मेरा इरादा आम नागरिकों के लिए और अधिक अस्पतालों का निर्माण करना है

2020-03-11 09:00:00
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3 फरवरी को दस दिन के डिज़ाइन और निर्माण के बाद, कोविड-19 के मरीजों का उपचार करने वाला ह्वोशनशान अस्पताल औपचारिक रूप से चीन के वुहान को सौंपा गया। इस चीनी गति की अनोखी की रचना करने वाले 7000 से अधिक मजदूरों और उन के पीछे सहायता सिस्टम है। जिसमें जनरल चिकित्सक वास्तु कलाकार ह्वांग शिछ्यो के नेतृत्व वाला तकनीक समर्थन दल का बड़ा योगदान है।

ह्वोशनशान अस्पताल के निर्माण ने विश्व नेटीजनों का ध्यान खींचा, फिर ह्वांग शिछ्यो का नाम भी लोगों के सामने आया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ छ्वनयिंग ने ह्वांग का परिचय देते समय कहा कि वे इंडोनेशिया से वापस लौटे चीनी हैं। उन की कहानी ने तुरंत इंडोनेशियाई मीडिया का ध्यान खींचा। इंडोनेशियाई मीडिया ने उन के सहपाठियों, रिश्तेदारों और मित्रों का साक्षात्कार किया। वे तुरंत इंडोनेशिया में मशहूर बन गये।

हुवांग शिछ्यो चीनी मशीनरी उद्योग ग्रुप की पेइचिंग चोंगयुआन अंतर्राष्ट्रीय प्रॉजेक्ट कंपनी के जनरल चिकित्सक वास्तु कलाकार हैं। हाल में चाइना मीडिया ग्रुप के साथ एक साक्षात्कार में हुवांग ने कहा कि उन्हें कभी कल्पना नहीं की कि वे इंडोनेशिया में मशहूर बन जाएंगे। उन्होंने कहा,“मैं सिर्फ एक साधारण आदमी हूं। मेरा जन्म इंडोनेशिया में हुआ और वहां हाई स्कूल तक पढ़ाई की। 1957 में मैं स्वदेश वापस लौटा और यहीं रहता हूं। हालांकि इंडोनेशिया से वापस लौटे 60 साल से ज्यादा हो चुके हैं, फिर भी मेरे जन्मस्थान और युवावस्था ने मेरे पर गहरी छाप छोड़ी है। वहां की वास्तु इमारतें, शहर, द्वीप, अध्यापक और मित्र सभी मेरी स्मृति में हैं।”

2003 के अप्रैल माह में पेइचिंग ने सिर्फ 7 दिनों में 1000 बेड की क्षमता होने वाले श्याओथांगशान अस्पताल का निर्माण पूरा किया, जिस में खास तौर पर सार्स के मरीजों का उपचार किया गया। इस के बाद के दो महीनों में इस अस्पताल ने चीन के करीब 14 प्रतिशत के सार्स मरीजों को भर्ती किया, जिस दौरान कोई एक चिकित्सक संक्रमित नहीं है। यह मानव जाति के चिकित्सक इतिहास में एक अनोखी बात है। लेकिन क्या आप को पता है कि श्याओथांगशान अस्पताल के डिजाइनर भी ह्वांग शिछ्यो हैं।

इस साल के जनवरी माह में वुहान से आपात सहायता की मांग मिलने के बाद चीनी मशीनरी उद्योग ग्रुप की पेइचिंग चोंगयुआन अंतर्राष्ट्रीय प्रॉजेक्ट कंपनी ने तुरंत ह्वांग शिछ्यो के नेतृत्व तकनीक समर्थन दल का गठन किया। एक महीने में 79 वर्षीय ह्वांग ने कभी छुट्टी नहीं ली। उन्होंने ह्वोशनशान अस्पताल और अन्य आपात चिकित्सक संरचनाओं के डिजाइन व निर्माण को तकनीक सहायता दी।

वास्तव में ह्वोशनशान अस्पताल का डिजाइन करने से पहले ह्वांग शिछ्यो ने सीपीसी पार्टी को एक आवेदन पत्र दिया। पत्र में उन्होंने यह लिखा,“मैं सीपीसी पार्टी का सदस्य हूं। बाकी युवा सहकर्मियों की तुलना में मेरा कोई बोझ नहीं है। साथ ही मेरे पास सार्स के दौरान श्याओथांगशान का निर्माण करने का अनुभव है। मैं समय पर कोविड-19 महामारी के संघर्ष में भाग लेने को तैयार हूं।”उन के दफ्तर के एक कोने में 17 साल पहले का एक सूटकेस रखा है।

24 फरवरी को ह्वांग शिछ्यो ने चाइना मीडिया ग्रुप के पत्रकार के साथ विशेष साक्षात्कार में कहा,“वुहान पक्ष की मांग पर हम ने तुरंत श्याओथांगशान के निर्माण के डिजाइन ड्राइंग को निकाला और वुहान के संबंधित पक्ष के साथ एक इंटरनेट प्लेटफार्म का निर्माण किया। हमने वीडियो बातचीत में समस्याओं को समय पर हल किया। साथ ही हम ने उस साल श्याओथांगशान के निर्माण में कमियों को भी शेयर किया। आशा है कि ह्वोशनशान अस्पताल के निर्माण में इन कमियों को दूर किया जा सकेगा।”

