रमणील पर्यटन स्थल प्राचीन फिंगलह कस्बे का दौरा

2020-05-15 13:00:00
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दक्षिण पश्चिम चीन स्थित सछ्वान प्रांत की राजधानी छंगतू शहर खुशहाली राज्य के नाम से सारे चीन में जाना जाता है। यहां पर सुहावना मौसम ही नहीं, बल्कि संसाधनों की खूब भरमार भी होती है। इससे यहां के स्थानीय निवासी बड़े निश्चिंत रुप से आरामदेह जीवन बिताने के आदी हो गये हैं। इसी कारण से बहुत से देशी विदेशी पर्यटक यहां के आरामदेह जीवन पर मोहित हो जाते हैं। छंतू शहर के पास बिखरे छोटे प्राचीन कस्बे भी देशी विदेशी पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र रहे हैं, जिन में दो हजार वर्ष पुराने प्राचीन कस्बा फिंगलह भी शामिल है।

दो हजार वर्ष प्राचीन फिंगलह कस्बा, दक्षिण पश्चिम छंतू शहर से 93 किलोमीटर दूर अवस्थित है। वह प्रसिद्ध चीनी राष्ट्रीय ऐतिहासिक व सांस्कृतिक कस्बों की नामसूची में शामिल हो गया है।

पानी हरित पर्वतों से घिरे फिंगलह, प्राचीन कस्बे की आत्मा है। फिंगलह कस्बे के पुराने निर्माणों के बीच घूमते हुए पानी ही पानी दिखाई देते हैं। वातावरण बहुत ताजा और शांत है।

श्वी चिंग च्ये यानी जलीय दृश्य सड़क एक मशहूर सड़क है। कोई पाँच सौ मीटर लम्बी नहर इसी सड़क से होकर आगे बह जाती है। हालांकि यह नहर ज्यादा लम्बी नहीं है, पर उस पर दसेक सेतु स्थापित हुए हैं। और तो और हरेक सेतु का आकार प्रकार अलग अलग दिखायी देता है। इतना ही नहीं, इस जलीय सड़क पर विविधतापूर्ण स्वादों वाले मटन, दुग्ध नुडल, चिकन, सोयाबिन पनीर और तिल रोटी जैसी लोकप्रिय स्थानीय व्यंजन खाने को मिलते हैं। प्राचीन फिंगलह कस्बे की विशेष विशेषताओं में पुरातन सब से मुख्य है। कहा जाता है कि ईसा पूर्व 150 में तत्कालीन पश्चिम हान राजवंश काल में इस स्थल ने रोनकदार कस्बे का रुप ले लिया था, तब से लेकर आज तक इस कस्बे का इतिहास कोई दो हजार वर्ष पुराना हो गया। इतने लम्बे ऐतिहासिक दौर में संरक्षित प्राचीन सड़क, प्राचीन मंदिर, प्राचीन पुल, प्राचीन पेड़, प्राचीन बाँध, प्राचीन मंडप, पुराने रीति रिवाज और पुराने गायन ने इस छोटे कस्बे को और चार चाँद लगा दिया है।

फिंगलह प्राचीन कस्बा पाइ मो नदी के किनारे पर अवस्थित है, स्थानीय लोग इस नदी को माता नदी के रुप में मानते हैं। इस कस्बे के छोर पर खड़ा एक पुराना पेड़ इस कस्बे की आत्मा मानी जाती है। पेड़ का इतिहास कोई एक हजार पाँच सौ वर्ष पुराना हो गया है। पर आज तक वह फिर भी फलता फूलता नजर आ रहा है। यहां के स्थानीय लोग हजारों वर्ष में उसे इसी कस्बे की आत्म समझते आये हैं। इसी विश्वास के साथ यहां के लोग अपनी जन्मजात संतान को इसी पेड़ के सोतेले बेटे बेटी का रुप देते हैं, ताकि वे जिंदगी भर में सही सलामत व सुखी रह सके। साथ ही चीनी पंचांग के अनुसार हर माह की पहली व 15 तारीख को बड़ी तादाद में व्यापारी इस पेड़ की पूजा करने आते हैं, ताकि अपना व्यापार सफल होकर मालामाल हो सके। प्राचीन फिंगलह कस्बे में हजारों वर्षीय पुराने प्राकृतिक भू दृश्य और विशेषताओं से युक्त रिहायशी मकान देखने को मिलते ही नहीं, बल्कि तराताजा आदिम सांसारिक समृद्ध संस्कृति भी देखी जा सकती है। तीन पीढ़ियों द्वारा संचालित सौ वर्ष पुराना लौहा शोधन वर्गशॉप , सौ वर्ष पुरानी पोटो शॉप और सौ वर्ष पुराने स्थानीय स्वादित व्यंजन भी पाये जाते हैं। क्योंकि यहां पर कोई पर्यटन स्थल नहीं है, इसलिए यहां के स्थानीय निवासी पीढ़ी दर पीढ़ी यहां रहते आये हैं और अपने आदिम जीवन तौर तरीके बनाये रखे हुए हैं।

