मध्य शरत् उत्सव में चीन के विभिन्न स्थलों में प्रथाएं

2020-10-03 10:00:00
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चीन की भूमि विशाल है और जनसंख्या बड़ी है, इसलिए मध्य शरत् उत्सव मनाने के लिए स्थानीय विशेषता वाली भिन्न भिन्न प्रथाएं पायी जाती हैं।

क्वांग तुंग प्रांत के छ्याओ शान में मध्य शरत् उत्सव पर चांद की पूजा करने की प्रथा प्रचलित है। मुख्यतः महिलाएं व बच्चे पूजा का काम करते हैं। जब रात को पूर्णचंद्र आकाश में उभरा, तो महिलाएं आंगन या बालकनी में मेज़ रखकर आसमान की ओर प्रार्थना करती हैं। मोमबत्ती और धूपबत्ती जल रहती है और चारों ओर सुगंधित धुआं व्याप्त हो रहा है। मेज़ पर फल व केक आहुति के लिए चढ़ाए जाते हैं। वहां मध्य शरत् में अरबी खाने की आदत भी है। क्योंकि अष्टम माह में अरबी की फ़सल काटने का वक्त है, इसलिए किसानों में अरबी से पूर्वजों की पूजा करने की परंपरा प्रचलित है।

दक्षिण चीन में मध्य शरत् उत्सव की अनेक प्रथाएं हैं। नान चिंग के लोग मून केक खाने के अलावा स्थानीय विशेष खाद्य क्वेई ह्वा या (फ़्रेग्रेंस बत्तख़) भी खाते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर सौम्य चांदनी का आनंद उठाते हैं जिसे“छिंग थ्वुन य्वुन”(मिलन की खुशी मनाना) कहा जाता है। एक साथ घेरा बनाकर बैठे हुए शराब पीते हैं जिसे“युन य्येई”( गोलाकार चंद्रमा) कहलाता है, जबकि बाहर सड़कों पर चांदनी में टहलते चहलते हैं जिसे“ज़ो य्येई”( चांद के साथ चलना) कहलाता है। चांग सू प्रांत के वू शी शहर के निवासी इस रात में धूपबत्ती जलाते हैं। धूपदान की चारों ओर रेशमी कपड़े चिपके हुए है, रेशमी कपड़ों पर चंद्र महल के चित्र अंकित होते हैं। कुछ धूपदान धारीदार धूपों से बनाया जाता है, जिसपर कागज़ से बनायी साहित्य देव तारा की तस्वीर और रंगीन झंडियां लगायी जाती हैं।

उत्तरी चीन के शान तुंग प्रांत की छिंग युन काऊंटी के किसान अष्टम माह की 15 तारीख को थू गू देवता (मिट्टी व धान का देवता) की पूजा करते हैं, जिसे“छिंग म्याओ श्ये”कहा जाता है। जु छेंग, लिन यी और ची मो आदि स्थानों में चंद्र-यज्ञ के अलावा लोग पूर्वजों की समाधि जाकर श्रद्धांजलि अर्पित भी करते हैं। ता थोंग काऊंटी में लोग मून केक को थ्वुन व्युन पिंग( मेलमिलाप केक) कहते हैं और वहां मध्य शरत् की रात भर जागे रहने की प्रथा प्रचलित है।

कुछ स्थानों में अपनी अपनी पहचान वाली विशेष प्रथाएं भी पैदा हुई हैं। चांद के सौंदर्य का आनंद उठाने, चांद की पूजा करने और मून केक खाने के अलावा हांगकांग में लोग अग्नि ड्रैगन नाच करते हैं, क्वांग तुंग प्रांत में श्वू जुंग छ्यो यानी बांस के दीपक बनाकर खंबों या पेड़ों पर टांगे जाते हैं, सू चो में लोग श हू तालाब में पानी में माला के रूप में पड़ी चांद की प्रतिबिंबें देखते हैं, ताई जाति के लोग चांद की पूजा करते हैं, म्याओ जाति के लोग थ्याओ य्येई यानी चांद की रोशनी में नृत्य-गान करते हैं, तुंग जाति के लोग थो य्येई ल्यांग छयेई यानी पूर्णचंद्र की रोशनी में लड़कियां चोरी-छिपे अपने प्रेमियों के खेतों में से सब्ज़ियां लाती हैं और काओ शान जाति के लोग थ्वो छ्यो वू (रंगीन बॉल) खेलने का नृत्य नाचते हैं।

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