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011 समुद्री कछुआ और चींटी

cri 2017-01-16 19:48:31
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011 समुद्री कछुआ और चींटी

समुद्री कछुआ और चींटी 海龟和蚂蚁

"समुद्री कछुआ और चींटी"को चीनी भाषा में"हाईक्वे ह मायी"(hǎi guī hé mǎyǐ) कहा जाता है। इसमें"हाई"का मतलब समुद्र और सागर है, जबकि क्वे का अर्थ कछुआ, तो हाईक्वो का अर्थ होता है समुद्री कछुआ। मायी का अर्थ है चींटी।

बहुत पहले की बात है। पूर्वी चीन के समुद्र में एक विशाल समुद्री कछुआ रहता था। वह इतना विशाल था कि अपने सिर पर फङ लाई पर्वत को लेकर अनंत सागर में तैर सकता था।

समुद्र से सैंकड़ो किलोमीटर दूर एक जगह पर रहने वाली एक लाल रंग की चींटी को जब यह बात पता चली कि समुद्री कछुआ अपनी पीठे पर विशाल पर्वत को ले जा सकता है, तो उसने चींटियों का एक झुंड बुलाकर इस दावे की जांच करने का निश्चय किया।

चींटियों का यह दल पहाड़ों और मैदानों को पार करते हुए लम्बा रास्ता तय कर समुद्र तट पर पहुंचा। वहां महीना गुजारने के बाद भी वह समुद्री कछुआ समुद्र से बाहर नहीं निकला। चींटियां बड़ी परेशान होकर घर लौटने की बात सोचने लगी, तभी, समुद्र में तेज हवा चलने लगी तथा उफनती लहरें ज़ोर मारने लगी। जिससे विशाल जमीन भी कांप उठी।

चींटियों ने ऊंची आवाज दी:"कछुआ बाहर आया है। कछुआ बाहर आया है।"

समुद्र में कई दिनों तक भीषण लहरें मारती रही। फिर हवा शांत हो गई और लहरें थम गई। जमीन की कंपकंपी भी बन्द हो गयी। इस क्षण में समुद्री क्षितिज पर एक विशाल पहाड़ तैरते हुए दिखाई पड़ा। यह गगनचुंबी पहाड़ एक दिव्य कछुए के सिर पर लदा था, वह धीरे-धीरे नजदीक आ रहा था। इस अनोखे दृश्य को देखकर चींटियों को बड़ा आश्चर्य हुआ, सभी के मुंह से वाहवाही निकल पड़ी। तभी नजदीक में खड़ी लाल रंग की चींटी ने बड़ी उपेक्षा के अंदाज में कहा:

"जिस तरह समुद्री कछुआ अपने सिर पर पहाड़ लादे तैर सकता है, उसी तरह हम चींटियां भी अपने सिर पर चावल और दाल उठाए चल सकती हैं। उसका क्या बड़ी बात है?वह पहाड़ लादे समुद्र में तैरता है, हम दाल-चावल उठाए जमीनी टीले पर चढ़ सकती हैं, वह समुद्र के अन्दर घुस सकता है, तो हम अपनी गुफा में प्रवेश कर सकती हैं। मेरी नज़र में दोनों कार्यों में कोई अन्तर नहीं है, बस दिखने में अलग जरूर है। उसकी ही तरह की हम में भी बड़ी क्षमता है, तो हम भला क्यों समुद्री कछुएं का कला प्रदर्शन देखने यहां रूकें?तो चलो, हम वापस चलते हैं।"

"समुद्री कछुआ और चींटी"शीर्षक कहानी यानी चीनी भाषा में"हाईक्वे ह मायी"कहानी हमें बताती है कि दूसरे की खूबियों का सम्मान करना एक अच्छा नैतिक व्यवहार है। जबकि दूसरों की खूबियों को कम आंकते हुए अपना बड़प्पन बघारने से किसी को लाभ नहीं मिल सकता। विनम्रता से दूसरों से सीखने से खुद को भी प्रगति मिलती है।

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