इस प्राचीन छोटे कस्बे की सड़क पर स्थित दादी छन की सौयाबिन पनीर दुकान सब से चर्चित है। विशेष तरीके से तैयार सोयाबिन पनीर का सुगंध चारों तरफ व्याप्त रहा है। इस दुकान के गेट पर एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर फिंगलह की सब से पुरानी दुकान शब्द अंकित हुए हैं। यह दुकान बहुत पुरानी है, ग्राहक खरीदने से पहले पनीर चख सकते हैं। यदि उन्हें इस का स्वाद पसंद आता है, तो वे अपनी इच्छा से ले सकते हैं। यह सुनकर एक पर्यटक ने तुरंत ही आगे चल कर पूछा कि क्या यह चख सकता है। उन्होंने बड़े उत्साह के साथ कहा कि बिलकुल। चखिए, देखिए, यह सुन्न व तीखा स्वाद है। वह शिमला मिर्च का है और यह सोयाबिन जाम का है। सब कुछ हैं। अपनी मर्जी से चख लीजिए।

कोई पर्यटक प्राचीन फिंगलह कस्बे में और कुछ ज्यादा दिन ठहरना चाहता है। क्योंकि इस छोटे प्राचीन कस्बे का बड़ा शांतिमय व निश्चिंत वातावरण पर्यटकों को मोह लेता है। यहां ठहरने के दौरान मानसिक तनाव व तरह तरह की परेशानियां एकदम कायब हो जाती हैं। यहां आने पर पर्यटक तुरंत ही प्राचीन कस्बे के वातावरण में घुल मिल जाते हैं और यहां के आदिम जीवन स्थिति व रहन सहन महसूस कर सकते हैं। इस का प्राकृतिक दृश्य भी बेहद सुन्दर है। हरे भरे पर्वत व स्वच्छ पानी एक दूसरे से जुड़े हुए दिखायी देते हैं। साथ ही यहां के स्थानीय वासी भी बड़े आराम से दिन काटते हैं। वे आम तौर पर काम करने के बाद कई दोस्तों के साथ चाय पीते हुए गपशप मारते हैं।

फिंगलेह कस्बे में कोई रंगारंग मनोरंजन नहीं है। पर्यटकों का यहां आने का मकसद भी इतना सीधा सादा है कि पाइ चू नदी के तट पर बैठकर दोस्तों के साथ चाय पीते हुए गपशप मारा जाया, ताश खेला जाये या आंखें बंद कर ताजा हवा खायी जाए।

जी हां, स्थानीय लोग अपना उत्सव मनाने के लिए विविधतापूर्ण आयोजन भी करते हैं। फिंगलह प्राचीन कस्बे में छिंग मिंग उत्सव के उपलक्ष में नदी दीप मेला लगा जाता है। चीनी पंचांग के अनुसार तीसरे माह की 11 तारीख को मंदिर मेला आयोजित किया जाता है। छठे माह की छ तारीख को चिन ह्वा पर्वत बुद्ध का जन्म दिवस मनाया जाता है। गर्मियों में जलीय प्रेम गायन प्रतियोगिता भी होती है। स्थानीय वासी और पर्यटक नाम दर्ज कर इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।

यह प्राचीन छोटा कस्बा छंगतु शहर से काफी नजदीक है। यातायात भी बड़ा सुविधाजनक है। साथ ही स्थानीय निवासियों का पारिवारिक होटल सस्ता ही नहीं, बहुत साफ सुथरा भी है। बहुत ज्यादा छंगतू वासी सप्ताहांत में यहां आने के आदी हो गये हैं।

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