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020 बिल्ली चूहे से डरती है

cri 2017-03-21 19:46:59
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020 बिल्ली चूहे से डरती है

बिल्ली चूहे से डरती है 猫怕老鼠

"बिल्ली चूहे से डरती है"कहानी को चीनी भाषा में"माओ फा लाओ शू"(māo pà lǎo shǔ) कहा जाता है, इसमें"माओ"बिल्ली है, और"फा"का अर्थ है डरना, जबकि"लाओ शू"का है चूहा।

प्राचीन चीन के वेई राजवंश में सू नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसे महज बिल्ली पालने का शौक था। और कोई दूसरी चीज़ पसंद नहीं थी। उसके घर में सौ से ज्यादा छोटी बड़ी और विभिन्न रंगों की बिल्लियां थी। शुरू-शुरू में बिल्लियों ने घर के चूहों का खात्मा किया, फिर पड़ोस के घरों के चूहों को भी मार डाला।

आस पास के सभी चूहे खत्म हो जाने के बाद बिल्लियां भूख से बड़ी परेशान होने लगी, ऐसे में सु नाम का एक व्यक्ति बाज़ार से मांस खरीद कर लाने लगा। इस तरह लंबा समय बीत गया। बिल्लियों के बच्चे भी पैदा होते रहे। नई पीढ़ी की बिल्लियों को खाने के लिए चूहे नहीं मिले, वे जन्म के बाद से ही मालिक द्वारा खरीदा मांस खाती थी और धीरे-धीरे इसकी आदी भी हो गई थी।

जब कभी भूख लगती, तो म्याऊं-म्याऊं की आवाज पर मालिक उन्हें मांस खिलाता। उन्हें जरा सी मेहनत भी नहीं करनी पड़ी। धीरे-धीरे बिल्लियां बहुत आलसी हो गयी, रोज भर पेट खाने के बाद नींद से सोती थी और धूप सेंकती थी। उन्हें इसका पता भी नहीं चला कि दुनिया में चूहा नाम की चीज़ भी मौजूद है और चूहा पकड़ना उनका जन्मसिद्ध फ़र्ज है।

नगर के दक्षिण भाग में बसे एक घर में चूहों का हंगामा होता था। घर के मालिक को बताया गया था कि सु नाम के घर में बहुत सी बिल्लियां पाली जाती थी, तो वह सु के घर जाकर उससे एक बिल्ली उधार कर लाया। उम्मीद थी कि वह चूहा पकड़ कर खत्म कर देगी। लेकिन सु की बिल्ली ने जब देखा कि चूहों के सिर पर दो नुकली कानें खड़ी थी, दोनों आंखें छोटी छोटी थी, मुंह पर दोनों तरह दाढ़ी उगी हुई थी तथा वे ची-ची की आवाज़ देते हुए मकान में इधर-उधर दौड़ते कूदते नज़र आ रहे थे, तो उसे कुछ नया-नया अनुभव होने के साथ-साथ थोड़ी डर भी हुई थी। वह मेज़ पर ऊंकड़ू बैठी चूहों की हरकत को ध्यान से देखती रही, किन्तु मेज़ से नीचे कूद कर चूहा पकड़ने की हिम्मत नहीं हुई।

इस घर के मालिक को बिल्ली की इस प्रकार की नाकम्मी पर बड़ा गुस्सा आया और जोर के साथ बिल्ली को मेज़ पर से जमीन पर फेंका। बड़ी डर के मारे बिल्ली"म्यांओ-म्यांओ"की आवाज़ के साथ पीछे हटने लगी। बिल्ली की यह दशा देखकर चूहा बड़ा खुश हुए, उसे नाकम्म पहचान कर सभी चूहे आगे लपक कर बिल्ली की मरम्मत करने लगे। कोई बिल्ली के पांव को नोंच कर रहा था, कोई उस के पुच्छ को पकड़ रहा था, तो कोई उसके पीठे पर कूद कर उसे परेशान कर रहा था। दर्द और भय के कारण बिल्ली जोर से उछल पड़ी और दुम दबा कर भाग गयी।

क्या आप ने कभी सुना है कि बिल्ली चूहे से डरती है?नहीं सुना, तो सही है। दरअसल यह नीति कथा हमें बताती है कि ज्यादा आरामदेह जीवन बिताने से लोगों का मनोबल कमजोर हो सकता है और उसमें जीवन बिताने की शक्ति भी क्षीण हो सकती है। सच यह भी है कि आधुनिक युग में बहुत से पालतू पशु जैसे बिल्ली और कुत्ता मालिक के घरों में रहने के कारण उनकी अपनी वंशगत प्राकृति शक्ति लुप्त होती है।

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