महामारी में विश्व के विभिन्न देशों में उच्च शिक्षालयों की प्रवेश परीक्षा बहुत मुश्किल रही

2020-07-15 09:00:00
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कोविड-19 के प्रकोप से 2020 में चीन के उच्च शिक्षालयों की प्रवेश परीक्षा यानी काओ खाओ एक महीने तक स्थगित किये जाने के बाद 7 से 10 जुलाई तक चीन के विभिन्न स्थलों में आयोजित हुई। 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया और जीवन में एक बहुत महत्वपूर्ण परीक्षा ली।

चीन के अलावा विश्व के कई देशों में काओ खाओ जैसी देशव्यापी परीक्षा होती है। एक अच्छे विश्वविद्यालय में दाखिला लेना किसी भी देश के विद्यार्थियों के लिए आसान बात नहीं है। इस साल महामारी के प्रभाव से यह परीक्षा और कठिन हो गयी है।


फ्रांसः दर्शनशास्त्र संबंधी विषय इंटरनेट पर लोकप्रिय

फ्रांस में हर साल उच्च शिक्षालयों की प्रवेश परीक्षा जून महीने में होती है। फ्रांस दुनिया में कुछ गिने-चुने देशों में से एक है, जहां मिडिल स्कूल से ही दर्शनशासत्र का कोर्स शुरू हो जाता है। दर्शनशास्त्र हरेक विद्यार्थी के लिए जरूरी कोर्स है। हर साल दर्शनशास्त्र संबंधी टॉपिक लोगों का ध्यान खींचते हैं, जो चीन में काओ खाओ की चीनी भाषा परीक्षा में निबंध प्रश्न की तरह अहम है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में फ्रांस में दर्शनशास्त्र की परीक्षा में ऐसे सवाल पूछे गए थे कि क्या मानव जाति समय से बच सकती है?…… इत्यादि।

लेकिन फ्रांस में विश्वविद्यालय में पढ़ने का आवेदन देने के लिए दैनिक पढ़ाई स्थिति और महत्वपूर्ण है। इस साल महामारी फैलने से फ्रांस सरकार ने हाई स्कूल की स्नातक परीक्षा को रद्द कर दिया, जबकि विद्यार्थियों के दैनिक स्कोर और टेस्ट स्कोर विश्वविद्यालयों का आवेदन देने की जरूरी शर्त बनते हैं। इस साल के मई माह में फ्रांस के मिडिल स्कूल के स्नातकों ने पता लगाया कि खुद किस विश्वविद्यालय में भर्ती होना है।

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दक्षिण कोरियाः एक दिन में 5 परीक्षाएं जरूरी

दक्षिण कोरिया में उच्च शिक्षालयों की प्रवेश परीक्षा आम तौर पर हर साल के नवम्बर माह में आयोजित होती है। कोरियाई भाषा में इस प्रवेश परीक्षा का अर्थ है क्षमता की परीक्षा होता है।

चीन में काओ खाओ से अलग है दक्षिण कोरिया में यह प्रवेश परीक्षा एक ही दिन में पूरा करने की आवश्यक्ता होती है। परीक्षा सुबह 8 बजकर 40 मिनट से तीसरे पहर के 5 बजकर 40 मिनट तक चलती है। विद्यार्थियों को कोरियाई भाषा, गणित, अंग्रेजी भाषा, दक्षिण कोरिया के इतिहास और साईंस अध्ययन उपरोक्त पांच पाठ्यक्रमों की परीक्षा लेनी होती है। जिन में साईंस अध्ययन में हरेक विद्यार्थी 2 से 4 सब्जेक्ट चुनकर परीक्षा ले सकता है। इन के अलावा दूसरी विदेशी भाषा की परीक्षा भी होती है। एक दिन में पांच कॉर्सों की परीक्षा लेना आसान बात नहीं है। विद्यार्थियों को भारी दबाव का सामना करना पड़ता है।

कोविड-19 के प्रकोप से इस साल दक्षिण कोरिया में उच्च शिक्षालय की प्रवेश परीक्षा 3 दिसम्बर तक स्थगित की जाएगी। यह भी दक्षिण कोरिया के इतिहास में पहली बार है कि देश में इस परीक्षा की तिथि को स्थगित होगी।


केन्याः विद्यार्थियों को एक महीने में 22 एग्ज़ाम देने पड़ते हैं

पूर्वी अफ्रीका के केन्या में उच्च शिक्षालय की परीक्षाएं हर साल के नवम्बर की शुरूआत से अंत तक चलती हैं। विद्यार्थियों को गणित, अंग्रेजी भाषा और स्वाहिली आदि करीब 22 पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं लेनी पड़ती हैं। यह मैराथन की तरह लम्बी परीक्षा होती है।

