बायकॉट मेड बाय चाइना के बारे में भारतीय विद्वानों का विचार सुनें

2020-09-23 10:00:00
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भारतीय स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 1 सितंबर से भारत में आयातित सभी बच्चों के खिलौनों को भारत के गुणवत्ता नियंत्रण मानक से मेल खाना चाहिए। इस मानक को पूरा न करने वाली वस्तुओं के लिए, भारतीय गुणवत्ता निरीक्षण विभाग को सीमा शुल्क निकासी से सीधे इनकार करने का अधिकार है।

30 अगस्त को भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने लाइव प्रसारण में कहा कि भविष्य में भारत विश्व का अहम खिलौना उत्पादन केंद्र बन सकता है। इस मई में चीन-भारत सीमांत गतिरोध होने के बाद भारत सरकार ने विविधतापूर्ण तरीकों से चीनी उद्यमों और निवेशों को भारतीय बाजार से दूर रहने की कोशिश की। भारतीय समाज में बायकॉट मेड बाय चाइना का आंदोलन चलता रहा। वास्तव में अगर मेड इन चाइना नहीं होगा, तो भारत समाज का विकास संभव ठप हो जाएगा।

भारतीय हेदराबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुस्ताफा ने चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स के पत्रकार के साथ साक्षात्कार में अपनी डेस्क की ओर इशारा कर और समझाया, “मेरा कंप्यटर मेड इन चाइना है। माउस और कनेक्शन बोर्ड भी हैं…… अगर मेड इन चाइना नहीं होता, तो कम से कम मेरा काम रुक जाता।”

मुस्ताफा का मानना है कि हालिया वैश्वीकरण के युग में अनेक सामान्य उपभोक्ताओं के लिए सस्ते दाम में अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तु मिलना शॉपिंग के लिए प्राथमिकता बात है। जबकि चीनी वस्तु में सस्ता दाम और अच्छी गुणवत्ता की श्रेष्ठता है। उन्होंने कहा कि चीन के पास और अधिक कुशल औद्योगिक श्रमिक हैं और एक उत्पादन की औसत उत्पादन गुणवत्ता भारत के 1.6 गुना होती है। चीन में पुरुष और महिलाओं की समानता की विचारधारा लोगों के दिल में स्थापित किया जा चुका है। चीनी महिलाओं की श्रम में भागीदारी का अनुपात 70 प्रतिशत से और ऊंचा होता है, जबकि यह अनुपात भारत में केवल 34 प्रतिशत है। इसके अलावा, चीन में समुन्नत विज्ञान व तकनीक है, विशाल औद्योगिक समूह और परिपक्व बाजार वातावरण है।

लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि चीन में विनिर्माण उद्योग भारत के आगे रहा है, फिर भी भारत की अपनी श्रेष्ठताएं भी हैं। उदाहरण के लिए, भारत में औसत आबादी की उम्र चीन से करीब 12 साल युवा है, यानी कि चीनी आबादी की औसत उम्र 38.4 है, जबकि भारतीय आबादी की औसत उम्र 26.8 है। भारत में अंग्रेजी का व्यापक प्रयोग है, साथ ही श्रमिकों का सस्ता खपत भी है। मुस्ताफा की नजर में मेड इन इंडिया मेड बाय चाइना से लड़ सकता है। लेकिन समय की आवश्यक्ता है।

अवास्दी एक भारतीय फ्लैट ग्लास आयात ट्रेडिंग कंपनी के बॉस हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित होकर भारत में आर्थिक मंदी आयी है और बायकॉट चाइनीज वस्तु का आंदोलन चलता है। उन्हें विवश होकर चीन से आयातित वस्तुओं को बड़े हद तक कम करना पड़ा। उन्होंने कहा कि चीन की मुख्यभूमि से आयातित वस्तुओं की गुणवत्ता दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों और थाईवान क्षेत्र की बराबर वस्तुओं की गुणवत्ता से कहीं अच्छी है और दाम भी अपेक्षाकृत सस्ता है। उन्होंने पत्रकार से कहा कि यदि भारत भविष्य में टैरिफ या गुणवत्ता मानक को उन्नत करने के तरीकों से चीनी वस्तुओं के आयात में बाधा डालता है, तो उन्हें अन्य देशों से आयात करने पर सोच-विचार करना पड़ेगा।

लेकिन, भारत को निर्यातित मेड बाय चाइना की वस्तुओं में कच्ची दवा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोटर गाड़ियों के पहिया आदि विशेषताएं भी हैं। चीन-भारत सीमांत गतिरोध के बाद भारत सरकार ने अचानक गाड़ियों के पहियों को नियंत्रित आयातित मालों की किस्मों में शामिल किया। लेकिन केवल 3 महीनों के बाद अनेक भारतीय मोटर गाड़ी निर्माण कंपनियों और विदेशी मोटर गाड़ी निर्माण कंपनियों के सामने अड़चने पैदा हो गईं। भारतीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हुनदेई, होंडा, स्कोदा, बाजाज आदि मोटर गाड़ियों के उत्पादन में समस्याएं पैदा हुई हैं। इसलिए भारतीय विदेशी व्यापार ब्यूरो ने उपरोक्त कंपनियों को चीन और अन्य देशों से पहियों को आयातित करने की अनुमति दी। रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास चीन से आयातित कुछ पहियों की उत्पादन क्षमता नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्राष्ट्रीय माल व्यापार के आंकड़े बताते हैं कि 2019 में भारत ने कुल चीन से करीब 68.4 अरब यूएस डॉलर मूल्य की वस्तुओं का आयात किया, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनरी उपकरण, जैविक रसायन, प्लास्टिक उत्पाद और उर्वरक पहले पांच स्थान पर रहे हैं। अगर भारत सचमुच चीन के साथ आर्थिक संबंध को तोड़ता है और चीन से उपरोक्त उत्पादों के निर्यात पर पाबंदी लगाता है, तो शायद अल्प समय में आत्म-आपूर्ती कर पाना बेहद मुश्किल रह सकता है। साथ ही भारत के लिए चीनी वस्तुओं जैसे सस्ते दाम और अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुओं की खोज करने में भी मुश्किल है।

भारतीय पत्रकार ठाकुर ने ग्लोबल टाइम्स के पत्रकार से कहा कि उनके जीवन में मोबाइल फोन से हेयर ड्रायर तक, करीब सभी आवश्यक वस्तुओं में कुछ न कुछ मेड बाय चाइना की वस्तुएं होती हैं। हालांकि उनमें से कुछ शायद सीधे रूप से चीन से आयातित नहीं हैं, फिर भी उनमें से कई उपकरण जरूर चीन से आये हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, कंप्यूटर, खिलौने और टोपी के अलावा, भारत का सबसे बड़ा डिजिटल भूगतान प्लेटफार्म पेइटीएम, मशहूर ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट बिगबास्केट, खाद्य पदार्थ का वितरण एप्प जोमाटो, गाड़ी बुकिंग एप्प ओला, ई-कॉर्मस वेबसाइट फिलिपकार्त, शिक्षा कंपनी बायचुस आदि में चीनी निवेश है। अगर सचमुच बायकॉट मेड बाय चाइना की वस्तुएं, तो उपरोक्त तथाकथित भारतीय उद्यमों का बायकॉट भी किया जाएगा।

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