विश्व महावारी स्वच्छता दिवस पर मधुलिका चौहान से ख़ास बातचीत

2019-05-28 11:34:15
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हर साल 28 मई को विश्व महावारी स्वच्छता दिवस मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म सम्बन्धी गलत अवधारणा को दूर करना और महिलाओं और किशोरियों को महावारी प्रबंधन सम्बन्धी सही जानकारी देना है। इस अवसर पर अनेक जगहों पर महावारी स्वच्छता से संबंधित अनेक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

चीन में रह रही एक भारतीय लेखिका, समाजसेवी एवं आईटी प्रोफेशनल मधुलिका चौहान ने सीआरआई के साथ खास बातचीत की और कहा, “भारत में महिलाओं व बालिकाओं में मासिक धर्म की विस्तृत जानकारी न होने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।”

पिछले लगभग 12 वर्षों से उत्तरी चीन के तालियन शहर में रह रही मधुलिका चौहान एक आईटी कंपनी में काम करती हैं और लेखन व सामाजिक कार्यों में भी अपना समय देती हैं। उन्होंने सीआरआई के साथ खास बातचीत में कहा, “भारत में आज भी 50 प्रतिशत से ज्यादा किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं, महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है जबकि आधे से ज्यादा को तो ये लगता है कि मासिक धर्म कोई अपराध है।”

मधुलिका चौहान वाराणसी उत्तर प्रदेश (भारत) में संचालित "वानप्रस्थ सामाजिक संस्था", जो महिलाओं व बालिकाओं के स्वास्थ्य और वृद्धों की देखभाल के लिए काम करती है, से जुड़ी हुई हैं और उसकी एनआरआई समन्वयक भी हैं। मधुलिका चौहान के मुताबिक, उनकी वानप्रस्थ सामाजिक संस्था छात्राओं को सेहत का पाठ पढ़ाती है, साथ ही महिलाओं व बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ हर महीने हजारों पैकेट सेनेटरी पैड वितरित करती है।

उन्होंने बातचीत में कहा, “छात्राओं को यदि सही समय पर रोगों की रोकथाम की जानकारी दी जाए तो भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि मासिक धर्म के दौरान उपयोग किये जाने वाले सुरक्षित उत्पादों की सहज उपलब्धता न होना बड़ी समस्या है और यह महिलाओं व किशोरी बालिकाओं की गतिशीलता में बाधा बनती है।

मधुलिका चौहान ने बताया कि वह चीन में भी महिलाओं व किशोरियों को महावारी स्वच्छता से जुड़ी जानकारी देती हैं, और जागरूकता बढ़ाने के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित करती हैं। उनका यह भी कहना है कि चीन में महिलाओं व बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता काफी अच्छी है।

भारत के मुरादाबाद से आयी मधुलिका ने बताया कि उन्हें बचपन से ही लिखने व पढ़ने का शौक रहा है। उन्होंने कई कहानियां और उपन्यास लिखी हैं, जिसमें से 2 का प्रकाशन भी हो चुका है और बाकियों के प्रकाशन की बात चल रही है। साल 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें लेखन व सामाजिक कार्यों में सहयोग व भारत से दूर रह कर भी अपनी जड़ों से जुड़कर सेवा कार्यों के लिए "प्रवासी भारतीय पुरस्कार" से सम्मानित किया गया है। भारत के तत्कालीन केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वी.के. सिंह ने उन्हें यह पुरस्कार भेंट किया।

(अखिल पाराशर)

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