पृथ्वी के स्वर्ग में प्रवेश

2019-11-13 10:00:00
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शायद आप को दक्षिण-पश्चिम चीन स्थित सछ्वान प्रांत के बारे में ज्यादा मालूम नहीं होगा, पर दुर्लभ जानवर पांडा से जरूर परिचित होंगे। सछ्वान प्रांत प्यारे पांडा की जन्मभूमि है।

इतना ही नहीं, इस प्रांत में पृथ्वी के स्वर्ग के नाम से विख्यात च्योचाईको व ह्वांगलोंग पर्यटन क्षेत्र, विश्वविख्यात बौद्ध धार्मिक स्थल अमेई पर्वत व लोशान पर्वत, विश्व में सब से प्राचीन जल संरक्षण परियोजना तूच्यांगयेन, चीनी ताउ धार्मिक स्थल छिंगछंग पर्वत आदि पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र रहे हैं। साथ ही अचानक लुप्त हुई कोई दो हजार वर्ष पुरानी सानशिंगत्वेइ सभ्यता और भी अधिक चर्चित है। वह विश्व करिश्मा मानी जाती है।

अब हम चलें, पृथ्वी का स्वर्ग कहलाने वाले च्योचाईको व ह्वांगलोंग पर्यटन क्षेत्र का दौरा करने।

च्योचाईको पर्यटन क्षेत्र चीन के पश्चिम सछ्वान प्रांत के आपा तिब्बती व छ्यांग जातीय स्वायत्त प्रिफेक्चर में आबाद है। उसका आकार प्रारूप अंग्रेजी अक्षर वाई जैसा है और वह चालीस किलोमीटर से अधिक लम्बी पहाड़ी घाटी है। क्योंकि इस पहाड़ी घाटी में नौ तिब्बती गांव बिखरे हुए हैं, इसलिए उसका नाम च्योचाईको यानी नौ गांवों वाली घाटी रखा गया है।

च्योचाईको पर्यटन क्षेत्र यहां के पानी से चमत्कृत है। यहां का पानी इस पर्यटन क्षेत्र की आत्मा ही है। च्योचाईको पर्यटन क्षेत्र की नदी घाटी में सौ से अधिक छोटे-बड़े चमत्कारिक ऊंचे पहाड़ी तालाब फैले हुए हैं। स्थानीय तिब्बती लोग उन्हें हाईची यानी समुद्र के बेटे कहते हैं। इन तालाबों का पानी इतना स्वच्छ व पारदर्शी है कि तालाब की तह पर पत्थर, जलीय घास व सड़े हुए पत्ते साफ़-साफ़ दिखाई देते हैं। यहां के पानी का रंग भी बदलता रहता है। कभी नीलम के रंग जैसा नीला मालूम पड़ता है, तो कभी रत्न जैसा हरा नजर आता है। मसलन च्योचाईको पर्यटन क्षेत्र में सब से बड़ी झील छ्यांग हाई यदि नजदीकी से देखी जाए, तो उस का पानी एकदम हरा व साफ सुथरा नजर आता है। जबकि दूर से देखा जाए, तो उस का पानी एकदम नीला व समतल लगता है। और तो और आसपास स्थित हरे-भरे पर्वतों की परछाइयां पानी में पड़ने से अलग पहचान बना लेती हैं।

आम तौर पर च्योचाईको के हाईची यानी झीलों का पानी शांत व स्थिर है, लेकिन जब वह पेड़ों से ढकी सीधी चट्टानों से नीचे बहता है, तो उसकी अनगिनत उफनती तेज़ धाराएं खूबसूरत प्रपात का रूप ले लेती हैं। च्योचाईको पर्यटन क्षेत्र में कुल 17 प्रपात समूह पाये जाते हैं। जिन में नोरिलांग प्रपात की चौड़ाई सब से अधिक है। उस की धाराएं सौ मीटर चौड़ी खड़ी चट्टानों से नीचे उतरते हुए एक विशाल जलीय पर्दा लगती हैं और सूर्य के किरणों में वह अनेक इंद्रधनुषों के रूप में बदल जाती हैं। मत पूछिए, उस के सौंदर्य का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। इसलिए चीनी लोग च्योचाईको को पृथ्वी का स्वर्ग कहते हैं। 1992 में युनेस्को ने इसे विश्व प्राकृतिक विरासत की नामसूची में शामिल कर लिया है।

स्थानीय तिब्बती लोगों की मान्यता है कि यहां के सभी पर्वत व पानी पवित्र हैं और घाटी में हरेक पहाड़, पानी, पेड़ और पत्थर भगवान की देन है।

च्योचाईको पर्यटन क्षेत्र का दौरा करने के बाद अब हम कार पर सवार होकर इस पृथ्वी के स्वर्ग के दूसरे रमणीक स्थल ह्वांग लुंग चलते हैं। ह्वांग लुंग पर्यटन स्थल च्योचाईको पर्यटन स्थल से 130 किलोमीटर दूर है। यह स्थल च्योचाईको पर्यटन स्थल की ही तरह इसे भी 1992 में युनेस्को ने विश्व प्राकृतिक विरासत की नामसूची में शामिल कर लिया है। यहां के पानी का अपना एक विशेष स्थान है।

ह्वांग लुंग का पानी देखने की सब से बेहतर जगह है आसपास के पर्वतों की चोटियों पर खड़े होकर नीचे स्थित घाटी की ओर देखा जाए। क्योंकि गहरी घाटी में काल्क सिंटेर से बनी करीब चार किलोमीटर लम्बी हल्के पीले रंग वाली ढलान भारी सुनहरे ड्रेगन की तरह आदिम जंगलों व बर्फिली चोटियों को चीर कर आगे बढ़ती दिखायी देती है। इस सुनहरी लम्बी ढलान पर कोई तीन हजार छोटे-बड़े तालाब सीढीनुमा खेतों की तरह नजर आते हैं। सूर्य की किरणों में तालाबों का पानी चमचमाते हुए बहुत लुभावना लगता है। सब से ऊंची जगह पर स्थित तालाब का समूह पाँच रंगीन तालाब के नाम से बहुत नामी है और यह समूह कुल सात सौ छोटे तालाबों से गठित है। इतने अधिक तालाबों का पानी धूप में विविधतापूर्ण रंगों में दिखाई देता है और वह ह्वांग लुंग के प्राकृतिक दृश्य की निचोड़ माना जाता है।

पर यह पाँच रंगीन तालाब समुद्र की सतह से चार हजार मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। आम पर्यटकों के लिए पैदल ऊपर चढ़ना बेहद कठिन है। ह्वांग लुंग पर्यटन क्षेत्र के प्रबंधन विभाग ने ऊपर चढ़ने का विशेष इंतजाम किया है। सभी पर्यटक केबलकार के जरिए पर्वत की चोटी पर पहुंच कर पाँच रंगीन तालाब देख सकते हैं।

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