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लंदन का अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र का स्थान कब तक स्थिर होगा

2020-01-15 10:00:00
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वर्ष 2019 बीत चुका है। पिछले एक साल में अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति डांवाडोल रही थी। गत दिसम्बर में ब्रिटिश कंजर्वेटिव पार्टी के आम चुनाव में विजय पाने के बाद साढ़े तीन साल तक चले ईयू से ब्रिटेन के हटने की मैराथन दौड़ भी खत्म होने वाली है। तमाम अनिश्चितताओं के मद्देनजर ईयू से हटने के बाद क्या लंदन विश्व वित्तीय केंद्र का स्थान बरकरार रख सकेगा? चीनी उद्यमों के लिए भविष्य में ब्रिटेन उन्हें किस तरह के अवसर दे सकेगा या चुनौती दे सकेगा? सुनिये संबंधित एक रिपोर्ट।

होलैंड निवासी केरिन क्लक ब्रिटेन में करीब 30 साल से रह रही हैं। वे एक वाणिज्य परामर्श कंपनी का संचालन करती हैं। इस सितंबर में उन्होंने कंपनी के कुछ व्यवसायों को होलैंड में स्थानांतरित किया। इस का कारण बताते हुए उन्होंने कहा, मुझे साफ पता नहीं था कि ईयू से हटने के बाद ब्रिटिश कंपनियों के अनुकूल में संबंधित कानून या नियमावलियां क्या होंगी। व्यवसाय के कारगर रूप से प्रबंध करने के लिए मैंने यूरोपीय महाद्वीप में और एक कंपनी खोली है।

केरिन ने न केवल कंपनी के व्यवसाय को यूरोपीय महाद्वीप में स्थानांतरित किया, बल्कि उन्होंने निर्णय लिया कि वे और उनके बच्चे होलैंड में जीवन बिताएंगे। लेकिन उन के पति ब्रिटिश हैं, होलैंड में नयी नौकरी ढूंढना उनके लिए मुश्किल है। इसलिए उन्हें विवश होकर ब्रिटेन में रहना पड़ा। अब परिवार के लोग दो देशों में रहते हैं।

होलैंड के विदेशी निवेश ब्यूरो ने कहा कि ब्रिटेन द्वारा ईयू से हटने का निर्णय लेने के बाद कई ब्रिटिश कंपनियां होलैंड में स्थानांतरित हुई हैं, अन्य 100 से अधिक कंपनियों ने भी स्थानांतरित होने की इच्छा प्रकट की हैं।

हालांकि कुछ विदेशी पूंजी वाले उद्यम ब्रिटेन के भविष्य के प्रति आशावान नहीं हैं, फिर भी अभी अभी लंदन के मेयर बनने विलियम रुसेल का मानना है कि लंदन की भाषा, सुयोग्य व्यक्तियों और कानूनी प्रशासन की श्रेष्ठताएं हैं, जिन से लंदन का वित्तीय सिटी का स्थान मजबूत रहेगा। जबकि उद्यमों के बाहर स्थानांतरण और सुयोग्य व्यक्तियों के बाहर जाने की स्थिति इतनी गंभीर नहीं है। रुसेल ने कहा, तथ्य यह है कि लंदन के बाहर स्थानांतरित लोगों की संख्या कल्पना से कम है। मेरा मतलब है कि साढ़े तीन साल पहले ईयू से हटने पर जनमत संग्रह करते समय अनुमान लगाया गया कि लंदन 75 हजार से 85 हजार रोजगार के मौके खो देगा, जबकि वास्तविक संख्या इस से कम है। अर्न्स्ट एंड यंग ने अनुमान लगाया कि सिर्फ करीब 1000 रोजगार खो देंगे।

लंदन के पूर्व मेयर पीटर एस्तलिन ने कहा कि उन के कार्यकाल में उन्होंने बड़ी मात्रा में पूंजी को ब्रिटेन में प्रवेश करते देखा है। लंदन के वित्तीय सिटी का स्थान कभी नहीं हिलने वाला है। वित्तीय स्थिरता को ईयू से हटने की प्रक्रिया में हम सब से बड़ा महत्व देते हैं। विश्व का विकास ब्रिटेन के ईयू से हटने से नहीं रुकेगा। इस के विपरीत हमने देखा कि ब्रिटेन की अच्छी आर्थिक स्थिति और विकास रुझान की वजह से निवेश ब्रिटेन में आता रहता है।

