प्राचीन लू श्वू कस्बे का दौरा

2020-06-05 10:07:51
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मध्य चीन स्थित च्यांगसू प्रांत खूबसूरत जलीय स्थल के नाम से जाना जाता है और यहां विख्यात प्राचीन कस्बे भी हैं। उन में से दो हजार पाँच सौ वर्ष पुराना लू श्वू प्राचीन कस्बा बहुत प्रसिद्ध है।

लू श्वी कस्बा च्यांगसू प्रांत के सूचो शहर में है। समूचे कस्बे का कुल क्षेत्रफल सिर्फ एक वर्ग किलोमीटर से थोड़ा ही अधिक है। प्राचीन कस्बे लू श्वू के पश्चिमी छोर पर एक ऊँचा पत्थर का मंडप है, जिसपर प्राचीन कस्बा लू श्वू अंकित है। उसे पार कर प्राचीन कस्बे लू श्वू का प्रतीकचिन्ह एक सिंग वाला लू त्वान देखा जा सकता है। इस अजीब रूप वाले जानवर लू त्वान के बारे में कहा जाता है कि वह तेजी से दौड़ने और अनेक प्रकार की सूचनाएं जानने में निपुण होता है। साथ ही वह विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय बोलियां भी समझ सकता है। इसलिए स्थानीय लोग उसे सुख चैन को बनाए रखने वाले देवता के रूप में मानते हैं। लू श्वू प्राचीन कस्बे में रहने वाली हमारी गाईड ने इस प्राचीन कस्बे का परिचय देते हुए कहा, लू श्वू प्राचीन कस्बे का इतिहास कोई दो हजार पाँच सौ वर्ष पुराना है। इसका निर्माण चीन के वसंत शरद युद्धरत काल में हुआ था। इस कस्बे के दक्षिण भाग की खुदाई में प्राप्त सांस्कृतिक व ऐतिहासिक अवशेषों के सर्वेक्षण से पता चला है कि कोई पाँच हजार पाँच सौ साल पहले यहां पर लोग रहते थे। मौजूदा प्राचीन कस्बे में एक नदी और दो सड़कों वाली वास्तु शैली आज भी बरकरार है। नदी के दोनों किनारों पर सौ वर्ष से अधिक पुराने मकान हैं और इन तमाम मकानों को दो भागों में बांटा गया है। आगे का भाग व्यापार करने के लिए दुकान का काम देता है, जबकि पिछवाड़े के भाग में लोग रहते हैं।

जब पर्यटक लू श्वू प्राचीन कस्बे की पुरानी सड़क पर घूमने जाते हैं, तो चाहे पुरानी वास्तु शैली में बने मकान हों या गहरी गलियां हों, हर जगह पर्यटक प्राचीन कस्बे के माहौल को महसूस कर सकते हैं। लू श्वू प्राचीन कस्बे में नौ प्रमुख सड़कें हैं। सड़कों के दोनों किनारों पर खड़े अधिकतर मकान तीन चार सौ साल पहले चीन के मिंग व छिंग राजवंश कालों में निर्मित हुए हैं। चौड़े या संकरे सभी रास्तों पर गोल-गोल पत्थर बिछाये गये हैं और जितनी भी सड़कें दिखायी पड़ती हैं, वे सब की सब नदियों के दोनों किनारों पर हैं। इससे यहां के निवासी आने-जाने के लिए जल मार्ग का सहारा लेते हैं, और इन सड़कों के दोनों किनारों पर दुकानें ही दुकानें नजर आती हैं और यहां बहुत चहल-पहल रहती है। इस प्राचीन कस्बे में सभी मकानों की दीवारें वाले रंग की हैं और दरवाजें व खिड़कियां लकड़ियों से बनायी गयी हैं। बहुत सी काली खपरैलों की दीवारों पर सुन्दर चित्रकारी भी हुई है। लू श्वू कस्बे की सब से बड़ी विशेषता है कि अनेक नद नदियां यहां से होकर बहती हैं और बड़ी संख्या में छोटे-बड़े पुल बने हुए हैं।

इस प्राचीन कस्बे में बहुत गहरा सांस्कृतिक वातावरण है, जलीय ग्रामीण माहौल भी बहुत मनमोहक है। पर्यटक यहां आकर विविधतापूर्ण आकार वाली नावों पर विहार कर सकते हैं। इतना ही नहीं, सुन्दर परिधानों से सुसज्जित युवतियां नाव चलाते हुए गाना भी गाती हैं, बहुत मजा आता है।

लू श्वू प्राचीन कस्बा दक्षिण चीन की पुल राजधानी के नाम भी जाना जाता है। सिर्फ एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले कस्बे में विभिन्न राजवंश कालों में स्थापित गोलाकार पत्थर पुलों की संख्या 70 से अधिक हैं। इतने अधिक पुलों में कुछ पुल अनेक छंद वाले हैं और कुछ एकल छंद के हैं। बहुत से पर्यटकों का कहना है कि लू श्वू प्राचीन कस्बे का दौरा करने के साथ साथ एक प्राचीन पुल म्युजियम देखने का मौका भी मिलता है।

