रमणीय ह्वांगक्वोशू पर्यटन क्षेत्र का दौरा

2020-05-28 16:00:00
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क्या आप को मालूम है कि ह्वांगक्वोशू झरना दक्षिण पश्चिम चीन स्थित क्वेइचो प्रांत के आनशुन शहर की चन निंग पुई व म्याओ जातीय स्वशासन काऊंटी में है। वह मोती नदी की शाखा पाई श्वी नदी के नौ दर्जे वाले झरना समूह में सब से बड़ा झरना माना जाता है। उसका नाम एक स्थानीय वनस्पति ह्वांगक्वोशू के नाम से रखा गया है। इस झरना की ऊँचाई 77 मीटर है, जिसके मुख्य भाग की ऊँचाई 67 मीटर है और चौड़ाई 101 मीटर है, जबकि उस के मुख्य भाग की चौड़ाई है 83 मीटर। ह्वांगक्वोशू झरना कार्स्ट भू सूरत का सब से विशेष झरना है। यह विश्वविख्यात पर्यटन स्थल प्रसिद्ध ह्वांगक्वोशू बड़े झरने को केंद्र बनाकर शह थाओ कस्बे और थ्येन शिंग पुल समेत 6 विशेषताओं वाले पर्यटन क्षेत्रों में बटा हुआ है। 1999 में विश्व गिनिस हेडक्वार्टर ने विश्व के सब से बड़े झरना समूहों में शामिल कर दिया है। वह स्वभावतः विश्व गिनिस रिकार्ड की गिन्नती में आ गया है। अच्छा, अब हम एक साथ ह्वांगक्वोशू झरने का दौरा करने जाएं।

दोस्तों, अब हम प्रसिद्ध ह्वांगक्वोशू झरने के पास आ पहुंचे हैं। यहां खड़े होकर आप को यह महसूस होता है कि पूरे वायु मंडल में नमी पतला कोहरा व्याप्त रहा है, मानों छुटपुट वर्षा हो रही हो, बड़ा ठंडक और शीतल लगता है। बहुत से पर्यटक इस सुन्दर भू दृश्य के सामने फोटो खिंचने में होड़ सी लगाते हुए दिखाई देते हैं। ह्वांगक्वोशू झरने की चौड़ाई 101 मीटर है और ऊँचाई है 77 मीटर, दूर से देखने में अत्यंत भव्यदार लगता है।

ह्वांगक्वोशू बड़ा झरना चीन में सब से चश्मा माना जाता है। उन का नाम एक स्थानीय विशेष किस्म वाली ह्वांगक्वोशू वनस्पति के नाम से रखा गया है। इस विशाल झरने में विविधतापूर्ण शैलियों वाली चश्मे बिखरे हुए हैं, जिससे विश्व गीनिस मुख्यालय ने विश्व में सब से बड़ा झरना समूह कहकर गिनिस की नामसूची में शामिल कर लिया।

ह्वांगक्वोशू झरना एक बड़ा झरना समूह है। उसके आसपास 20 वर्गकिलोमीटर विशाल क्षेत्र में अजीबोगरीब छोटे बड़े झरने देखने को मिलते हैं। उनमें 101 मीटर चौड़ा व 77.8 मीटर ऊँचा सब से बड़ा झरना साल भर में पर्याप्त जल मात्रा में नीचे गिरकर बहता रहता है, देखने में बहुत भव्यदार लगता है।

ह्वांगक्वोशू पर्यटन स्थल में हरे भरे पर्वत, स्वच्छ चश्मा, अजीबोगरीब चोटियां और पत्थर पाये जाते हैं। बड़ी तादाद में सरिताएं व नद नदियां कभी कल कल कर घाटियों से होकर आगे बह जारी हैं, कभी जमीन के नीचे जाकर भूमिगत नदियों का रुप लेते हैं। स्वच्छ पानी और नीले आसमान के दर्शनीय प्राकृतिक दृश्य में यदि पर्यटक हरे भरे पर्वत समूहों में घूमते हुए प्राकृतिक आक्सिजन बार की ताज़ा हवा खाऐंगे, तो कितना बड़ा सुखद होगा। हमारे स्थानीय गाइड ने बड़े गर्व के साथ यहां के विशेष सौंदर्य का परिचय देते हुए कहा झरना के पास खड़े होकर आप को पानी के जो फवार लगते हैं, उसमें आक्सिजन अनिओं की मात्रा बहुत ज्यादा निहित है, हरेक सैंडीमीटर क्षेत्र में 28 हजार आक्सजन अनिओं गर्भित हैं। यहां फेफड़े को धोने वाली सब से अच्छी जगह है।

ह्वांगक्वोशू बड़ा झरना ह्वांगक्वोशू झरना समूह में सब से शानदार झरना जाना जाता है, साथ ही वह विश्व में एक ऐसा झरना भी है, जो ऊपर, नीचे, आगे, पीछे, बायं व दायं इन छै तरफों से इस विशाल झरने को साफ साफ देखा जा सकता है और वह विश्व में जलीय पर्दे वाला झरने के नाम से भी नामी है। यहां पर जलीय पर्दे के पीछे एक जलीय गुफा भी उपलब्ध है। इस गुफे की गहराई 20 मीटर से अधिक है और गुफे का मुंह साल भर में झरनों से अच्छादित हुआ है और गुफे के झरोखे से प्राकृतिक जलीय पर्दा नजर आता है।

