01 लकड़ी रगड़ने से आग पैदा होने की कहानी

cri 2017-08-08 19:52:45
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01 लकड़ी रगड़ने से आग पैदा होने की कहानी

लकड़ी रगड़ने से आग पैदा होने की कहानी 钻燧取火

"लकड़ियों को आपस में रगड़ने से आग पैदा होने"एक पौराणिक कहानी है, चीनी भाषा में इसे"ज़ुआन स्वी छ्यू हुओ"(zuān suì qǔ huǒ) कहते हैं। "ज़ुआन"का अर्थ है"रगड़ना", "स्वी" का अर्थ है"लड़की", "छ्यू"का अर्थ है"लाना"और"हुओ" का अर्थ है"आग"। कुल मिलाकर कहा जाए, तो इसका मतलब हुआ लकड़ी पर रगड़ने से आग पैदा होना।

चीन की प्राचीन पौराणिक कथाओं में ऐसे कई शूर-वीरों की कहानी सुनने को मिलती है, जिन्होंने अपनी बुद्धिमता, साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देकर लोगों की सेवा में अपना जीवन लगा दिया। स्वी रन की कहानी भी ऐसी पौराणिक कथाओं में से एक है।

आदिम काल में मानव नहीं जानता था कि आग क्या चीज होती है और न ही आग का इस्तेमाल करना जानता था। उस दौर में रात के वक्त हर तरफ़ अंधेरा छाया रहता था। जंगली जानवरों की हुंकार सुनाई देती थी। लोग बड़े सहमे हुए सोते थे, रोशनी नहीं थी, ऐसे में रात बहुत ठंडी और डरावनी लगती थी। उस समय आग न होने के कारण मानव कच्चा खाना खाता था, बीमार भी बहुत पड़ता था और मानव की उम्र भी छोटी होती थी।

स्वर्ग लोक में फ़ु शी (Fu Xi) नाम का देवता रहता था। जब उसने पृथ्वी पर लोगों का मुश्किल जीवन देखा, तो उसे बड़ा दुख हुआ। उसे मानव को आग का हितकारी काम दिखा कर सिखाने का उपाय सूझा, सो उसने अपनी दिव्य शक्ति का इस्तेमाल कर जंगल में भारी वर्षा के साथ बिजली गिरायी, एक भारी गर्जन के साथ जंगल के पेड़ों पर बिजली गिरी और पेड़ आग से जल उठे। देखते ही देखते आग की लपटें धधकती हुई चारों फैल गयी, लोग बिजली के भंयकर गर्जन और धधकती हुई आग से भयभीत होकर इधर-उधर भाग गए। कुछ समय के बाद बारिश थम गई और बिजली की गर्जन भी शांत हो गई।

रात फिर आई, वर्षा के पानी से जमीन बहुत नम और ठंडी हो गई। इधर-उधर भागे हुए लोग फिर इकट्ठा हुए, वे डरते डरते पेड़ों पर जल रही आग देखते रहे, तभी एक नौजवान ने देखा कि पहले जब रात होती थी, तो जंगली जानवर हुंकार करते सुनाई देते थे, अब ऐसा नहीं हो रहा, क्या जंगली जानवर पेड़ों पर जलती हुई इस प्रकार की रोशनीदार चीज से डरते हैं? इस नौजवान ने मन में सोचा। वह हिम्मत जुटाकर आग के पास चला आया, तो उसे महसूस हुआ कि उसका शरीर गर्म हो उठा है।

बेहद आश्चर्य भरे स्वर में उसने लोगों को आवाज दी:"आओ, देखो, यह जलती हुई चीज खतरनाक नहीं है, यह हमारे लिए रोशनी और गर्मी लाई है।"

फिर लोगों ने यह भी देखा कि आग में कुछ जानवर जलकर मरे हैं। उसका मांस भी इंसान ने खाया तो पाया कि उनका स्वाद बहुत अच्छा है।