ह्वांग के दल की सहायता में वुहान आपात प्रॉजेक्ट टीम ने 24 घंटों में डिजाइन ड्राइंग बनाया। एक संक्रामक रोग अस्पताल होने के नाते सुरक्षात्मक क्षेत्र, प्रदूषित कचरे का निपटारा, पानी के पाइप बिछाना आदि विभिन्न सुरक्षात्मक कदमों की बहुत सख्त मांग है। श्याओथांगशान अस्पताल के निर्माण अनुभव से लेकर ह्वोशनशान अस्पताल का डिजाइन और निर्माण आसान हो गया।

ह्वांग शिछ्यो ने कहा कि उन के डिजाइन काम में श्याओथांगशान अस्पताल का डिजाइन सब से कठिन था। सार्स जैसी इतने बड़े पैमाने वाली आपात सार्वजनिक स्वास्थ्य घटना सब लोगों के लिए पहली बार मिली थी। लेकिन चूंकि पहले ह्वांग ने पेइचिंग योआन अस्पताल और पेइचिंग दिथान अस्पताल आदि संक्रमण रोगों के अस्पतालों का डिजाइन तैयार किया था, इसलिए उन के पास पर्याप्त तकनीक अनुभव हैं। हुवांग ने कहा,“श्याओथांगशान अस्पताल कंटेनरों द्वारा बनाया गया था। इतने कम समय में निर्माण पूरा करने के लिए इस तरह निर्माण का तरीका यथार्थ साबित हुआ। उस समय श्याओथांगशान की बुनियादी मांग, उदाहरण के लिए चिकित्सक सेवा की बुनियादी मांग, खास तौर पर जैविक सुरक्षा की मांग, अग्नि सुरक्षा और संरचनात्मक सुरक्षा आदि सुनिश्चित की गयी”

2012 में ह्वांग शिछ्यो को छठे ल्यांग सछंग वास्तुकला पुरस्कार मिला। यह चीन में वास्तुकला के क्षेत्र में सब से ऊंचा इनाम है। ह्वांग की नजर में चिकित्सक वास्तु इमारतों के डिजाइन मरीजों और चिकित्सकों की सेवा करने के साथ उन की मांग को केंद्र रखकर सुनिश्चित देने की आवश्यकता है।

चिकित्सक वास्तु इमारतों के डिजाइन में सुरक्षा अहम तत्व है। ह्वां ने कहा, “चूंकि अस्पताल खास इमारतें हैं, इसलिए अहम सार्वजनिक स्वास्थ्य घटना के होते समय अस्पतालों को तुरंत प्रतिक्रिया देनी होती है। इस बार हम महामारी से जूझते हैं, लेकिन पहले भूकंप के समय अस्पतालों ने भी बड़ी भूमिका अदा की थी। भूकंप के समय अनेक स्कूल बंद कर सकते हैं, कारखाना भी बंद कर सकते हैं, जबकि अस्पताल कभी नहीं बंद कर सकते। चूंकि भूकंप ग्रस्त लोगों का इलाज करने की जरूरत है। इसलिए अस्पतालों में सुरक्षित ढांचा भी बहुत जरूरी है। इस के अलावा, अस्पतालों को विविध सुरक्षा मांगों का सामना करना पड़ता है। मिसाल के लिए, अग्नि कांड, रासायनिक कारखानों का विस्फोट, न्यूक्लियर विस्फोट इत्यादि। यह सब हमारे सामने मौजूद जोखिम हैं। और तो और यातायात दुर्घटना, विमान दुर्घटना आदि का भी हमें ख्याल करना होता है।”

इंडोनेशिया के अनेक नेटीजनों ने ह्वांग शिछ्यो की कहानी को पढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर ह्वांग की भारी प्रशंसा की और कहा कि वे भी ह्वांग से सीखकर बाद में देश और समाज के लिए योगदान देने वाले आदमी बनाना चाहते हैं। उन के जवाब में ह्वांग ने भी कहा, “आशा है कि इंडोनेशियाई युवा लोग मेहनत से पढ़ेंगे और काम करेंगे, ताकि अपने देश का अच्छी तरह निर्माण कर सकें। मैं यह भी आशा करता हूं कि युवा दोनों देशों की जनता के बीच मैत्री को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर सकेंगे।”

अपनी सब से पसंदीदा इच्छा की चर्चा में हुवांग ने कहा कि वे चाहते हैं कि चीनी लोगों के लिए और अधिक बेहतर अस्पतालों का निर्माण कर सकें। उन्होंने कहा, “मैं एक साधारण आदमी हूं। लेकिन मैं अपनी पसंद के काम करने में व्यस्त रहता हूं। स्वदेश वापस लौटने के बाद मेरी मातृभूमि ने मुझे आगे पढ़ाने का मौका दिया और मुझे बेल्जियम में पढ़ने के लिए भेजा। पढ़ने के बाद मैं देश वापस लौटा। उस समय चीन का तेज विकास हो रहा था। अनेक बड़े पैमाने वाले अस्पतालों का निर्माण किया जा रहा था। सो मुझे अपने ज्ञान से समाज की सेवा करने का अवसर मिला। यह भी मेरा सब से बड़ा इरादा है।”

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