प्लास्टिक की खपत को उत्तेजित करता है कोविड-19

2020-09-14 10:00:00
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सिंगापुर की मीडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 के प्रकोप से विश्व में डिस्पोजेबल प्लास्टिक का उपभोग बढ़ गया है। नये अनुसंधान से जाहिर है कि अगर हम कदम नहीं उठाते, तो 2040 तक विश्व में समुद्र में डालने वाले प्लास्टिक कचरों की मात्रा में 1.6 गुना होगा। लेकिन यदि हरेक देश के पूरे सिस्टम में परिवर्तन करें, तो समुद्र में डालने वाले कचरे की मात्रा में बढ़ेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 के प्रकोप में प्लास्टिक उत्पादों की मांग बढ़ती रही है। मास्क और दस्ताने जैसे प्लास्टिक कचरे को एशिया की सुदूर समुद्री तट पर नजर आते हैं। साथ ही टेकअवे फूड और ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ने से कचरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी आयी है। अगर विश्व के विभिन्न देश कदम नहीं उठाते, तो हर साल में समुद्र में डालने वाले प्लास्टिक कचरों की संख्या हालिया 1.1 करोड़ टन से बढ़कर 2.9 करोड़ तक पहुंच सकेगी। 20 सालों के बाद समुद्र में इकट्ठे हुए प्लास्टिक कचरों की संख्या 60 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है।

इस समस्या का हल करने के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने प्लास्टिक उत्पादों के उत्पादन और खपत को कम करने, कागजों और खाद की सामग्रियों से कुछ प्लास्टिक उत्पादकों की जगह लेने, पुनर्नवीनीकरण उत्पादों और पैकेजिंग की दिजाइन करने, कम और मध्यम आय वाले देशों में अपशिष्ट संग्रह दरों का विस्तार करने, रीसाइक्लिंग बढ़ाने और प्लास्टिक कचरे के निर्यात को कम करने के सुझाव पेश किये।

गौरतलब है कि 1950 से विश्व में हर साल प्लास्टिक उत्पादों की मात्रा में तेज़ी से बढ़ोतरी आयी है। हाल में विश्व प्लास्टिक उत्पादों की कुल मात्रा 10 लाख टन थी, जबकि 2017 में यह संख्या 34.8 करोड़ टन तक पुहंची है। अनुमान है कि 2040 तक यह संख्या दोगुनी हो जाएगी ।

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