09 कहावत से जुड़ी कथा--होशियार बचपन

2017-11-21 21:30:43
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09 कहावत से जुड़ी कथा--होशियार बचपन

 होशियार बचपन  小时了了

 “होशियार बचपन”चीनी कहावत से जुड़ी एक कथा है, इसे चीनी भाषा में“श्याओ श ल्याओ ल्याओ”कहा जाता है।

ईसा पूर्व छठी शताब्दी में चीन में कंफ्युशियस नाम का एक विश्वविख्यात दार्शनिक और शिक्षा विशेषज्ञ का जन्म हुआ। उसने जिस कंफ्युशियस शास्त्र का प्रवर्तन किया , वह दो हजार से अधिक साल लम्बी पुरानी चीनी संस्कृति का सबसे अहम भाग बन गया। चीन के सामंती समाज में सभी शासक कंफ्युशियस शास्त्र को परम्परागत और प्रमाणिक विचारधारा मानते थे। इसी के कारण कंफ्युशियस परिवार भी चीन में एक नामी खानदान रहा। कंफ्युशियस की उत्तरवर्ती संतानों में भी अनेक प्रसिद्ध व्यक्ति उभरे। उसका 20वीं पीढ़ी का परपोता खोंग रोंग (Kong Rong) चीन के इतिहास में एक मशहूर व्यक्ति माना जाता है। खोंग रोंग के बचपन की एक कहानी भी बहुत लोकप्रिय है ।

खोंग रोंग का जन्म ईसा दूसरी शताब्दी में हुआ था। पारिवारिक शिक्षा से प्रभावित होकर वह बचपन से ही बहुत होशियार निकला, खास कर वह बहुत तेज़ और हाजिर जवाब था। छोटी उम्र में ही उसका नाम काफी मशहूर हो गया।

दस साल की उम्र में वह पिता के साथ तत्कालीन राजधानी लो यांग (Luo Yang) में स्थानीय पदाधिकारी ली युआनली (Li Yuanli) से मिलने गया। ली युआनली एक मशहूर विद्वान था, पर बहुत घमंडी भी था। रोज़ बड़ी संख्या में लोग उससे मिलने आते थे, लेकिन जो आगंतुक नामी नहीं होता, उसके आने की सूचना ली युआनली को नहीं पहुंचायी जाती थी।

दस वर्षीय खोंग रोंग इस मशहूर विद्वान से मिलने का बहुत इच्छुक था। एक दिन, वह ली युआनली के भवन के पास गया और उसने चौकीदार से ली युआनली से मुलाकात करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। चौकीदार ने जब देखा कि वह एक बालक है, तो उसने उसे भगाना चाहा, स्थिति भांप कर खोंग रोंग को तुरंत एक चाल सूझी, उसने चौकीदार से कहा कि वह ली युआनली का एक रिश्तेदार है, ली युआनली ज़रूर उससे मिलेंगे।

09 कहावत से जुड़ी कथा--होशियार बचपन

चीन के इतिहास में एक मशहूर व्यक्ति खोंग रोंग 

चौकीदार ने खोंग रोंग के आगमन की खबर ली युआनली तक पहुंचायी, सुनकर ली युआनली को बहुत ताज्जुब हुआ कि उसका ऐसा कैसा एक रिश्तेदार है, इसलिए उसने खोंग रोंग से मुलाकात करने का निश्चय किया।

खोंग रोंग अन्दर आया, ली युआनली ने उससे पूछा कि तुम्हारा मेरे साथ  क्या रिश्ता है?

खोंग रोंग ने कहा कि मैं कंफ्युशियस की उत्तरवर्ती संतान हूं, आप लाओ च (Lao zi) के वंशज हैं। यह सर्विदित है कि कंफ्युशियस ने कभी लाओ च से शिष्टाचार के बारे में शिक्षा ली थी, उन दोनों में गुरू शिष्य का संबंध था, इसी के आधार पर मैं और आप पुराने रिश्तेदार हैं।

असली बात यह थी कि चीन के इतिहास में कंफ्युशियस और लाओ च एक ही जमाने के लोग थे। लाओ च भी सुप्रसिद्ध दार्शनिक था, जो चीन के ताओ धर्म का प्रवर्तक माना जाता है। लाओ च का असली नाम ली तान (Li Dan) है। कहा जाता था कि जब कंफ्युशियस को कोई सवाल समझ नहीं आता , तो वह विनम्रता से ली तान से पूछता था। ली तान और ली युआनली दोनों के कुल नाम ली था, इसलिए खोंग रोंग कहता था कि ली युआनली ली तान का वंशज है।

ली युआनली के भवन में बहुत सम्मानीय मेहमान मौजूद थे, उन सभी को दस साल के खोंग रोंग की हाजिर जवाबी और ज्ञान पर आश्चर्य हुआ।

इस समय छन वेइ (Chen Wei) नाम का एक विद्वान भी ली युआनली से मिलने आया। छन वेइ भी काफ़ी नामी विद्वान था। वह खोंग रोंग की होशियारी को महत्व नहीं देता था। उससे खोंग रोंग के सामने कहा कि बचपन में होशियार है, बड़ा होने पर निकम्मा भी हो सकता है। तेज़ खोंग रोंग ने तुरंत इसका जवाब देते हुए कहा कि मैं समझता हूं कि श्रीमान छन वेइ आप बचपन में ज़रूर होशियार रहे होंगे। खोंग रोंग के इस जवाब का मतलब था कि छन वेइ अब एक निकम्मा व्यक्ति है। खोंग रोंग के इस जवाब ने छन वेई को बड़ी दुविधा में डाल दिया और उसके मुंह से कुछ देर तक एक शब्द भी निकल पाया।

खोंग रोंग के बारे में नाशपाती का बंटवारा नामक कहानी भी बहुत लोकप्रिय है। जिसके अनुसार बचपन में खोंग रोंग जब अपने परिजनों के साथ नाशपाती खाता था। तो वह सबसे बड़े वाली नाशपाती को बड़े लोगों को देता था और खुद छोटा वाला खाता था, जो बहुत शिष्ट और समझदार तरीका था।

बड़ा होने के बाद खोंग रोंग एक मशहूर विद्वान बना और एक स्थानीय प्रशासक के पद पर भी नियुक्त किया गया। किन्तु उसके जीवन काल में चीन   विभाजित हुआ था और चीन के इतिहास में मशहूर त्रि-राज्य काल संपन्न होने जा रहा था। एक परम्परागत विद्वान के नाते खोंग रोंग ने अपने लेखन और कथन में तत्कालीन राजनीति पर घोर निराशा और असंतोष व्यक्त किया, जिससे वह तत्कालीन शासक से घृणा का पात्र बन गया और अंत में उसकी चीन के तत्कालीन सेनापति छाओ छाओ (Cao Cao) द्वारा हत्या कर दी गयी।

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