032 असमान व्यवहार का कारण

cri 2017-06-13 19:41:22
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असमान व्यवहार का कारण 前倨后恭

"असमान व्यवहार का कारण"शीर्षक नीति कथा को चीनी भाषा में"छ्यान च्यु होउ कोंग"(qián jù hòu gōng) कहा जाता है। इसमें"छ्यान"का अर्थ है पहला,"च्यु"का अर्थ है घमंडी, जबकि"होउ"का अर्थ है बाद में और"कोंग"का अर्थ है सम्मानपूर्ण। कुल मिलाकर कहा जाए, तो"छ्यान च्यु होउ कोंग"का अर्थ निकलता है पहले घमंडी और बाद में सम्मानपूर्ण, यानी घमंड से नम्रता में बदलना।

चीन के युद्धरत राज्य काल में (यानी ईसा पूर्व 475 से ईसा पूर्व 221 तक का समय,) सू छिन नाम का एक राजनीतिज्ञ था। उसने अपनी प्रसिद्ध कूटनीति के सहारे तत्कालीन कमज़ोर यान राज्य और चाओ राज्य को एकजुट कर शक्तिशाली छिन राज्य वंश का मुकाबला करने में असाधारण सफलता प्राप्त की और बड़ा सम्मान हासिल किया।

लेकिन बड़ा नाम कमाने से पहले सू छिन कई साल तक अपनी राजनीतिक कोशिश में विफल रहा था। कोई काम नहीं मिल पाने के कारण उसने गरीबी में अपना वक्त गुजारा, और सिर्फ फटे-पुराने कपड़े ही पहनता था। उसके ऐसी हालत में घर लौटने पर उसके मां-बाप, बड़ा भाई और भाभी तथा उसकी अपनी पत्नी सभी तिरस्कृत भाव से देखते थे। खास कर उसकी भाभी उसके साथ बड़ा बुरा व्यवहार करती थी और अकसर उसे निक्कमा कहती थी। उसका दावा था कि वह कभी कुछ नहीं कर सकता।

घर वालों के बुरे व्यवहार से सू छिन बहुत दुखी हो गया। वह कड़ी मेहनत के साथ पढ़ने लगा और राजनीतिक मामलों का लगन से अध्ययन करने लगा। पढ़ाई पूरी करने के बाद सू छिन फिर विभिन्न राज्यों में जा-जा कर राजाओं को प्रशासन का तरीका समझाने लगा। अन्त में उसने यान राज्य और चाओ राज्य को अपनी कूटनीति स्वीकार करवाने में सफलता पायी। इसके बाद उसने यान और चाओ राज्यों के विशेष दूत के रूप में दूसरे चार राज्यों को भी यान और चाओ के साथ मिलवाया। ये छह राज्य तत्कालीन शक्तिशाली छिन राज्य का मुकाबला करने के लिए एकजुट हो गए।

राजनीतिक कार्य में बड़ी सफलता प्राप्त होने पर सू छिन यान राज्य के राजा द्वारा प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया। फिर चाओ राज्य को राजा ने भी उसे राज्य की उच्च उपाधि प्रदान कर प्रधानमंत्री का काम देखने नियुक्त किया। उसे सौ रणरथ, हजार रेशमी कपड़े और दो लाख ओंस सोना भेंट किए।

एक बार, सू छिन किसी काम के लिए अपने घर वाले नगर लो यांग से गुज़र रहा था। घर वालों ने विशेष कर नगर से पन्द्रह मील दूर नगर के बाहर जाकर उसका स्वागत किया। उसके सम्मान में उसके मां बाप ने भव्य भोज आयोजित किया। उसकी पत्नी सिर झुकाकर उसकी बातें सुन रही थी और उसे आंखें उठाने की हिम्मत भी नहीं रही। उसका बड़ा भाई सिर झुकाए उसकी सेवा कर रहा था। जबकि पहले उसका हमेशा तिरस्कार करने वाली भाभी ने तो ज़मीन पर झुक कर उसके चरण छुए और मांफी मांगी।

अपने प्रति घर वालों के बर्ताव में इस प्रकार के बदलाव से सू छिन बहुत प्रभावित हुआ। उसने अपनी भाभी से पूछा:"भाभी जी, आप पहले क्यों बड़े दंभ के साथ मेरा अपमान करती थी, आज क्यों मेरे सामने इस तरह झुकती हैं?"

