महामारी से अफगानिस्तान के पारंपरिक हस्तनिर्मित कंबल निर्यात में भारी कटौती

2020-09-30 10:00:00
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
1/3

अफगानिस्तान विश्व में सबसे श्रेष्ठ हस्तनिर्मित कंबल बनाने के क्षेत्रों में से एक है। यहां का कंबल शुद्ध ऊन के सूत से बनाया जाता है और पारंपरिक कला से रंग डालकर हाथों से बुना जाता है। हाथों से बनाने से अफगानिस्तान के कंबल का एक अद्वितीय आकर्षण है। यानी कि कोई भी दो कंबल बिलकुल एक जैसा नहीं होता है। इसे दुनिया में एक अनूठा संग्रह मूल्य बनाया जाता है।

लेकिन अफगानिस्तान में कोविड-19 के फैलने से कंबलों के निर्यात पर असर पड़ता है। हाल में सीएमजी के पत्रकार अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक कंबल कारखाना गये। अफगानिस्तान अनेक सालों में युद्ध से प्रभावित हुआ है। हस्तनिर्मित कंबल का निर्यात उद्योग देश के अहम स्तंभ उद्योगों में से एक है। लेकिन इस साल कोविड-19 के प्रकोप से अफगानिस्तान के कंबल व्यापार पर भी असर पड़ा है।

गासेमी कंबल विनिर्माण और निर्यात कंपनी के प्रमुख गासेमी ने कहा कि गत वर्ष के पिछले पांच महीनों में हमने चीन, यूरोप, अमेरिकी आदि देशों को 80 हजार वर्गमीटर वाले कंबलों का निर्यात किया। लेकिन हालिया कोविड-19 के फैलने की स्थिति में हमें सिर्फ 10 हजार वर्गमीटर वाले कंबलों का निर्यात करना पड़ा है। महामारी ने हमारे कंबलों के निर्यात पर भारी प्रभाव डाला है।

अफगानिस्तान में हस्तनिर्मित कंबल का मुख्यतः परिवार द्वारा उत्पादन किया जाता है। कंबलों के विदेशों में निर्यात न किये जाने से मजदूरों की स्थिति और कठिन है। 14 वर्षीय न्वोजरा के परिवार में कुल 9 आदमी हैं। उसके पिता बाहर मजदूर करते हैं। जबकि वह अपने बड़े भाई और बड़ी बहन के साथ घर में कंबल बुनती है और रोज करीब 8 घंटों तक बुना जाता है। उसने कहा कि पहले एक वर्गमीटर के कंबल से वे 2200 अफगानी मुद्रा कमा सकते थे, लेकिन अब महामारी से एक वर्गमीटर के कंबल से केवल 1500 अफगानी मुद्रा कमा सकते हैं। पहले एक दिन में उसे 100 अफगानी मुद्रा कमाती थी, जबकि अब केवल 40 अफगानी मुद्रा। महामारी के बाद आमदनी में गिरावट आयी है और दैनिक जीवन और कठिन हो गया है।

हाफिजुरा कंबल बुनने वाला एक मजदूर है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के विश्व में प्रकोप होने के बाद लोगों के जीवन में बड़ी कठिनाइयां आयी हैं। सीमा बंद हुई है, विमान उड़ान भी ठप है। वे कंबलों को विदेशी उपभोक्ताओं को नहीं भेज सकते हैं।

कहा जाता है कि विश्व में दो बिलकुल समान अफगानिस्तानी कंबल नहीं है। उसके बनाने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। एक कंबल बुनने के लिए अनेक कुशल बुनकरों द्वारा कई महीनों यहां तक कई सालों की मेहनत से पूरा किया जा सकता है। पारंपरिक अफगानिस्तानी कंबल बिलकुल हाथों से बनाया जाता है, जिसका कच्चा माल शुद्ध ऊन धागा और सब्जी रंजक हैं। परम्परागत अफगानिस्तानी कंबल का आम तौर पर चमकीले रंग और अद्वितीय पैटर्न है। यह दुनिया भर में खरीदारों द्वारा व्यापक रूप से पसंद किया जाता है।

शेयर