इस साल कोविड-19 के प्रकोप से 13 मार्च को केन्या में पहले पुष्ट मामले का पता चलने के बाद केन्या में स्कूल बंद किये गए। केन्या के शिक्षा मंत्री जॉर्ज माग्हा ने 5 जुलाई को कहा कि यदि सरकार अगले साल के अप्रैल माह से पहले पुनः स्कूल नहीं खोल पायी, तो शिक्षा मंत्रालय 2020 और 2021 दोनों सालों की परीक्षाओं को जोड़ कर एक साथ आयोजित करेगा। यह इस बात का द्योतक है कि इस साल केन्या में उच्च शिक्षालय की प्रवेश परीक्षा रद्द होगी।


भारतः विश्व में सबसे कठिन परीक्षा

भारत में भी उच्च शिक्षालयों की प्रवेश परीक्षा की प्रतिस्पर्द्धा बहुत तीव्र होती है, जिसे विश्व में सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है।

भारत“5+3+2+2”की पढ़ाई व्यवस्था अपनाता है, यानी कि 5 सालों का जूनियर प्राइमरी स्कूल, 3 साल की सीनियर प्राइमरी स्कूल, 2 साल की जूनियर मिडिल स्कूल और 2 साल का सीनियर मिडिल स्कूल है। इसलिए 12वीं ग्रेड के स्नातकों की परीक्षा चीन में काओ खाओ की तरह होती है। यह परीक्षा भारतीय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित की जाती है। कला के छात्र अंग्रेजी भाषा, गणित, भूगोल, इतिहास और सरल अर्थशास्त्र की परीक्षा लेते हैं, जबकि विज्ञान के छात्र अंग्रेजी भाषा, गणित, भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान की परीक्षा लेते हैं। परीक्षा का कुल अंक 500 स्कोर होता है। यदि विद्यार्थी का कुल अंक 375 स्कोर है, जो कुल अंक का 75 प्रतिशत है। भारत में 75 प्रतिशत का अंक पाने से विद्यार्थी को संभवतः विश्वविद्यालय में पढ़ने का मौका मिलता है। लेकिन यदि भारत के समुन्नत विश्वविद्यालय में दाखिला चाहिए तो आम तौर पर 90 प्रतिशत अंक पाने होते हैं।

कोविड-19 के प्रभाव से इस साल भारत में उच्च शिक्षालय की प्रवेश परीक्षा पूरी नहीं हो सकी है, यानी कुछ विषयों की परीक्षाएं नहीं ली गयी हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बाकी कोर्सों की परीक्षाएं रद्द की जाएंगी या जारी रहेंगी, अब भारत का शिक्षा मंत्रालय व संबंधित विभाग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं।


सिंगापुरः टेस्ट पेपरों को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में जांच के लिए भेजा जाएगा

सिंगापुर में विश्वविद्यालय की दाखिला परीक्षा का नाम सिंगापुर कैम्ब्रिज लेवल-ए मानक परीक्षा होता है। सभी टेस्ट पेपरों को ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भेजकर जांचा जाता है। यह परीक्षा हर साल के जून से नवम्बर माह के बीच आयोजित होती है और अगले साल के मार्च में परीक्षा का परिणाम जारी किया जाता है। विद्यार्थी क्रमशः दो साल में परीक्षा ले सकते हैं और बेस्ट स्कोर के रूप में विश्वविद्यालय की भरती के लिए आवेदन दे सकते हैं।

परीक्षा में गणित、अंग्रेजी भाषा、अर्थशास्त्री、भूगोल、भौतिक विज्ञान、रसायन、उन्नत गणित आदि सब्जेक्ट होते हैं। यदि विद्यार्थी परीक्षा में अच्छा अंक पाना चाहते, तो बहुत कठिन है। मशहूर विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए विद्यार्थियों को कम से कम 4 विषयों के ए-स्तरीय प्रमाण पत्र पाने की आवश्यक्ता होती है।

कोविड-19 के प्रभाव से इस साल इस परीक्षा का परिणाम पत्र ई-मेल या टेलिफोन के जरिए विद्यार्थियों को भेजा जाएगा, ताकि लोग संक्रमण के जोखिम से बच सकें।

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इटलीः इस साल केवल मौखिक परीक्षा

