07 कुन और यु द्वारा बाढ़ पर काबू करना

2017-09-19 20:51:08
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 कुन और यु द्वारा बाढ़ पर काबू करना

 कुन और यु द्वारा बाढ़ पर काबू करना  鲧禹治水 

 “कुन और यु द्वारा बाढ़ पर काबू”नाम की पौराणिक कहानी को चीनी भाषा में इसे“कुन यू च श्वेइ”(gǔn yǔ zhì shuǐ) कहा जाता है। इसमें“कुन और यू”दो महान व्यक्तियों के नाम हैं, जबकि“च श्वेइ)”का अर्थ है बाढ़ पर काबू करना।

चीन में महान यु की बाढ़ पर काबू पाने की कहानी हर किसी की जबान पर है, जबकि उसका पिता कुन भी बाढ़ पर काबू पाने की अथक कोशिश करने वाला एक महान व्यक्ति था। सुनिए बाढ़ पर काबू करने से जुड़ी यह पौराणिक कहानी

प्राचीन काल में चीन की धरती पर एक बार भयंकर बाढ़ आई, जो लगातार 22 साल तक बर्बादी मचाती रही, जिससे विशाल भूमि जलमग्न हो गई, गांव बर्बाद हुए, खड़ी फसल नष्ट हो गई और प्रजा बेघर हो गई। बाढ़ और खूंख्रार जंगली जानवरों के चंगुल में फंसे मानव की आबादी तेज़ी से घटती गई। इस पर राजा याओ बहुत चिंतित हुआ। उसने विभिन्न कबीलों के मुखियाओं की बैठक बुलाकर बाढ़ पर काबू पाने के तरीके की खोज की। अंत में कुन को बाढ़ पर नियंत्रण करने का काम सौंपा गया।

आज्ञा पाने के बाद कुन ने भारी बर्बादी मचाने वाली बाढ़ पर काबू पाने के लिए उपाय सोचना शुरू किया। उसने सोचा कि जब बाढ़ का पानी आए, तो उसे रोकने के लिए गांवों के बाहर बांध बनाया जाए, तो बाढ़ पर नियंत्रण पाया जा सकता है। पर बाढ़ का पानी इतना ज्यादा हो, उसे रोकने के लिए तमाम मिट्टी और पत्थर की आवश्यकता है, जो कहां मिल सकेंगे।

इसी वक्त पानी में से एक दिव्य कछुआ बाहर आया, उसने कुन को बताया कि स्वर्ग में एक प्रकार की दिव्य मिट्टी है। अगर आप उसे वापस ला सके और धरती पर डाल दें, तो दिव्य मिट्टी तुरंत ज्यादा बढ़ जाएगी और पहाड़ का रूप ले लेगी, इस तरह बांध बन जाएगा। यह सुनकर कुन की खुशी का न ठिकाना रहा, कछुए से विदा लेकर कुन दूर पश्चिम की दिशा में निकल गया।

लाखों मुसीबतें झेलकर अंत में कुन पश्चिम के खुनलुन पर्वत पर जा पहुंचा। स्वर्ग सम्राट से मिलने के बाद उसने दिव्य मिट्टी मांगी, ताकि इससे बाढ़ को रोक कर प्रजा को संकट से उबारा जाए। लेकिन स्वर्ग सम्राट ने उसकी मांग मानने से इनकार कर दिया। बाढ़ से बुरी तरह परेशान प्रजा की याद में कुन बहुत चिंतित था, तो उसने स्वर्ग के पहरेदारों की लापरवाही से फायदा उठा कर दिव्य मिट्टी चोरी कर ली। दिव्य मिट्टी लेकर कुन पूर्व में वापस लौटा। उसने जल्दी ही दिव्य मिट्टी को पानी में फेंका, सचमुच करिश्मा था कि दिव्य मिट्टी क्षण में ही बढ़ने लगी, जब बाढ़ का पानी एक मीटर बढ़ा, तो मिट्टी भी एक मीटर बढ़ी, जब पानी दस मीटर बढ़ा, तो मिट्टी भी दस मीटर बढ़ गई, इस तरह बाढ़ का पानी विशाल बांध के बाहर रोका गया, प्रजा ने बाढ़ से छुटकारा पाया, और बड़ी खुशी के साथ फिर खेतीबाड़ी करने लगी।  

किन्तु स्वर्ग सम्राट को कुन द्वारा दिव्य मिट्टी चुराने की बात का पता चला, तो उसे बहुत गुस्सा आया। उसने तुरंत स्वर्ग सिपाहियों को धरती पर दिव्य मिट्टी वापस लाने भेजे। दिव्य मिट्टी वापस ले जाने पर बाढ़ का पानी फिर से उफनने लगा। बांध टूट पड़ा, गांव बर्बाद हो गए, खड़ी फ़सल नष्ट हुई और बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए।