सभी लोग आग के पास जमा हो गए, आग में जले जानवरों का मांस खाया। उन्होंने पहले कभी इस तरह का मांस नहीं खाया था। मानव को तब मालूम हुआ था कि आग सचमुच काम आने वाली मूल्यवान चीज है, तब से उन्होंने पेड़ की टहनी और शाखाएं बटोरकर उन्हें आज से जलाया और सुरक्षित रखा। लोग रोज बारी-बारी से आग के पास रहते हुए उसे बुझने से बचाते रहे। लेकिन एक रात आग की रक्षा करने वाला व्यक्ति नींद से सो गया। पेड़ की शाखाएं पूरी तरह जल जाने के कारण आग बुझ गई। इस तरह लोग फिर अंधेरे और ठंड की हालत में वापस आ गए और मुश्किल भरा जीवन बिताने लगे।

देवता फ़ु शी को जब यह बात पता चली, तो वह उस नौजवान व्यक्ति के सपने में आया, जिसमें उसने युवक को बताया:"दूर दराज पश्चिम में स्वी मिन( Sui Ming) नाम का एक राज्य है, वहां आग का बीज मिलता है, तुम वहां जाकर आग के बीज वापस लाओ।"

सपने से जागकर नौजवान ने सोचा:"सपने में देवता ने जो बात कही थी, मैं उसका पालन करूंगा।"तब वह आग के बीज तलाशने के लिए रवाना हो गया।

ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों को लांघ, गहरी नदियों को पार कर और घने जंगलों से गुज़रा। कई मुसीबतों को झेलकर वह अंत में स्वी मिंग राज्य पहुंचा। लेकिन यहां भी उसे न कोई रोशनी दिखी, और न ही आग, हर जगह अंधेरा ही अंधेरा था। नौजवान को बड़ी निराशा हुई, इस पर वह स्वी मू नाम के एक पेड़ के पास बैठकर विश्राम करने लगा। सहसा, नौजवान की आंखों के सामने चमक उठी। फिर चली, फिर एक चमक उठी फिर चली गई। इस तरह चारों ओर हल्की-हल्की रोशनी हो गयी।

नौजवान तुरंत उठ खड़ा हुआ और चारों ओर नज़र दौड़ते हुए रोशनी की जगह ढूंढ़ने लगा। उसे पता चला कि स्वी मू नाम के पेड़ पर कई पक्षी अपनी कड़ी चोंच को पेड़ पर मार-मार कर उसमें पड़े कीट निकाल रहे हैं। जब एक बार वे पेड़ पर चोंच मारते, तो पेड़ में से तेज़ चिनगारी उठती। यह देखकर नौजवान के दिमाग में यह विचार आया कि कहीं आग के बीज इस पकार के पेड़ में तो नहीं हैं?

उसने तुरंत स्वी मू के पेड़ पर से एक टहनी तोड़ी और उसे पेड़ पर रगड़ने की कोशिश की। सच में ही पेड़ की शाखा से चिनगारी निकली, पर आग नहीं जल पायी। नौजवान ने हार नहीं मानी, उसने विभिन्न तरह की पेड़ की शाखाएं ढूंढ़ कर धीरज के साथ पेड़ पर रगड़ते हुए आजमाइश की, अंत में उसकी कोशिश रंग लायी । पेड़ की शाखा पर धुआं निकला, फिर आग जल उठी। इस सफलता की खुशी में नौजवान की आंखों में आंसू आ गए।

नौजवान अपने गृह राज्य वापस लौटा। वह लोगों के लिए आग के ऐसी बीज लाया, जो कभी खत्म नहीं हो सकते थे। आग के यह बीज हैं लकड़ी को रगड़ने से आग निकालने का तरीका। तभी से लोग आग के बारे में जानने लगे। उन्हें फिर सर्दी और घबराहट में जीवन नहीं गुजारना पड़ा।

नौजवान की बुद्धिमता और बहादुरी मानकर लोगों ने उसे अपना मुखिया चुना और उसे स्वी रन यानी आग लाने वाला पुरूष कहते हुए सम्मानित किया।

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