इस साल इटली में हाई स्कूल की स्नातक परीक्षा 17 से 18 जून तक आयोजित हुई, जिस में करीब 5.15 लाख विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कोविड-19 के चलते इटली के शिक्षा मंत्रालय ने एक महीने पहले ही लिखित परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया था। विद्यार्थियों को केवल 1 घंटे लम्बी मौखिक परीक्षा लेनी पड़ी। मौखिक परीक्षा का कुल अंक है 40 स्कोर, जबकि हाई स्कूल के तीन सालों का कुल अंक 60 स्कोर है और स्नातक परीक्षा का कुल स्कोर 100 है।


रूसः चीनी भाषा की परीक्षा में 100 प्रतिशत पाने वाला विद्यार्थी

रूस में हर साल की यह परीक्षा आम तौर पर मई के अंत या जून की शुरूआत में आयोजित होती है। गणित और रूसी भाषा जरूरी कोर्स होते हैं। इस के अलावा विद्यार्थी भूगोल, साहित्य, इतिहास, टेलिकॉम, सूचना, भौतिक विज्ञान, रसायन, जैविक और विदेशी भाषा आदि दस से ज्यादा कोर्सों में से दो कोर्सों की परीक्षा लेना अनिवार्य होता है। उल्लेखनीय बात यह है कि 2019 में चीनी भाषा औपचारिक रूप से रूस की इस परीक्षा में विकल्प कॉर्स बन गयी। इस समय पूरे रूस में कुल 65 विद्यार्थियों ने चीनी भाषा की परीक्षा ली, जिसका औसत स्कोर 62.5 है। मॉस्को की एक विद्यार्थी गत वर्ष में 100 स्कोर पाकर रुस में एकमात्र ऐसी छात्र बनी।

कोविड-19 की वजह से इस साल रूस में 3 से 23 जुलाई तक इस परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। रूस में करीब 6.2 लाख हाई स्कूल के स्नातक परीक्षा में लेंगे। अगस्त के अंत में परीक्षा का परिणाम जारी किया जाएगा। नये सत्र की शुरूआत संभवतः 1 अक्टूबर तक स्थगित की जाएगी।


ईरानः पुष्ट छात्र मामले अस्पताल में परीक्षा ले सकते हैं

ईरान में उच्च शिक्षालय की परीक्षा हर साल के जून के अंत में या जुलाई की शुरूआत में आयोजित होती है, जो दो दिनों तक चलती है। फारसी भाषा और साहित्य, अरबी भाषा, धार्मिक ज्ञान और अंग्रेजी भाषा चार सार्वजनिक सब्जेक्ट हैं, जो सभी विद्यार्थियों को परीक्षा लेनी होती है। बाकी विषय विद्यार्थियों की रूचि के मुताबिक चुने जा सकते हैं। चीन से अलग है ईरान में पांच किस्मों की परीक्षाएं उपलब्ध हैं, यानी कि गणित और प्रौद्योगिकी, अनुभवजन्य विज्ञान, मानविकी, कला, विदेशी भाषाएं आदि होती हैं।

कोविड-19 की वजह से इस साल ईरान में इस परीक्षा 20 से 21 अगस्त तक स्थगित की गयी है। लोगों की दूरी को कायम रखने के लिए पहले की तुलना में इस साल परीक्षा स्थलों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जिस विद्यार्थी में कोविड-19 के लक्षण हैं, वह भी चिकित्सक संस्था में परीक्षा भी ले सकता है। अगर पुष्ट विद्यार्थी का घर में उपचार किया जाता है, तो इस के लिए निश्चित स्थल में परीक्षा लेने का प्रबंध भी किया जाएगा।


मिस्रः तीन हफ्तों में करीब 20 विषयों की परीक्षा

अन्य देशों की तुलना में मिस्र में उच्च शिक्षालय की परीक्षाएं बहुत लम्बी होती है, जो 3 हफ्तों तक चलती हैं। हरेक विद्यार्थी को अरबी भाषा, पहली विदेशी भाषा, दूसरी विदेशी भाषा आदि करीब 20 विषयों की परीक्षा देनी होती है।

इस साल मिस्र में यह परीक्षा 21 जून से औपचारिक शुरू हुई और जुलाई के अंत में समाप्त हुई। मिस्र के विभिन्न स्थलों में 7.2 लाख विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया। मिस्र के स्वास्थ्य मंत्रालय ने परीक्षा के लिए 3.4 करोड़ मास्क, 65 लाख दस्ताने और 16 हजार शरीर तापमान डिटेक्टर की तैयारी की थी।

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