मध्य शरत् उत्सव

2020-10-01 10:00:00
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

मध्य शरत् उत्सव

चीनी चंद्र पंचाग के अनुसार साल के हर आठवें माह की 15 तारीख को परम्परागत मध्य शरत् उत्सव मनाया जाता है। चूंकि वह त्योहार शरत् के मध्य में पड़ता है, इसलिए वह मध्य शरत् उत्सव कहलाता है। थांग राजवंश में ही मध्य शरत् उत्सव औपचारिक त्योहार बनाया गया था। वह चीन के वसंत त्योहार के बाद दूसरा प्रमुख परम्परागत त्योहार है और इस के हज़ारों सालों का इतिहास है।

मध्य शरत् उत्सव का नाम चीनी चंद्र पंचांग से ले लिया गया था। चंद्र पंचांग के मुताबित साल में चार ऋतुएं होती हैं, हरेक ऋतु मेंग, चुंग व ची तीन कालों में बंटती है। इसलिए मध्य शरत् को“चुंग छ्यो”(शरत् का मध्यम काल) भी कहा जाता है। मध्य शरत् उत्सव की रात को पूर्णिमा होती है और सारी धरती चांदनी में नहाती रहती है। लोग पूर्णचंद्र को मेलमिलाप का प्रतीक मानते हैं और आठवें मांह की 15 तारीख को परिवारजनों के मिलन का दिन समझते हैं। यही कारण है कि मध्य शरत उत्सव को“मिलन का उत्सव”भी माना जाता है।

मध्य शरत् उत्सव

प्राचीन काल से अब तक चंद्र साल के आठवें माह की 15 तारीख की रात चंद्रमा की पूजा करने, चांदनी का आनंद लेने और मून केक खाने की प्रथा चलती आयी है। थांग राजवंश के काल में मध्य शरत् उत्सव में पूर्ण चांद के सौंदर्य का आनंद उठाने और चांद के संदर्भ में क्रीड़ा करने की परंपरा चलती थी। उत्तरी सुंग राजवंश में आठवें माह की 15 तारीख की रात को पूरे शहर में चाहे गरीब हो या धनी, बड़े हो या छोटे, सब लोगों में चंद्रमा की पूजा करने के जरिए अपनी मनसा प्रकट करने और चंद्र देवता से वरदान की प्रार्थना करने की प्रथा चली थी। दक्षिण सुंग राजवंश में लोग एक दूसरे को मून केक को उपहार के रूप में देते हैं, जिसका अर्थ है मेलमिलाप कायम होना। मिंग व छिंग राजवंशों के बाद मध्य शरत् उत्सव की प्रथा लोगों में खूब प्रचलित रही।

12MoreTotal 2 pagesNext

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories