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रहस्यमय ह्वा याओ यानी फूल याओ जातीय गांव का दौरा

2020-02-06 11:00:00
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दक्षिण चीन के क्वांगशी च्वांग जातीय स्वायत्त प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में बसी चीनी अल्पसंख्यक जातियों में से एक लाल याओ जाति रहती है। मजे की बात है कि इस जाति की महिलाएं अपने लम्बे चमकदार बालों को बेहद कीमती समझती हैं। उन की मान्यता में चिकने लम्बे बाल सुखमय जीवन और आकांक्षा के प्रतीक हैं।

हम यह भी जानते हैं कि याओ जाति अपनी महिलाओं की पोशाकों व आभूषणों की विशेषताओं के अनुसार अपनी शाखा को नाम देती है। जैसे दक्षिण पश्चिम चीन के क्वांगशी च्वांग स्वायत्त प्रदेश के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में बसी महिलाएं लाल पोशाक पहनना पसंद करती हैं। इसलिए इस शाखा को लाल याओ कहा जाता है।

आज के प्रोग्राम में हम मध्य चीन के उत्तर पश्चिम हू नान प्रांत के हू शिंग पहाड़ी क्षेत्र में आबाद याओ जाति की ह्वा याओ यानी फूल याओ नामक एक अलग शाखा के गांव देखने जा रहे हैं।

हू नान प्रांत का हू शिंग पहाड़ समुद्री सतह से 1300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस पहाड़ी क्षेत्र में चीन की 55 अल्पसंख्यक जातियों में से एक याओ जाति की एक शाखा ह्वा याओ यानी फूल याओ रहती है। उसकी जनसंख्या मात्र पाँच हजार के आसपास है। याओ जाति की इस शाखा के अति सुन्दर पोशाक, रहस्यमय रीति रिवाज और प्राचीन पेड़ दिन ब दिन अधिक से अधिक पर्यटकों को अपनी ओर खिंच लेते हैं।

ह्वा याओ यानी फूल याओ जाति का इतिहास कोई चार सौ वर्ष पुराना है। जाति का नाम क्यों फूल याओ दिया गया है, कारण है कि उन के लोगों के पोशाक, विशेषकर लड़कियां जो सुन्दर रंगीन कसीदा कपड़े पहनती हैं, वे सब के सब खुद लड़कियों कसौदा किये जाते हैं और उन की आकृतियां भी बेहद सजीव व विविधतापूर्ण हैं। इसीलिए लोगों ने हमारी जाति को फूल याओ का सुन्दर नाम दे दिया।

फूल याओ जाति के अनौखे सुन्दर पोशाक सचमुच ही चमत्कृत हैं। और फूल याओ जाति सचमुच बहुत सुन्दर है। यदि आप ने अपनी आंखों से नहीं देखा, तो आप यह कल्पना नहीं कर सकते कि फूल याओ जातीय लड़कियों के ड्रैस कितने चमकीले और सूक्ष्म हैं। ऐसा कहा जा सकता है कि विश्व में जितने भी अधिक चमकदमक रंग उपलब्ध हैं, वे सब के सब फूल याओ जाति के लड़कियों के परिधानों पर देखे जा सकते हैं।

चमकीला स्काफ, लम्बा नीला ड्रैस, कसीदा स्कर्ट, कमर को दसियों बार लपेटने वाला कमरबंद फूल याओ जाति की हरेक युवती का प्रतीक है। इस जाति की युवतियों ने अपने पोशाकों पर जो ड्रैगन, फूलों, पक्षियों की सुन्दर आकृतियां कसीदा की हैं, वे सब जाति जागती लगती हैं।

फूल याओ की युवती के लिए कढ़ाई करने में निपुण होना और अपने हाथों से जिंदगी भर के लिए पर्याप्त स्कर्ट कसीदा करना अत्यावश्यक है, वरना कोई भी युवक उस के साथ शादी करना नहीं चाहता। इसलिए फूल याओ जाति की युवतियां अपने बचपन से ही कढ़ाई की कौशलता पर महारत हासिल करने की जी तोड़कर कोशिश करती हैं और वे अकसर एक साथ बैठकर स्कर्टों पर विविधतापूर्ण जीती जागती आकृतियां काढ़ते हुए दिखाई देती हैं।

फूल याओ जाति का प्राचीन पेड़ों से घनिष्ट वास्ता है, हरेक गांव के आसपास प्राचीन पेड़ उगे हुए हैं। फूल याओ जाति में प्राचीन पेड़ों की पूजा करने की परम्परा है। बुजुर्ग अकसर हमें यह उपदेश देते हैं कि जहां प्राचीन पेड़ दिखाई देते हैं, वहां अवश्य ही लोग रहते हैं। इसलिए यदि आप वहां के किसी पहाड़ पर भ्रम में पड़ गये हो, तो चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं। उक्त उपदेश के अनुसार प्राचीन पेड़ की खोज से बाहर जा सकते हैं।

फूल याओ जाति को विश्वास है कि प्राचीन पेड़ इस जाति के वासियों के रक्षक हैं। गांववासी जब प्राचीन पेड़ के पास आते हैं, तो वे अवश्य ही हाथ से उसे छू लेते हैं। कहा जाता है कि इस से पूरी जाति के लिए भला है।

फूल याओ जाति पहाड़ी गीत गाने के शौकिन है, उन के गांव में अकसर मधुर पहाड़ी गीत सुनने को मिलता है।

फूल याओ जाति के पहाड़ी गीत मन छूने वाले ही नहीं, बहुत से युवक व युवतियां ऐसे गीतों के माध्यम से ही प्रेम के बंधनों में भी बंध जाते हैं। साथ ही खेतों में काम करते समय वे पहाड़ी गीत गाना भी नहीं भूलते। इसलिए पहाड़ी गीत इस जाति के जीवन का एक अभिन्न भाग बन गया है।

फूल याओ जाति के बीच अनेक प्रकार के रीति रिवाज प्रचलित हैं, जिन में शादी व्याह सब से चर्चित है। आम तौर पर शादी व्याह में दुल्हा व दुल्हन उन का परिचायक ही है। फूल याओ जाति परिचायकों को सब से बुद्धिमान व सम्मानित मानती है। शादी व्याह में दुल्हन की सहेलियां उस के परिचायक को निशाना बनाकर उस पर पलती कीचड़ फेंकने में होड़ लगा देती हैं, जबकि यह परिचायक अपने कपड़ों पर पतली कीचड़ देखकर गुस्से के बजाये अतन्यंत प्रसन्न हो उठता है।

बेशक जब फूल याओ जाति के जिस गांव में शादी व्याह होता है, तो उसी गांव के तमाम लोग खुशियां मनाने के लिए शादी व्याह में उपस्थित होते हैं और धधगती आग्नि के आसपास गहरी रात तक नाचते गाते रहे हैं और चारों ओक उल्लासपूर्ण माहौल व्याप्त रहा है।

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