हमारे गाईड ने इस का परिचय देते हुए कहा कि ह्वांगक्वोशू झरना चीन का सब से बड़ा झरना है और वह विश्व के प्रसिद्ध झरनों में से एक है। उल्लेखनीय है कि वह विश्व में छै तरफों से साफ साफ देखने को मिलने वाला एक मात्र झरना भी है। 134 मीटर लम्बा जलीय पर्दा भी पाया जाता है। इससे वह विश्वविख्यात बड़ा झरने की गिनती में आता ही नहीं, बल्कि आसपास के 20 वर्गकिलोमीटर विशाल व्याप्त वाले क्षेत्र में 9 दर्जों वाले 18 छोटे चश्मे भी बिखरे हुए हैं। इतना ही नहीं, ह्वांगक्वोशू झरने की तलहटी में 17.7 मीटर गहरा कुम्भ भी है।

ह्वांगक्वोशू पर्यटन स्थल में दर्शनीय प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ लेने के साथ साथ स्थानीय स्वादिष्ट पकवान चखने को भी मिलते हैं। पोपो मिठाई नामक स्थानीय पकवान उन में बेहद चर्चित है।

पोपो मिठाई क्वेइ चो प्रांत में बसी अल्पसंख्यक जातियों का एक विशेष पकवान है। मिंग राजवंश में अल्पसंख्यक जातियों में से एक म्याओ जाति के राजमहल में यह पकवान बहुत लोकप्रिय था, बाद में धीरे धीरे आम लोगों में प्रचलित होने लगा।

पो पो मिठाई चिपचिपा चावल के पाउडर व भुने हुए तिल को मिलाकर बनायी जाती है। यह मिठाई खाने में बड़ा मजेदार ही नहीं, बल्कि बहुत पुष्टिकर भी है। साथ ही वह खांसी का उपचार करने का काम भी देती है।

ह्वांगक्वोशू झरना पर्यटन स्थल में अनौखा प्राकृतिक दृश्य और स्वादिष्ट पकवान छोड़कर म्याओ और पुई समेत अनेक अल्पसंख्यक जातियां बसी हुई हैं। घाटियों व पर्वतों के बीच अकसर अल्पसंख्यक जातियों की युवतियों की पहाड़ी गीत गाने की सुरिली आवाज सुनायी देती है। साथ ही झरना समूह के पास खड़े होकर पर्यटक बातों से बात करने वाले सीधी खड़ी चट्टानों के ऊपर गिरने वाले पानी पर्दे को देखकर मानो किसी स्वर्ग में प्रवेश गये हो।

अब ह्वांगक्वोशू प्रसिद्ध विश्व प्राकृतिक विरासतों में से एक होने की वजह से बड़ी तादाद में देशी विदेशी पर्यटकों को मोहित कर लेता है। पर अधिकतर लोगों को मालूम नहीं है कि दस साल से पहले यह दर्शनीय स्थल अपने पारिस्थितिकी पर्यावरण की वजह से विश्व प्राकृतिक विरासत की नामसूची में शामिल नहीं हो पाया।

1992 में चीन के ह्वांगक्वोशू, च्योचाईगो और चांगच्याच्येइ ने एक साथ विश्व प्राकृतिक विरासतों में शामिल करने के लिए आवेदन पेश किया। पर तत्काल में ह्वांगक्वोशू दो स्थानीय कारणों से विश्व प्राकृतिक विरासतों में शामिल नहीं हो पाया। क्योंकि ह्वांगक्वोशू की भू सूरत विशेष कार्स्ट सूरत है, रेतीली भूमि पर वृक्षारोपण का क्षेत्रफल मांग को पूरा नहीं हुआ था। दूसरा कारण है कि ह्वांगक्वोशू के केंद्रीय क्षेत्र में कई सौ गांववासी बसे हुए थे। उस समय से ही ह्वांगक्वोशू पर्यटन स्थल ने पारिस्थितिकी पर्यावरण के निर्माण व संरक्षण करने में जोर लगाया और बड़े पैमाने तौर पर पेड़ लगाए। अतः समूचे पर्यटन स्थल को हरा भरा बनाने में कुल नौ करोड़ युआन से अधिक पूंजी जुटायी। पर्यटन स्थल की 80 प्रतिशत की भूमि पर पेड़ लगाये गये हैं, जबकि 1992 में वृक्षारोपण का क्षेत्रफल मात्र 30 प्रतिशत था। इस के अलावा पर्यटन स्थल में बसने वाले गांववासियों को दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया है।

पारिस्थितिकी संरक्षण कदमों के कार्यान्वयन से ह्वांगक्वोशू पर्यटन स्थल के वायु व पानी की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आया है।

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