विश्व अनाज संकट के सामने चीन का विश्वास कहां से आया है

2020-09-02 10:00:00
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

कोविड-19 के विश्व में प्रकोप होने से नयी प्रतिक्रिया नजर आयी है। अंतर्राष्ट्रीय अनाज नीति अनुसंधान संस्था ने हाल में एक विज्ञान पत्रिका में लेख जारी कर कहा कि कोविड-19 के विश्व में फैलने से विश्व आर्थिक विकास में मंदी आने के साथ अनाज की सप्लाई मात्रा, प्राप्ति माध्यम, पूरा इस्तेमाल और स्थिर सप्लाई आदि अनाज सुरक्षा के चार स्तंभ पर भी गहरा असर पड़ा है। इस साल विश्व अनाज सुरक्षा समस्या तीव्र होगी। इस पृष्ठभूमि में हाल में यूएन की अनुसंधान रिपोर्ट ने पूर्व चेतावनी दी कि 25 देश गंभीर अकाल का खतरा का सामना करेंगे। विश्व के सामने पिछले 50 सालों में सबसे गंभीर अनाज संकट की चुनौती आती है।

रिपोर्ट के मुताबिक वियतनाम, कजाकिस्तान, रूस आदि अनेक अनाज निर्यातित देशों ने हाल में क्रमशः अनाज निर्यात पर पाबंदी लगाया। विश्व का सबसे बड़ा धान का निर्यात देश भारत ने भी महामारी की वजह से देश को बंद करने का निर्णय लिया, जिससे धान के निर्यात में भारी कटौती आयी है। विश्लेषकों का मानना है कि इस साल रेगिस्तान टिड्डी आदि के आक्रमण से विश्व के अनेक प्रमुख अनाज उत्पादक देशों में उत्पादन की गिरावट आएगी। विश्व में अनाज का उत्पादन जरूर कम होगा।

उल्लेखनीय बात यह है कि अनाज संकट की अनेक रिपोर्टों में चीन के बारे में कुछ नहीं बताया गया। चीन सरकार ने भी अनेक बार अनाज सप्लाई की सुरक्षा को सुनिश्चितता का विश्वास प्रकट किया। चीन का विश्वास निम्नलिखित आंकड़ों से आया है।

चीनी कृषि और गांव मंत्रालय के विकास कार्यक्रम ब्यूरो के प्रभारी वेइ पेईकांग ने कहा कि 2010 से चीन में औसत व्यक्ति के लिए अनाज की मात्रा विश्व के औसत स्तर से ऊपर होता है। 2019 में चीन में औसत व्यक्ति के पास 470 किलोग्राम अनाज थे, जो विश्व के औसत व्यक्ति के 400 किलोग्राम के अंतर्राष्ट्रीय अनाज सुरक्षा मापदंड रेखा के ऊपर है। धान, आटा और गेहूं की मिसाल लें, तो इन तीनों अनाज की आत्म-निर्भरता दर 97 प्रतिशत से अधिक है। 2019 से 2020 तक चीन में हर साल धान का खर्चा करीब 19.7 करोड़ टन है, जबकि देश में धान की वार्षिक उत्पादन मात्रा 19.9 करोड़ टन है। 2019 से 2020 तक चीन ने 25 लाख टन चावल का आयात किया, जो वास्तविक खर्च का सिर्फ 1.3 प्रतिशत है। इसलिए चीन अनाज का आयात पर निर्भर नहीं करता है।

चूंकि चीन एक बड़ी आबादी वाला देश है। चीन में अनाज संकट कब आएगा? इसकी चर्चा हमेशा रहती है। 1994 के सितंबर माह में अमेरिकी विश्व सर्वेक्षण संस्थान के प्रभारी लीसेस्टर ब्राउन ने एक लेख जारी कर अनुमान लगाया कि 2030 तक चीन की आबादी 1.6 अरब तक जा पहुंचेगी। मौके पर चीन की अनाज सप्लाई में 21.6 करोड़ से 37.8 करोड़ टन का अभाव होगा। जबकि विश्व में कोई ऐसा देश नहीं है कि इतने ज्यादा अनाज देकर चीनियों का पालन कर सकता। भविष्य में चीन को गंभीर अनाज अभाव से भारी संकट का सामना करना पड़ेगा। यही है चीन में अनाज संकट की दलील का स्रोत। लेकिन तथ्य यह है कोविड-19 के प्रकोप और बाढ़ आने के बावजूद इस साल चीन के ग्रीष्मकालीन अनाज में भी फसल हुई है। चीनी कृषि और गांव मंत्रालय द्वारा हाल में जारी आंकड़े बताते हैं कि इस साल चीन के ग्रीष्मकालीन अनाज का उत्पादन 28.56 खरब टन तक पहुंचा है, जो पिछले साल की तुलना में 0.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जो इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है।

इसके साथ विश्व हाइब्रिड चावल के पिता युआन लोंगफिंग ने भी कहा कि चीन अनाज के उत्पादन की आत्म-सप्लाई को साकार कर सकता है। चीन में अनाज के अभाव की समस्या नहीं होगी। अब चीन में अनाज की भंडार दर 80 प्रतिशत तक जा पहुंची है, जबकि विश्व एफएओ द्वारा निर्धारित सुरक्षा लाल रेखा 17-18 प्रतिशत है। यह इस बात का द्योतक है कि चाहे इस साल कोई फसल नहीं हुई, फिर भी अनाज का आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भंडार में अनाज 1.4 अरब चीनियों के लिए 10 महीनों तक खाया जा सकता है।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories