
11वें पंचन लामा अर्देनी क्वाइग्यी गिबो ने 15 तारीख को पेइचिंग जातीय संस्कृति भवन आकर यहां आयोजित तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार की 50 वर्षगांठ नामक बड़ा आकार वाली प्रदर्शनी देखी। उन्होंने कहा कि तिब्बत में भूदासों की मुक्ति बौद्ध धर्म के सिद्धांत से एकदम मेल खाती है।
पंचन लामा ने ध्यान से हर एक प्रदर्शनी हॉल को देखा । उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी ने पूर्ण रुप से पुरानी तिब्बती भूदास व्यवस्था की अंधेरी और जनता के दुखद जीवन और पिछले 50 वर्षों में तिब्बत में हुए भारी परिवर्तन प्रतिबिंबित किये है। तिब्बत में मुक्त हुए लाखों भूदासों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जीवन का अधिकार एवं विकास का अधिकार हासिल हुआ है। श्रमिक तिब्बत के मालिक बन गये हैं। तथ्यों से साबित हुआ है कि केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ही लाखों भूदासों को मनुष्य की प्रतिष्ठा व स्वतंत्रता दिला सकती है।
पंचन लामा ने कहा कि आज तिब्बती जनता का सुखमय जीवन आसानी से नहीं आया है, इसलिए, हमें इसे मूल्यवान समझना चाहिए। वे खुद पहले की ही तरह देशभक्ति व धर्मभक्ति की गौरव परम्परा का प्रचार प्रसार करके तिब्बती बौद्ध धर्म के समाजवादी समाज के अनुरूप होने के लिए कोशिश करेंगे और देश के पुनरेकीकरण, जातीय एकता और तिब्बत में सामंजस्यपूर्ण व स्थिर समाज की स्थापना करने में अपना योगदान प्रदान करेंगे। (श्याओयांग)