लंदन विश्व का पहला बड़ा आरएमबी ऑफशोर ट्रेडिंग सेंटर और विश्व का दूसरा आरएमबी ऑफशोर क्लियरिंग सेंटर माना जाता है। 2019 की दूसरी तिमाही में लंदन में आरएमबी का दैनिक सौदा करीब 85 अरब ब्रिटिश पाउंड तक पहुंचा था, जिसमें 2018 की तुलना में 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ । वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में लंदन का नेतृत्व स्थान और आरएमबी के प्रमुख विदेशी सौदा केंद्र की भूमिका की चर्चा में लंदन शहर के मेयर रुसेल को पूरा विश्वास है। लंदन एशिया के साथ-साथ चीनी मुद्रा आरएमबी के ऑफशोर ट्रेडिंग सेंटर का प्राकृतिक विकल्प है। मेरा विचार है कि इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। इस के अलावा, पिछले कई सालों में हमने देखा कि आरएमबी उत्पादों और आरएमबी क्लियरिंग की मात्रा स्थिर रूप से बढ़ रही है। अब ब्रिटिश सरकार द्वारा चुने गये आरएमबी क्लियरिंग बैंक----चीनी कन्सट्रक्शन बैंक की लंदन शाखा में आरएमबी की क्लियरिंग राशि 400 खरब चीनी युआन को पार कर गयी है। यहां मैं फिर एक बार यह कहना चाहता हूं कि मैं आरएमबी के ऑफशोर ट्रेडिंग सेंटर के लिए लंदन की भूमिका पर सक्रिय रुख अपनाता हूं।

आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी ने विजय हासिल की, जिससे ईयू से ब्रिटेन के हटने का भविष्य उज्ज्वल हो गया। ब्रिटेन में अधिकांश चीनी उद्यमों ने ईयू से हटने के बाद ब्रिटेन के आर्थिक विकास के प्रति आशावान रुख अपनाया। लंदन के हुआफ़ू वाणिज्य संघ के अध्यक्ष तंग जूथिंग ने कहा कि हालांकि अनेक उद्यम लंदन से हट चुके हैं, फिर भी यदि अंत में लंदन ईयू से हटने के समझौते पर हस्ताक्षर करता है, तो विश्वास है कि लंदन अवश्य ही चीनी उद्यमों समेत और ज्यादा विश्व उद्यमों को आकर्षित कर सकेगा। यूरोपीय महाद्वीप में इस व्यापार साझेदारी खोने के बाद ब्रिटेन जरूर अंतरदेशीय निवेश के सहयोग की मांग बढ़ेगी। इस क्षेत्र में चीन ब्रिटेन के साथ आपसी सहयोग कर सकता है। तंग के मुताबिक, ईयू से हटने के बाद ब्रिटेन चीन को चाहता है, जबकि वित्तीय और उच्च विज्ञान व तकनीक के क्षेत्रों में भी चीन ब्रिटेन को चाहता है। ब्रिटेन में उच्च विज्ञान व तकनीक के विकास का अच्छा रुझान है, फिर भी पूंजी का अभाव है। जबकि हमारे पास पूंजी है, लेकिन उच्च विज्ञान व तकनीक का अभाव है। यदि दोनों पक्ष अच्छी तरह से सहयोग करते हैं, तो दोनों देशों के लिए अच्छी बात होगी।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन और यूरोपीय संघ के बीच 2019 के अक्तूबर माह में संपन्न ईयू से हटने के समझौते के मुताबिक दोनों पक्ष 2020 के अंत से पहले मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता को समाप्त करेंगे। इस के साथ ही ब्रिटेन भी विश्व के अन्य आर्थिक समुदायों के साथ व्यापार वार्ता करेगा। चीनी अंतर्राष्ट्रीय मामले की अनुसंधान संस्थान की यूरोपीय संस्था के प्रभारी छ्वेइ होंगच्येन ने साक्षात्कार में कहा कि ईयू से हटने के बाद विदेशी व्यापार में ब्रिटेन को और बड़ा आत्म निर्णय का अधिकार होगा, जो चीन और ब्रिटेन के आर्थिक व व्यापारी विकास के लिए नये मौके दे सकेगा। ईयू से हटने के बाद ब्रिटेन अपने देश के आर्थिक विकास को प्रेरित करने और अपने देश के उद्योग का पुनरुत्थान करने की आर्थिक नीति जरूर पेश करेगा। चीनी उद्यमों को इन नीतियों का तदनुरुप बंदोबस्त कर ब्रिटिश उद्यमों के साथ सहयोग करना चाहिए।

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