सू छिन की भाभी डर गई, उसे शर्म भी आई, उसने बार-बार हाथ जोड़कर कहा:"क्योंकि आप आज ऊंचे पद के अधिकारी बन गए है और आपके पास बेशुमार धन दौलत है।"

भाभी की बात सुनकर सू छिन ने लम्बी आह भर कर कहा:"मैं सू छिन तो वही सू छिन हूं, पर जब मैं गरीब था, मां बाप मुझसे अच्छा बर्ताव नहीं करते थे। जब मैं धनी हो गया हूं, तो सभी लोग मुझ से डरते हैं और मुझे सिर माथे पर बिठा रहे हैं। अगर ऐसा नहीं होता, तो कितना अच्छा होता।"

सुन वू के सैनिकों का प्रशिक्षण 孙武练兵

"सुन वू के सैनिकों का प्रशिक्षण"नाम की कहानी को चीनी भाषा में"सुन वू ल्यान पिंग"(sūn wǔ liàn bīng) कहा जाता है। इसमें"सुन वू"व्यक्ति का नाम है, जबकि"ल्यान"का अर्थ है अभ्यास करना और"पिंग"का अर्थ है सैनिक।

चीन के वसंत-शरद काल के समय (ईसा पूर्व 770 से ईसा पूर्व 476 तक के समय ) सुन वू नाम का एक मशहूर सेनापति था। उसकी सैन्य कृति——सुन ची की रणनीति आज भी विश्व में प्रसिद्ध है।

सुन वू की रण नीति पढ़कर तत्कालीन वु राज्य का राजा वु वांग बहुत प्रभावित हुआ। उसने सुन वू को अपनी सेना के सेनापति नियुक्त किया।

एक दिन, राजा वु वांग ने सुन वू को राज महल में बुलाया और उससे कहा: "आपकी रचना--सुन ची की रणनीति मुझे बहुत पसंद है। आपने अच्छी पुस्तक लिखी है। क्या आप अपने सैन्य सिद्धांत के मुताबिक राजमहल की स्त्रियों को भी सैन्य प्रशिक्षण दे सकते हैं?"

सुन वू ने जवाब में हां भरा और कहा:"मैं कर सकता हूं।"

राजा वु वांग ने अपने महल की एक सौ अस्सी महिलाओं को इकट्ठे कर उन्हें सुन वू के हवाले कर दिया और महिला सेना का गठन करने का काम सौंपा।

सुन वू ने सभी स्त्रियों को दो दलों में बांट कर दो सैन्य टुकड़ियां बनायी और राजा की दो रानियों को उनका नेता नियुक्त किया, सभी स्त्रियों को हथियार भी प्रदान किए गए।

सुन वू ने नव गठित स्त्री सेना को बताया:"तुम लोग मेरे आदेश के मुताबिक काम करो। जब मैं आगे देखने का आदेश जारी करता हूं, तो तुम लोग आगे देखो, मैं बाईं ओर देखने को कहूं, तो तुम्हें वहीं देखना होगा, मेरा आदेश न मानने वाले को सज़ा दी जाएगी।"

सैन्य अभ्यास का नियम साफ़-साफ़ बताने के बाद सुन वू ने दंड देने वाला सामान भी सामने रखे जाने की व्यवस्था की। इसके बाद सुन वू ने सैन्य अभ्यास का आदेश जारी किया, लेकिन राजमहल की स्त्रियां सुन वू के प्रबंध को महज खेल समझकर ठहाके मारने लगी।

इसे देखकर सुन वू ने खुद को दोषी बताते हुए कहा कि सैन्य प्रशिक्षण के लिए उसका आदेश स्पष्ट नहीं रहा होगा, उसने फिर एक बार स्पष्ट शब्दों में आदेश दोहराया। अभ्यास दोबारा शुरू हुआ। स्त्रियां फिर लोट मोट कर ठहाके मारने लगी। तीन बार अभ्यास शुरू किया गया, तीनों ही बार स्त्रियों में ठहाके के साथ अव्यवस्था उत्पन्न हुई।

सुन वू ने इस बार उन्हें माफ नहीं किया, उसने दोनों स्त्री सैन्य टुकड़ियों के नेताओं को नियम का उल्लंघन करने के आरोप में मौत की सज़ा देने का आदेश दिया।

