह-तरह की समस्याएं मौजूद हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर हमें अधिक से अधिक स्वयंसेवकों की आवश्यकता है, आत्मविमोही व्यक्तियों की सहायता करने वाले उपक्रमों के साथ मिलकर उनके रोज़गार संबंधी रास्तों की खोज करना है। हम तैयार हैं और आशा करते हैं कि दूसरे मित्रों के साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।"

    आत्मविमोही बच्चों के लिए रास्ता ढूंढ़ना मीरा प्लैनेट की परोपकारी खोज का पहला पड़ाव है। नए नए स्थापित इस संगठन का एक महान सपना है कि लाभप्रद और अनवरत परोपकारी प्रचलन की पूर्वशर्त पर देश भर में परोपकारी कार्य के लिए नया प्रतिरूप स्थापित किया जाएगा।

    मित्रों, हमारी आशा है कि आत्मविमोही रोग से पीड़ित बाल बच्चे ठीक हो जाएंगे। और भविष्य में उनका सही तरीके से पालन पोषण होने के बाद वे सुखमय जीवन बिता सकेंगे।


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