हेलोंगच्यांग में हेचे जातीय लोगों का खुशहाल जीवन

2020-08-05 09:00:00
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पूर्वोत्तर चीन के हेलोंगच्यांग प्रांत के थोंगच्यांग शहर में च्येचिनखओ नामक स्थल हेचे जाति बहुल इलाका है। इधर के सालों में हेचे जाति के लोगों ने बहु-तरीके विकास रास्ता चुना और उनका जीवन दिन-प्रति-दिन खुशहाल होने लगा।

च्येचिनखओ जिले में य्वीये गांव ल्यानहुआ नदी के पास बसा हुआ है। महिला गांववासी ह शूयान रोज मछली नावों की देखभाल करती है। साल में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि में नावों की देखभाल करनी होती है। गांव ने ह शूयान को यह काम सौंपा। इसी अवधि में उसे 3 हज़ार युआन की आय प्राप्त होती है। इसके अलावा, वह गांव में स्वास्थ्य निरीक्षक भी है, दोनों कार्य करने से हर साल ह शूयान को 8 हज़ार युआन की स्थाई आय मिलती है।

54 वर्षीय ह शूयान और पति कू फ़ूहाई का जीवन मछली पकड़ने पर निर्भर रहता है। बीमारी की वजह से परिवार का जीवन गरीब था। साल 2014 में सरकारी नीति के अनुसार, गांव में गरीब परिवारों को न्यूनतम जीवन गारंटी की सूची में शामिल किया गया। ह शूयान परिवार को भी न्यूनतम जीवन गारंटी मिली। न्यूनतम जीवन गारंटी से प्राप्त पैसे, मछली पकड़ने, नावों की देखभाल करने और अन्य तरह की कमाई से साल में परिवार में 30 हज़ार युआन की आय होती है। अपने पास पैसे होने की वजह से दंपति को खुशी होती है और स्वास्थ्य भी अच्छा होने लगा। उनके जीवन में आशा नजर आने लगी है।

पति कू फ़ूहाई के विचार में वर्तमान में जीवन सुखमय है। परिवार में पैसे जमा हैं, भरपेट खाना खाया जाता है। घर में टीवी, वॉशिंग मशीन आदि उपलब्ध हैं। वह पुराना मॉबाइल फोन बदल कर अच्छा वाला खरीदना चाहता है। दो साल बाद वह साठ वर्ष का हो जाएगा, तब पेंशन मिलेगा। उसने कहा कि आने वाला दिनों में परिवार का जीवन और बेहतर होगा।

हेचे जाति चीन में सबसे कम जनसंख्या वाली अल्पसंख्यक जातियों में से एक है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी सोंगहुआच्यांग नदी, हेलोंगच्यांग नदी और उसुरीच्यांग नदी क्षेत्र में बसती है। इस जाति के लोगों का जीवन मछली पकड़ने पर निर्भर रहता है, लोग मछली खाल प्रोसेसिंग में निपुण हैं। युगात्मक विकास के चलते मछली खाल से बने वस्त्र पहनना इतिहास बन चुका है। वर्तमान में हेचे लोग मछली की खाल और हड्डी से हस्त शिल्प वस्तुएं बनाते हैं, जिसे पर्यटक पसंद करते हैं।

60 वर्षीय गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के उत्तराधिकारी सुन य्वीलिन मछली खाल से चित्र बनने में निपुण हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई लोग मछली की हड्डी और खाल से हस्त शिल्प वस्तुएं बनाकर बेचते हैं। पर्यटक बहुत पसंद करते हैं। उनके द्वारा बनाए गये मछली खाल वाले वस्त्रों को दक्षिण कोरिया और जापान में निर्यात किया जाता है, मछली खाल वाले चित्र देश भर में ही नहीं, बल्कि जर्मनी, ब्रिटेन आदि देशों में भी बेचे जाते हैं।

हेचे जाति की मछली संबंधी संस्कृति से आकर्षित होकर ज्यादा से ज्यादा पर्यटन च्येचिनखओ प्रिफेक्चर के य्वीये गांव आते हैं। स्थानीय गांववासी पर्यटन सेवा करने से अतिरिक्त आय प्राप्त करते हैं। गांववासी योउ छंगछंग के मुताबिक, य्वीये गांव में वायु स्वच्छ है, प्राकृतिक दृश्य सुन्दर है, आसपास के कई पर्यटक सप्ताहांत में गाड़ी चलाकर यहां आते हैं। रात को होमस्टे में हेचे जातीय नाचगान का प्रदर्शन किया जाता है। कभी-कभार अग्नि चलाने का समारोह आयोजित किया जाता है। पर्यटक यहां उसुरीच्यांग नदी की मछली खाते हैं और हेचे जातीय संस्कृति का अनुभव लेते हैं। उन्हें आनंद मिलता है।

योउ छंगछंग के मुताबिक, हर साल मई से अक्तूबर तक वह अतिथि-गृह सेवा करने से व्यस्त रहते है, साल में एक लाख युआन की शुद्ध आय मिलती है।

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