022 आसमान नीचे गिरने का डर

cri 2017-04-04 18:13:03
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आसमान नीचे गिरने का डर 杞人忧天

"आसमान नीचे गिरने का डर"नाम की नीति कथा को चीनी भाषा में"छी रन योउ थ्यान"(qǐrén yōu tiān) कहा जाता है, इसमें तीसरी टोन में शब्द "छी"प्रचीन काल में एक छोटे से राज्य का नाम है,"रन"का अर्थ है लोग या व्यक्ति, तो"छी रन"का अर्थ निकलता है छी राज्य के लोग। तीसरे शब्द"योउ"का अर्थ चिंता होना और"थ्यान"का मतलब"आसमान"होता है। कुल मिलाकर कहा जाए, तो"छी रन योउ थ्यान"का अर्थ होता है छी राज्य के व्यक्ति को आसमान के प्रति चिंता है।

प्राचीन काल में चीन में छी नाम का एक छोटा सा राज्य था। इस राज्य में एक आदमी हर चीज़ को शंका की नज़र से देखता था। उसे डर था कि कहीं आसमान ऊपर से नीचे गिर तो नहीं पड़ेगा और वह इसके नीचे दबकर मारा तो नहीं जाएगा, तो कभी उसे लगता था कहीं जमीन अन्दर धंस तो नहीं जाएगी और वह उसमें दफ़न तो नहीं हो जाएगा। रोज़ भय और शंका से परेशान होने के कारण वह खाना नहीं पा रहा था और रात में नींद भी नहीं आ रही थी।

उसकी यह मानसिक दशा पड़ोसियों को भी पता चल गयी। उसकी इतनी चिंता देखकर एक पड़ोसी उसकी हेल्थ के बारे में बहुत चिंतित हुआ और उसने उसे समझाया:"आसमान वायु का मंडल है। वायु सर्व व्यापक है। हमारा सांस लेना वायु से जुड़ा हुआ है और हम हर क्षण उसमें रहते हैं, तो बेवजह चिंता क्यों करनी कि आसमान गिर पड़ेगा"

उस व्यक्ति ने पड़ोसी के तर्क पर संदेह व्यक्त करते हुए पूछा:"यदि आप का कहना सही है कि आसमान वायु का मंडल है, तो सूरज, चंद्रमा और तारे गिरकर नीचे आ जाएंगे ना?"

पड़ोसी व्यक्ति ने कहा:"वे नहीं गिरेंगे। सूरज, चंद्रमा और तारे वायुमंडल में रोशनी देने वाली चीजें हैं, वे नहीं गिर सकती। हां, अगर वे कभी नीचे गिर भी गए तो हमें कुछ नहीं होगा, तुम बिल्कुल चिंता मत करो।"

परेशान व्यक्ति ने फिर पूछा:"अगर जमीन अन्दर धंसी, तो बड़ी आफ़त आ जाएगी ना?"

पड़ोसी बोला:"धरती मिट्टी से बना हुआ बड़ा खंड है। चारों दिशाओं में भू-खंड मिलते हैं। आप रोज़ ज़मीन पर चलते फिरते हैं और तरह-तरह का काम करते हैं। वह कभी टूट कर नहीं ढहती। तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है ?"

पड़ोसी की बातें सुनकर छी राज्य के व्यक्ति ने बड़े राहत की सांस ली और उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी। दिल में दबा शंका का बोझ हट गया। उसकी निश्चिंतत देख कर पड़ोसी को भी बड़ी खुशी हुई।

चीन में"आसमान नीचे गिरने का डर"नाम की नाति कथा से बने कहावत का तब इस्तेमाल किया जाता है, जब कोई अकारण किसी बात पर चिंतित होता है। चीनी भाषा में इस कहावत को"छी रन योउ थ्यान"(qǐrén yōu tiān) कहते हैं।

सोने के हज़ार सिक्कों से घोड़े का सिर खरीदा 千斤买马首

"हज़ार सोने के सिक्कों से घोड़े का सिर खरीदा"नीति कथा को चीनी भाषा में"छ्यान चिन माई मा शोउ"(qiān jīn mǎi mǎshǒu) कहा जाता है। इसमें"छ्यान"संख्या शब्द हज़ार है,"चिन"का अर्थ है सोना या स्वर्ण, जबकि"माई"का अर्थ है खरीदना।"मा"का अर्थ घोड़ा है और"शोउ"का अर्थ सिर।

प्राचीन समय में एक राजा था। उसने सोने के हज़ार सिक्कों से ऐसा घोड़ा खरीदने की घोषणा की, जो रोज़ पांच सौ किलोमीटर दौड़ सकता हो। राजा की घोषणा को तीन साल बीत गए, लेकिन ऐसा कोई भी बढ़िया घोड़ा नहीं मिला। इस बात से राजा बहुत परेशान हुआ।

एक दिन राजा के एक सेवक ने उससे अनुरोध किया:"महाराज , आप मुझे घोड़े की तलाश करने भेजें, मैं इस समस्या को दूर कर सकूंगा।"

राजा बहुत खुश हुआ और उसने सेवक को एक हजार सोने के सिक्के खर्च के लिए दिये।

राजा के सेवक ने देश के कोने-कोने पर छापा मारा और तीन महीनों का समय गुज़ार कर पता लगाया कि कहां रोजाना पांच सौ किलोमीटर दौड़ने वाला घोड़ा मिलता है। उसे ऐसे घोड़े का पता लग गया, लेकिन दुर्भाग्य से वह घोड़ा अधिक उम्र की वजह से मर गया। अब क्या हो?सेवक ने काफ़ी दिमाग़ खपाया और पांच सौ सोने के सिक्कों से उस घोड़े का सिर खरीद लिया।

घोड़े का सिर राजा को भेंट किया गया। मरे हुए घोड़े का सिर देख कर राजा को बहुत गुस्सा आया:"मैं ऐसा बढ़िया घोड़ा चाहता हूं, जो रोज़ पांच सौ किलोमीटर का सफर तय कर सके, लेकिन तुम मेरे लिए मरे हुए घोड़े का सिर लाए हो, वह भी पांच सौ सोने के सिक्के देकर।"

सेवक ने बड़े आराम से कहा :"महाराज, आप क्रोधित न होइए, पांच सौ किलोमीटर दौड़ने वाला घोड़ा ढूंढना मुश्किल है। कोई भी व्यक्ति ऐसे घोड़े को नहीं बेचना चाहता है। राजा द्वारा पांच सौ सोने के सिक्कों से ऐसे घोड़े का सिर खरीदे जाने की खबर चारों ओर फैल गयी, लोगों को पता लग गया कि उनके राजा पांच सौ किलोमीटर दौड़ सकने वाला घोड़ा चाहते हैं, एक न एक दिन कोई व्यक्ति राजा को जरूर घोड़ा भेंट करेगा।"

सेवक की बात सच निकली। एक साल के भीतर ही विभिन्न स्थानों से राजा को तीन दुर्लभ घोड़े भेंट किए गए।

यह कथा उस वक्त लिखी गई थी, जब चीन के युद्धरत काल में यान राज्य युद्ध में हार गया था। यान राज्य का राजा देश का पुनरूत्थान करना चाहता था। उसने क्वो हुए नाम के अपने एक सेवक से देशोद्धार का उपाय पूछा, तो क्वो हुए ने राजा को उपरोक्त कथा सुनाई और यह सलाह दी:"महाराज आप मुझ जैसे साधारण व्यक्ति को पदोन्नति दे दें, इससे देश विदेश के प्रतिभाशाली लोगों को मालूम होगा कि महाराज सही मायने में प्रतिभा का सम्मान करते हैं और उनकी मदद चाहते हैं, तो वे दूर-दूर से आपके पास आ पहुंचेंगे और आपको मुझ से ज्यादा प्रतिभाशाली सुयोग्य व्यक्ति मिल जाएंगे।"

यह कहानी सुनने के बाद आपको समझने में देर नहीं लगेगी कि इस तरीके से यान राज्य को तमाम सुयोग्य लोग मिल गए और वह शक्तिशाली हो गया था।

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