लू श्वू प्राचीन कस्बे की दूसरी विशेषता है कि यहां प्राचीन पेड़ों की भरमार है। वर्तमान प्राचीन कस्बे में सात पुराने गिंकगो पेड़ सब से चर्चित हैं, जिन में सब से बड़े पेड़ की उम्र एक हजार पाँच सौ वर्ष से अधिक है। इस 50 मीटर ऊंचे पेड़ की मोटाई सात आठ व्यक्तियों की बांहों के घेरे जितनी हैं।

गाईड ने हमें बताया कि लू श्वू प्राचीन कस्बे में तीन दुर्लभ प्राचीन पेड़ पर्यटकों को लुभाने में सब से आगे हैं। उन का कहना है कि चीनी वोल्फबेरी नामक पेड़ एक सौ बीस वर्ष से भी अधिक पुराना है। फिर इस सौ वर्ष पुराने पेड़ के बगल में उगी सौ वर्ष पुरानी बैंगनी लताएं भी बहुत चर्चित हैं। हर वर्ष एक दूसरे को लिपटाने वाली इन लताओं पर खिले हुए सुन्दर फूल हैं, जिनसे हल्की-हल्की महक आती रहती है। जबकि तीसरा दुर्लभ पेड़ डेढ़ हजार वर्ष गिंकागो पेड़ ही है। गाईड ने कहा कि पर्यटक उक्त तीनों दुर्लभ पुरानी वस्तुएं लू श्वू प्राचीन कस्बे के पाओ शंग मंदिर में ही देख सकते हैं। पाओ शंग मंदिर लू श्वू प्राचीन कस्बे की पश्चिमी सड़क पर है। उसका निर्माण सन् 503 में हुआ था। आज तक वह एक हजार पाँच सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। पिछले हजार वर्षों में इस मंदिर का कई बार पुनर्निर्माण किया गया है। इस मंदिर में थांग राजवंश काल के शिला लेख और मिंग राजवंश काल के प्राचीन निर्माण जैसे सांस्कृतिक व ऐतिहासिक अवशेष अच्छी तरह सुरक्षित हैं। पर इस मंदिर में संरक्षित अर्हत मूर्तियां सब से उल्लेखनीय हैं।

ये अर्हत मूर्तियां एक हजार वर्ष पहले के थांग राजवंश में बनायी गयी थीं। शुरू में यहां पर तैयार मूर्तियों की संख्या आठ थी। पर बाद में एक अग्निकांड में चार मूर्तियां आग में जलकर राख हो गयीं, सिर्फ अन्य चार मूर्तियां बची हैं। इन अर्हत मूर्तियों और साधारण मूर्तियों के बीच का सब से बड़ा फर्क यह है कि साधारण अर्हत मूर्तियां अलग-अलग हौकर मूर्तियां दीवार के सहारे निर्मित हुई हैं। उन की पृष्ठभूमि में लहरदार विशाल समुद्र, सीधी खड़ी चट्टान और मंडराते हुए बादल दिखाये देते हैं। ये मूर्तियां अधिक जीवंत लगती है और उन की मुद्राओं से उन के पृथक स्वभाव की झलक मिलती है, उन में कुछ गुफा में बैठकर साधना करने में मग्न दिखाई पड़ते हैं। अन्य कुछ कोहरे से घिरे पहाड़ पर बैठे हुए नजर आते हैं। यह मूर्ति समूह एक जीता जागता स्याही चित्र मालूम पड़ता है और बहुत आलीशान है।

दीवार से सटी इन मूर्तियों की सब से बड़ी विशेषता यह है कि ये अर्हत मूर्तियां दीवार से सटी हुई हैं और उन के पीछे समुद्र, सीधी खड़ी चट्टान और बादल का चित्रण भी किया गया है। ऐसे चित्रण को समुद्र पहाड़ शैली कहा जाता है। इन मूर्तियों को बहुत सुन्दर ढंग से पहाड़ व समुद्र के साथ जोड़ा गया है।

पर्यटक लू श्वू प्राचीन कस्बे में न सिर्फ पुराने मंदिर, प्राचीन पुल, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक अवशेष और प्राचीन पेड़ हैं, बल्कि पुरानी सड़कों पर घूमते हुए आधुनिक वातावरण भी महसूस किया जा सकता हैं। यही नहीं, सड़कों पर सू चओ की अल्पसंख्यक जाति की महिलाएं भी देखने को मिल जाती हैं। ये महिलाएं कसीदा त्रेस, कसीदा जूते और रंगीन रेशमी स्कार्फ जैसे अलग-किस्म परम्परागत जातीय पोशाकों से सजी हुई हैं। ये महिलाएं लू श्वू प्राचीन कस्बे को छोड़कर दूसरी किसी भी जगह पर देखने को नहीं मिलती हैं। यह प्राचीन कस्बे लू श्वू की एक अलग पहचान है। इसलिए अधिकतर पर्यटक इस प्राचीन कस्बे का दौरा करने के बाद यादगार के लिए जातीय कसीदा त्रेस, कसीदा जूते और रेशमी स्कार्फ खरीद कर वापस ले जाते हैं।

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