चीनी विद्यार्थियों को निष्कासित करने से अमेरिका को खुद पहुंचेगा नुकसान

2020-06-26 10:00:00
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अमेरिकी ह्वाइट हाउस ने हाल में एलान किया कि अमेरिका एफ वीजा या जे वीजा के जरिए अमेरिका में अध्ययन या पढ़ाई करने वाले चीनी विद्वानों व छात्रों के अमेरिका में प्रवेश करने पर पाबंदी लगाएगा। यह एलान 1 जून से औपचारिक रूप से प्रभावी हो गया है।

अमेरिकी न्यूयार्क टाइम्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प सरकार चीनी जन मुक्ति सेना से प्रत्यक्ष संबंध रखने वाले कई हजार चीनी स्नातक छात्रों और विद्वानों का वीजा रद्द करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम 3000 चीनी छात्र इस से प्रभावित होंगे। न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि यह योजना अमेरिका द्वारा पहली बार किसी किस्म के चीनी छात्रों के खिलाफ पेश की गयी है। अमेरिकी राजनेताओं की चीन विरोधी भावना राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक व तकनीक क्षेत्रों से अब सांस्कृतिक क्षेत्र में भी फैल चुकी है। अमेरिका में "मैकार्थीवाद" के दर्शक को फिर से जीवित किया जा रहा है।

दूसरी ओर, 28 मई को अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के सांसद टॉम कपास और मार्था ब्लैकबर्न ने स्कूल सुरक्षा बिल पेश किया, जिसका मकसद चीनी छात्रों के अमेरिका में साइंस, तकनीक, इंजीनियरिंग और स्तेम(STEM) क्षेत्र पढ़ने के लिए वीजा बंद करना है। 22 मई को अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने 33 चीनी उद्यमों और संस्थाओं को वास्तविक सूची में शामिल किया, जिन में 13 चीनी विश्वविद्यालय शामिल हैं। चीनी रनमिन विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय विकास और रणनीतिक अनुसंधान संस्था के अनुसंधानकर्ता प्रोफेसर त्याओ दामिंग का मानना है कि चाहे चीनी छात्रों को निशाने बनाने की कार्यवाई या चीन को बदनाम करने की दलील में कुछ अमेरिकी राजनयिकों द्वारा विश्व परिवर्तन के सामने प्रभुत्ववाद पर कायम रहने का रुख दिखाया जाता है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखा जाए चीन और अमेरिका के बीच मानवीय आदान प्रदान का समय राजनयिक संबंधों की आवाजाही से कहीं और लम्बा है। 1784 में "चीनी रानी" जहाज के चीन पहुंचने के बाद मानव सांस्कृतिक क्षेत्र में चीन और अमेरिका के बीच आवाजाही जारी रही है। नये चीन की  स्थापना के बाद चीन-अमेरिका संबंध का सुधार भी पिंगपांग कूटनीति से शुरू हुई है। इसलिए हम कह सकते हैं कि मानवीय सांस्कृतिक आवाजाही ने चीन-अमेरिका संबंध के विकास में अहम भूमिका अदा की है। अब अमेरिकी राजनयिक शीत युद्ध के विचारधारा की प्रेरणा में चीनी छात्रों का बहिष्कार करना चाहते हैं, तो मानों चीन-अमेरिका संबंधों के सब से कोमल भाग में एक चाकू लग गया हो।

चीनी छात्रों को देश की सुरक्षा के लिए धमकी मानकर इस बहाने से चीनी छात्रों के अमेरिका में पढ़ने पर नियंत्रण करना न केवल चीन-अमेरिका संबंधों को क्षति पहुंचाता है, बल्कि अमेरिका के खुद के हितों को भी नुकसान पहुंचाता है। राइटस के मुताबिक हर साल करीब 3.6 लाख चीनी छात्र अमेरिका में पढ़ते हैं, जो अमेरिका के लिए 14 अरब अमेरिकी डॉलर का मुनाफा दे सकते हैं। न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने भी इस नीति के प्रति चिंतित है। उनकी चिंता है कि ट्म्प सरकार की यह नीति कैम्पस में जातिवादी व्यवहार को प्रेरित कर सकेगी।

बीबीसी ने कहा कि अमेरिका सरकार का यह निर्णय संभवतः अमेरिकी विज्ञान व तकनीक कंपनी और वैज्ञानिक अनुसंधान के स्तर पर प्रभाव पड़ सकेगा। हर साल लाखों चीनी छात्र स्नातक होने के बाद अमेरिका में अनुसंधान करने या काम करने का विकल्प चुनते हैं, जिन में अधिकांश छात्र स्टेम के हैं। गूगल, सॉफ्टवेयर और एपल समेत अनेक अमेरिकी कंपनियों ने चीनी मूल के इंजीनियरों को भरती किया है। प्रोफेसर त्याओ ने कहा कि चूंकि आजकल अमेरिका आम चुनाव की प्रक्रिया में है। महामारी के आम चुनाव पर असर के मद्देनजर कुछ अमेरिकी राजनयिकों ने चीन के प्रति नीति बनाते समय तर्कहीन अवस्था में फंसा है और तर्कसंगत नीतिगत विचार नहीं दे सकते। हाल में अमेरिका ने अनेक नीतियां पेश कीं, लेकिन दीर्घकालीन दृष्टिकोण से यह अमेरिका के खुद के हित के लिए लाभदायक नहीं है।

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