05 होउ यी का सूरज को मार गिराना

2017-09-05 20:32:05
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05 होउ यी का सूरज को मार गिराना

होउ यी का सूरज को मार गिराना 后羿射日

“होउ यी के सूरज को मार गिराना”नाम की पौराणिक कहानी को चीनी भाषा में इसे“होउ यी श रइ”(hòuyì shè rì) कहा जाता है। इस में“होउ यी”एक वीर का नाम है, जबकि“श”का अर्थ है तीर से मार गिरना और“रइ”का अर्थ है सूरज।

प्राचीन काल में आसमान में दस सूर्य पैदा हुए। उनकी जबरदस्त रोशनी से जमीन सूख गयी, फ़सल जल कर नष्ट हो गयी और मनुष्य तपती हुई गर्मी से बेहोश होकर दम तोड़ने लगे। तपती हुई जल वायु में कुछ शैतान और राक्षस सूखी नदियों, झीलों और जंगलों से बाहर निकलकर नरसंहार मचा रहे थे।

मनुष्य पर पड़े संकट से स्वर्ग सम्राट को भी सदमा लगा। उसने धनु देवता की संतान होउ यी को धरती पर मनुष्ट को संकट से उबारने के लिए भेजा। होउ यी स्वर्ग सम्राट द्वारा भेंट में दिए लाल रंग के धनुष और सफेद रंग के बाण लेकर अपनी लावण पत्नी छांग-अ के साथ स्वर्ग लोक से जग लोक में उतर आए।

धरती पर उतरने के बाद होउ यी ने दस सूर्यों को यह सलाह दी कि रोज़ उनमें से एक आसमान में घूमने आए, जिससे धरती को गर्मी और मनुष्य को रोशनी भी मिली, जमीन तेज़ किरणों से तपती सूख होने से भी बच सके। लेकिन सूरजों ने होउ यी की सलाह नहीं मानी। सूरजों की हठ से क्रुद्ध होकर होउ यी ने सूरजों को मार गिराने की ठान ली।

उसने कंधे पर से लाल धनु उतारा और म्यांन से सफेद बाण बाहर निकाला और घमंड से अंधे हुए सूर्यों को मार गिराने के लिए छोड़ा। देखते ही देखते नौ सूरज मार गिराए गए। आसमान में मात्र एक सूर्य रह गया, तब से धरती शांत हो गई, मनुष्य पुनः शांति चैन जीवन बिताने लगे। वे होउ यी के बहुत आभारी थे।

इस महान कारनामे के कारण होउ यी अन्य स्वर्ग देवताओं के ईर्ष्या के पात्र बन गये। उन्होंने स्वर्ग सम्राट के सामने उसकी आलोचना कर झूठा आरोप लगाया, जिससे सम्राट होउ यी से नाराज हो गया।

स्वर्ग सम्राट ने होउ यी और उसकी पत्नी छांग-अ को देव लोक से बहिष्कृत कर जग लोक में भेजा और दोनों को फिर स्वर्ग लोक वापस आने की इजाजत नहीं दी। गलत सज़ा से दुखी होकर होउ यी और छांग-अ धरती में उतरकर असली नाम छिपा कर प्रजा के भीतर बस गए, वे आखेटक का जीवन बिताने लगे और जीवन बहुत दूभर हो गया।

05 होउ यी का सूरज को मार गिराना

होउ यी का सूरज को मार गिराना 后羿射日

समय तेज़ी से गुजरा। यह विचार लगातार होउ यी को सताता रहा कि उसी के कारण उसकी पत्नी छांग-अ को भी स्वर्ग में वापस नहीं जा सकी। उसने सुना कि खुनलुन पर्वत पर रहने वाले देवता शी वांगमु(Xi Wangmu) के पास दिव्य दवा है, जिसे खाने के बाद मनुष्य स्वर्ग पर आरोहित हो सकता है। तो होउ यी लम्बी सफ़र तय कर लाखों मुसीबतों को सहकर खुनलुन पर्वत तक जा पहुंचा, और शी वांगमु से दिव्य दवा मांगी। लेकिन यह दवा केवल एक व्यक्ति के लिए पर्याप्त थी, होउ यी का जी नहीं चाहता था कि अपनी प्यारी पत्नी को जग में छोड़कर वह अकेला स्वर्ग जाए, लेकिन यह भी नहीं मानता था कि पत्नी उसे छोड़ कर अकेली स्वर्ग जाए। इस दुविधा से परेशान वह घर लौटा और दवा को छिपा कर गुप्त जगह पर रख दिया।

होउ यी की पत्नी छांग-अ कठोर और गरीब जीवन से दुखी थी, एक दिन जब होउ यी घर पर नहीं था, तो उसने दिव्य दवा की तलाश कर अकेले खा ली। तुरंत उसका शरीर उत्तरोतर हल्का होता गया और धीरे-धीरे वह आकाश की ओर उड़ने लगी। उड़ती-उड़ती अंत में वह चांद पर जा पहुंची और वहां के शीत महल में रहने लगी। जब उसे पता चला कि पत्नी स्वर्ग लोक चली गई, तो होउ यी को बड़ा दुख हुआ, वह दिव्य बाण से पत्नी को मार गिराने को कतई तैयार नहीं था, इस तरह दोनों सदा के लिए जुदा हो गए।

अब होउ यी अकेला जीवन बिताने लगा। वह शिकारी के जीवन पर आश्रित रहा, उसने कई शिष्यों को स्वीकार कर उन्हें तीर मारने का कौशल सिखाया। शिष्यों में से फ़ेंग मङ (Feng Meng) नाम का एक व्यक्ति था, वह होशियार था, कुछ ही समय में उसने तीरंदाजी के बेहतरीन कौशल पर अधिकार किया। लेकिन इस शिष्य के मन में एक दुष्ट विचार आया कि जब तक होउ यी रहेगा, तब तक वह खुद तीरंदाजी के नम्बर एक पर नहीं आ सकेगा। एक दिन, जब शराब पीकर होउ यी गहरी नींद में सोया था, तो फङमन ने उसे तीर मार कर हत्या कर दी।

छांग-अ चांद पर तो आरोहित हुई थी, लेकिन वहां निर्जन महल में केवल एक खरगोश और एक बुजुर्ग था, जो महज औषधि बनाना तथा वृक्ष काटना जानते थे। छांग-अ को अपने पति के साथ सुनहरे दिन और जग लोक के स्नेह की याद आई, तो उसे और अधिक अकेलापन और उदासी महसूस हुई, इसलिए वह रोज़ अपने को चांद के महल में बन्द करती रही।

श्रोता दोस्तो, अभी आपने सुनी“होउ यी के सूरज को मार गिराना”नाम की पौराणिक कहानी, इसे चीनी भाषा में“होउ यी श रइ”(hòuyì shè rì) कहा जाता है। इस में“होउ यी”एक वीर देवता का नाम है, जबकि“श”का अर्थ है तीर से मार गिरना और“रइ”का अर्थ है सूरज।

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