राजा याओ को बड़ा क्रोध आया। उसने आज्ञादेश जारी कर कहा:“कुन केवल बांध बनाकर बाढ़ रोकने का तरीका जानता है, लेकिन एक बार बांध टूटने पर उसका नुकसान और अधिक बड़ा हो चुका है। नौ साल तक बाढ़ पर काबू पाने का काम किया था, आखिर में विफल हो गया। उसे मौत की सजा दी जानी चाहिए।”

इस तरह कुन को युशान नाम के पहाड़ में कैद कर दिया गया और तीन साल के बाद उसे मौत की सजा दी गई। मरते दम तक भी कुन को बाढ़ से पीड़ित प्रजा की याद थी और उसे बड़ा दुख और आक्रोश महसूस हो रहा था।

बीस साल के बाद राजा याओ ने राजा की गद्दी श्वुन को सौंपी। नए राजा श्वुन ने बाढ़ पर काबू पाने का काम कुन के पुत्र यु को दिया। इस बार स्वर्ग सम्राट ने दिव्य मिट्टी को यु के हवाले कर दिया। अपने पिता की भांति पहले यु ने भी बांध बनाकर बाढ़ रोकने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही उसे पता चला गया कि बांध से अवरूद्ध बाढ़ का पानी और अधिक शक्तिशाली हो जाता है, जो कुछ समय में ही बांध को तोड़ सकता है। कई बार प्रयोग किये जाने के बाद यु को पता चला कि बाढ़ का पानी केवल बांध बनाने से ही नहीं रोका  जा सकता है, जहां उसे बांध से रोके जाने की जरूरत हो, वहां पर बांध बनाया जाना चाहिए। जहां पानी को बहाकर निकाले जाने की जरूरत हो, वहां जल मार्ग बना कर पानी निकाला जाना चाहिए। यह उपाय सूझने के बाद यु एक भीमकाय कछुए पर दिव्य मिट्टी लादने का काम किया गया, जहां जमीन नीची थी, वहां दिव्य मिट्टी डालकर प्रजा के आवास स्थान को ऊंचा कर दिया गया। इसके अलावा यु ने स्वर्ग ड्रैगन की मदद से पहाड़ों और घाटियों में सुगम जल मार्ग बनवाये, जिससे अवरूद्ध पानी निकाल कर समुद्र में बहा दिया गया।

कुन और यु द्वारा बाढ़ पर काबू करना

 कुन और यु द्वारा बाढ़ पर काबू करना  鲧禹治水

कहा जाता था कि महान यु ने अपने अद्भुत ताकतवर भुजा बल से ड्रैगन द्वार नाम के पहाड़ को काट दिया। इससे पीली नदी का पानी कटे पहाड़ों के खड़े चट्टानों के बीच गुजर कर समुद्र में जा मिलता है। ड्रैगन द्वार पहाड़ के पूर्व में पीली नदी के मध्यम भाग में महान यु ने पीली नदी के जल मार्ग को अवरूद्ध बनाने वाले पहाड़ को कई भागों में तोड़ काट दिया, जिससे नदी का पानी बल खाते हुए नीचे की ओर बहने लगा और वहां सानमनश्या यानी त्रि-द्वार वाली घाटी पैदा हुई। सदियों से पीली नदी का पानी ड्रैगन द्वार नामक घाटी और त्रि-द्वार घाटी से बड़ी वेग से बहकर गुजरता है और दोनों जगहें मशहूर प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक बन चुकी हैं।

महान यु के बारे में बहुत सी रूचिकर प्रथाएं चीनियों में प्रचलित है। एक प्रथा के अनुसार महान यु शादी के चौथे दिन र घर छोड़कर बाढ़ पर काबू पाने के काम के लिए चला गया था, उसे बाढ़ पर काबू पाने का काम किए 13 साल लग गए और वह तीन बार घर के पास से गुजरा भी, पर एक बार भी उसने घर में प्रवेश नहीं किया। लाखों मुसीबतों और कठिनाइयों को दूरकर महान यु ने अंत में बाढ़ पर पूरी तरह काबू पाया और पानी नदियों के जल मार्गों में सुगम रूप से बहने लगा और समुद्र में जा मिलता, प्रजा को संकट से छुटकारा मिल गया। महान यु का आभार प्रकट करने के लिए प्रजा ने उसे महाराजा माना और उसके असाधारण कारनामे को देखते हुए राजा श्वुन ने भी स्वेच्छापूर्वक राजा का आसन उसे दे दिया।

आदि समाज में मानव कल्याण के लिए योगदान देने वाले वीरों को देवता के रूप में माना जाता था, बाढ़ पर काबू पाने में महान कार्य करने वाले कुन और यु की कहानी भी चीन की पौराणिक कथा के रूप में सदियों से प्रचलित है और दोनों चीन में प्राचीन वीर के रूप में सम्मानित रहे। 

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