04 बैल पालक और मेघ बुनाई परी

2017-08-29 20:41:16
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04 बैल पालक और मेघ बुनाई परी

 बैल पालक और मेघ बुनाई परी 牛郎织女

  “बैल पालक और मेघ बुनाई परी”शीर्षक पौराणिक कहानी को चीनी भाषा में“नियु लांग और ची न्यु”(niú láng zhī nǚ) कहा जाता है। इसमें“नियु लांग”का मतलब है बैल पालक, जबकि“ची न्यु”का अर्थ है मेघ बुनाई की परी। यह एक प्रेम कहानी है, जो चीन में बहुत लोकप्रिय है।

नियु लांग एक बैल पालक था। वह गरीब था, पर एक खुशमिजाज युवा था। उसके साथ मात्र एक बूढ़ा बैल और जमीन जोतने के लिए हल था। नियु लांग रोज़ खेत में काम करने जाता था, घर वापस आने पर खुद खाना बनाता था और कपड़े धोता था। जीवन काफी दूभर था, लेकिन किसे पता था कि एक दिन उसके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आएगा।

एक दिन, मेहनत करने के बाद नियु लांग जब घर लौटा, तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि उसका कमरा बहुत साफ़ सुथरा है, गंदे कपड़ों की भी साफ़ धुलाई कर उन्हें अच्छी तरह तह कर दिया गया था। मेज़ पर गर्म-गर्म खाना परोसा था, सुगंधित तरकारी महक रही थी। नियु लांग को बड़ा ताज्जुब हुआ। यह कैसे हुआ, क्या देव लोक से कोई आया है?माथे पर ज़ोर देने के बाद भी नियु लांग इस पहेली को नहीं समझ सका।

तब से लगातार कई दिन तक ऐसा होता रहा। नियु लांग अपना धैर्य खो बैठा। उसने इसका पता लगाने की ठान ली।

एक दिन, सामान्य दिन की ही तरह सुबह-सुबह नियु लांग घर से निकला। लेकिन वह थोड़ी दूर चलने के बाद ही वापस घर के पास छुप गया और घर पर नज़र रखने लगा।

थोड़ी देर में एक रूपवती युवती आई। वह नियु लांग के घर में प्रवेश कर घर-गृहस्थी में जुट गई। अपनी कौतुहल नहीं रोक सका, तो नियु लांग अपने घर पहुंचा और युवती के सामने जाकर पूछा:“ये सुन्दर लड़की, क्या तुम मुझे बता सकती हो कि तुम मेरी गृहस्थी में मदद क्यों कर रही हो ? ”

नियु लांग की आवाज़ पर युवती चौंक उठी। वह लज्जा के साथ धीमी आवाज़ में बोली:“मेरा नाम ची न्यु है, मुझे तुम्हारे कठिन जीवन पर तरस आया, तो मदद के लिए आई हूं।”

यह सुनकर नियु लांग को बड़ी खुशी हुई और उसने साहस के साथ पूछा:“मेरे साथ शादी करो, हम दोनों साथ-साथ मेहनत करेंगे और साथ-साथ रहेंगे।”

ची न्यु ने हां भरी। उसी दिन दोनों विवाह बंधन में बंध गए। इसके बाद रोज़ नियु लांग खेत पर जाता था और ची न्यु घर में कपड़ों की बुनाई करती थी और गृहस्थी चलाती थी। उनका जीवन बहुत सुखचैन से चल रहा था।

इस तरह कुछ साल बीत गए। दोनों के एक लड़का और एक लड़की भी हुए। परिवार बड़े आनंद के साथ चल रहा था।

सहसा एक दिन आकाश में काला बादल छाए, तेज़ हवा चली, स्वर्ग लोक से दो सेनापति उतरकर नियु लांग के घर आए। उन्होंने नियु लांग को बताया:“ची न्यु स्वर्ग लोक के सम्राट की पोती है, जो मेघ की बुनाई का काम संभालती है, लेकिन कुछ साल पहले वह घर को छोड़ कर चली गई। इन सालों में उसकी तलाश हो रही थी।”

दोनों स्वर्ग सेनापति जबरदस्ती से ची न्यु को स्वर्ग लोक वापस ले गए।

अपनी पत्नी को जबरदस्ती स्वर्ग लोक में ले जाते देखकर नियु लांग लाचार भी था और असीम दुख में डूब गया। दोनों नन्हें बच्चों को गोद में थामे उसने ची न्यु को वापस ले आने और पारिवारिक मिलन कराने का संकल्प किया, पर जग के लोग भला किस तरह स्वर्ग जा सकते हैं?

नियु लांग के दुख और परेशानी को देख कर सालों से साथ रहे उस बूढ़े बैल का मुंह खुला और उसने मानव की आवाज में कहा:“तुम मेरा वध कर दो, मेरे चमड़े को अपने शरीर पर ओढ़ ले, तब तुम आकाश में उड़ने के योग्य हो जाओगे और स्वर्ग पहुंचकर ची न्यु से मिल पाओगे।”

नियु लांग किसी भी तरह अपने प्यारे बूढ़े बैल को मारने को तैयार नहीं था। बूढ़े बैल ने उसे बार-बार मनाया, कोई दूसरा चारा न होने पर उसे विवश होकर बड़े दुख से बूढ़े बैल की मांग मान ली।

बूढ़े बैल के चमड़े को शरीर पर ओढ़े अपने दो बच्चों को दो थैलों पर उठाकर नियु लांग स्वर्ग लोक की ओर उड़ा। लेकिन स्वर्ग भवन कड़े पहरे में था, गरीब जग से आए उस नियु पर ज़रा भी ध्यान नहीं गया। स्वर्ग सम्राट ने नियु लांग और ची न्यु की मुलाकात से साफ़ इंकार कर दिया।

नियु लांग और दो बच्चों के बार-बार विनती पर सम्राट ने अंत में उनकी संक्षिप्त मुलाकात की इजाजत दी। नज़रबंद हुई ची न्यु को अपने पति और बच्चों से मिलने पर बड़ी खुशी भी हुई और बड़ा दुख भी।

04 बैल पालक और मेघ बुनाई परी

 बैल पालक और मेघ बुनाई परी की मुलाकात साल भर एक बार

मुलाकात का समय जल्दी ही खत्म हुआ। स्वर्ग सम्राट ने ची न्यु को अलग ले जाने का हुक्म दिया। वियोग में दुखी नियु लांग अपने दो बच्चों को हाथ से पकड़े ची न्यु का पीछा करने लगा। कई बार पांव के बल गिरा और फिर उछल कर उठ खड़े हुआ और पीछा जारी रखा। देखते ही देखते पास भी पहुंच गया, लेकिन स्वर्ग रानी ने अपने बालों से एक स्वर्ण केशबंध उतार कर नियु लांग और ची न्यु के बीच एक रेखा खींच दी, जिसने एक चौड़ी नदी ने आकाश गंगा का रूप ले लिया।

बड़े दुख की बात थी कि नियु लांग और ची न्यु तभी से आकाश गंगा के दोनों किनारो पर अलग हो गए और केवल एक दूसरे की ओर ताक सकते थे। दोनों पति-पत्नी को चीनी पंचांग के अनुसार हर साल के सातवें महीने की सातवीं तारीख को आपस में एक बार मिलने की अनुमति दी गई। उसी दिन लाखों की संख्या में मंगल सूचक मैगपाई (Magpie) ने उड़ आए अपने शरीर से आकाश गंगा पर एक लम्बा पुल बनाया, जिससे नियु लांग और ची न्यु के परिवार का एक बार मिलन हो पाता था।

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