राजा वु वांग ने जब देखा कि सुन वू ने उसकी प्रिय रानियों को जान से मारने का आदेश दे दिया है, तो वह बहुत चिंतित हो गया। उसने अपने आदमी सैन्य मैदान में भेजकर सुन वू से उन दोनों रानियों को माफ़ करने को कहा, लेकिन सुन वू अपने निश्चय पर डटा रहा और उसके आदेशानुसार दोनों रानियों का वध कर दिया गया। फिर स्त्रियों में से दो नए नेता चुनी गई और सैन्य अभ्यास फिर से शुरू किया गया। इस बार सभी स्त्रियां आदेश का अनुसरण करते हुए अभ्यास करने लगी। अन्त में स्त्रियों का सैन्य प्रशिक्षण काफ़ी सफल हुआ।

राजा वु वांग ने जब देखा कि उसके प्यार दुलार से बुरी आदतों वाली राज महल की स्त्रियां भी सुन वू के प्रशिक्षण से अब अनुशासित सैनिकों की तरह बन गई थी, तो उसे समझ में आया कि सुन वू सचमुच एक सुयोग्य सेनापति है। उसने सुन वू को वु राज्य की सभी सेना सौंप दी और सुन वू के कमान में वु राज्य की सेना ने कई भारी विजय प्राप्त की। परिणामस्वरूप वु राजवंश उस जमाने का शक्तिशाली राज्य बन गया ।

पानी की बूंद पत्थर पर बना सकती है छेद 水滴石穿

"पानी की बूंद पत्थर पर छेद बना सकती है।"कहानी को चीनी भाषा में"शुई ती शी छ्वान"(shuǐ dī shí chuān) कहा जाता है। इसमें"शुई"का अर्थ है पानी,"ती"का अर्थ आम तौर पर पानी की बूंद कहा जाता है, यहां क्रिया शब्द के रूप में बूंद रिसने का प्रयोग किया जाता है। तीसरा शब्द"शी"का अर्थ है पत्थर और"छ्वान"का अर्थ काट देना। कुल मिलाकर कहा जाए, तो"शुई ती शी छ्वान"का अर्थ निकलता है बूंद-बूंद रिस कर पानी भी पत्थर को काट देता है।

चीन के सोंग राजवंश (वर्ष 960 से वर्ष 1279 तक) के समय, चांग क्वाईयान नाम का एक अफसर था। एक समय वह छोंग यांग नामक जिला के जिलाधीश रहा।

उस जमाने में समाज में एक बुरी प्रथा चल रही थी कि सेना में सिपाही सैन्य अफसरों तथा सरकारी विभागों में नौकरों को तंग कर सकते थे। चांग क्वाईयान को यह प्रथा बहुत खराब लगी और वह उसे दूर करने के लिए मौके का इंतजार करता रहा।

एक दिन, जब चांग क्वाईयान जिला पालिका की चारों ओर गश्त लगा रहा था, तो देखा कि निचले स्तर का एक नौकर घबराते हुए जिले के गोदाम से बाहर निकला। चांग क्वाईयान ने उसे रोका और उसके सिर पर पहनी टोपी में से एक सिक्का बरामद किया। पूछताछ में पता चला कि यह सिक्का उस नौकर द्वारा सरकारी गोदाम से चोरी कर लाया गया है।

चांग क्वाईयान उस नौकर को जिला दफ़तर में ले आया और उसने नौकर को जुर्म कबूलवाने के लिए पिटाई करने का आदेश दिया। नौकर अपनी गलती नहीं मान रहा था और बड़े क्रोधित लहजों में बोला:"महज एक ही तो सिक्का है। इसकी चोरी करना क्या अपराध हो सकता कि आप इसी तरह मेरी पिटाई करवा रहे है?क्या आप में मुझे जान से मारने का साहस है?"

नौकर के इस व्यवहार पर चांग क्वाईयान को बड़ा क्रोध आया। उसने सीधे मौत की सज़ा सुनाते हुए ये शब्द लिखे:एक दिन एक सिक्के की चोरी, हजार दिन हजार सिक्कों की। समय लम्बा रहते रस्सी से लकड़ी को दो टुकड़ों में काटा जा सकता है और पानी की बूंद से पत्थर पर छेद बनाया जा सकता है।

ये शब्द पढ़ने के बाद चांग क्वाईयान ने खुद तलवार उठाकर उस नौकर का वध कर दिया।

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