चीन मेरा शुभ स्थल है

2019-09-25 08:00:00
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तड़के पाँच बजे अफगान व्यापारी हो फिंग ईवू से थाईचो जाने वाले रास्ते में हैं। उस दिन दो कंटेनर उत्पादों को वनलिंग से भेजा जाएगा। हो फिंग सामान की जांच करने के लिए जा रहे हैं।

सितंबर 2007 में हो फिंग चच्यांग नॉर्मल विश्वविद्यालय में आईबीएम पढ़ने के लिए अफगानिस्तान से चीन आये। चीन में रहते हुए करीब 12 साल हो चुके हैं। हो फिंग का असली नाम जामहिद असादी है। उन्होंने पत्रकार से कहा कि उन्होंने इसलिए अपने लिए यह चीनी नाम दिया कि सुन्दर अभिलाषा प्रकट हो।

जब हो फिंग चच्यांग पहुंचे थे, भाषा न जानने और वातावरण के बदलने से वे दुःखी थे। वे परिवार को बहुत याद करते थे। सहपाठियों, अध्यापकों और मित्रों की मदद में वे धीरे धीरे स्थानीय वातावरण से परिचित होने लगे और धीरे धीरे चच्यांग को पसंद करने लगे। उन के मुताबिक, मेरे अध्यापक और सहपाठी मेरे साथ अच्छा व्यवहार करते हैं। मेरी स्मृति में एक अध्यापिका फ़ांग है, जिन्हें मैं मां पुकारता हूं। वे हमारे विदेशी विद्यार्थियों का बड़ा ख्याल रखती हैं और हमेशा हमें अपने घर बुलाती हैं। स्नातक होने के बाद भी मैं अकसर उन के घर जाता हूं, मुझे बहुत अच्छा लगता है। जब मैं थक जाता है या आराम करना चाहता हूं, तो मैं कैंपस चला जाता हूं। वहां कुछ समय बैठने के बाद आरामदेह महसूस लगता है।

हो फिंग ने चच्यांग नॉर्मल विश्वविद्यालय में एक साल के लिए चीनी भाषा सीखी और चार साल के लिए एमबीए पढ़ा। वह इस स्कूल में एकमात्र अफगान विद्यार्थी हैं। उस समय कुछ अफगान व्यापारी चिनहुआ शहर के ईवू में अपना व्यापार करने लगे थे। चूंकि चिनहुआ बड़ा शहर नहीं है, इसलिए चिनहुआ में एक अफगान विद्यार्थी होने की खबर तुरंत इन व्यापारियों के बीच प्रसारित हो गयी। ईवू में कई साल से व्यापार करने वाले अफगान अजीज ने कहा,

---आवाज़3---

उस समय मैंने सुना कि एक अफगान विद्यार्थी चिनहुआ शहर में पढ़ता है और अच्छी तरह चीनी बोलता है, तो मुझे उससे मिलने की इच्छा हुई। बाद में वह सचमुच चिनहुआ आया और उन्होंने अपना व्यापार शुरू किया। धीरे धीरे उन का अपना दफ्तर है। अब हम अच्छे मित्र बन चुके हैं।

स्कूल में हो फिंग अकसर इन व्यापारियों के निमंत्रण पर ईवू जाकर कुछ अनुवाद का कार्य करते थे। इस दौरान ईवू के मार्केट के प्रति उन्हें कुछ जानकारी मिली, साथ ही वे अनेक व्यापारियों से भी परिचित हो गए। स्नातक होने के बाद वे चिनहुआ से ईवू आये। उन्होंने दो सहयोगियों के साथ ईवू शहर की आओखा कंपनी की स्थापना की और अपना व्यापार शुरू किया। अब कंपनी का प्रमुख व्यवसाय विदेशों से ऑडर लेना है, फिर चीन में सस्ते कपड़ों व जूते जैसे रोजमर्रा की चीजों को खरीदकर गंतव्य तक भेजना है। अनेक बार के निरीक्षण के बाद उन्होंने थाई चो के वनलिंग में कई सहयोगियों को चुना। करीब 3 घंटों के सफ़र में हो फिंग सहयोग के जूते कारखाना पहुंचे। द्वार में प्रवेश करते समय वे अच्छी चीनी भाषा से प्रमुख से बातचीत करने लगे।

पुरुषः नमस्ते।

स्त्रीः नमस्ते नमस्ते।

पुरुषः आप कैसी हैं। क्या सामान की तैयारी हो चुकी है?

स्त्रीः सब तैयार हो चुका है। तहखाने में है।

पुरुषः तो हम जाकर देखें।

हो फिंग ने पत्रकार से कहा कि अपनी कंपनी की स्थापना के बाद व्यवसाय का विकास अपेक्षाकृत आसान है। स्नातक होने के दो साल के बाद उन्होंने अफगान वापस लौटकर श���दी की और अपना परिवार बनाया। अब हो फिंग तीन बच्चों के पिता बन चुके हैं।

2012,2013 और 2014 तीन साल मेरे लिए बहुत अच्छे साल रहे। मैंने अपना व्यापार शुरू किया और अपना परिवार भी बनाया। परिवार और काम में मुझे अच्छी उपलब्धियां हासिल हुई हैं। चीन में प्राप्त अनुभव ने मेरी बड़ी मदद दी। चीन में मैंने पढ़ाई पूरी की और अपना व्यापार शुरू किया। साथ ही मैंने अनेक लोगों से मित्र बनाये। यह मेरे जीवन की संपत्ति हैं।

पूरे एक दिन का काम पूरा होने के बाद हो फिंग गाड़ी चलाकर आराम करने गए। उन की सफलता के पीछे उन का प्रयास ही है।आखिरकार आराम वाले स्थल पहुंच गया हूं। मुझे बहुत मेहनत से काम करना है। मुझे याद है कि एक महीने में मैंने 18 फ्लाइटें ली थीं।

पहले हो फिंग अन्य व्यापारियों के साथ एक ही दफ्तर में काम करते थे। अब उन का अपना दफ्तर है। उन की कंपनी में कुल चार कर्मचारी हैं। उन के उपभोक्ता भी अफगानिस्तान से सऊदी अरब और रूस आदि जगहों में हैं। उन के मुताबिक, काम की वजह से मैं चीन के अनेक शहर जा चुका हूं। क्वांगचो, पेइचिंग, थ्येनचिन, वू हान और शांगहाई इत्यादि। कुछ चीनी मित्र भी इतनी ज्यादा जगह नहीं गये हैं। चीन का विकास बहुत तेज़ है। ईवू शहर भी हर साल परिवर्तित होता रहा है। खास तौर पर इधर के सालों में यहां का विकास बहुत तेज़ है। बुलेट ट्रेन के अलावा अनेक गगनचुंबी इमारतें बन गयी हैं। मैं चीनी विकास व परिवर्तन का गवाह हूं। चीन मेरा शुभ स्थल है। मैं चीन के साथ समान रूप से आगे बढ़ना चाहता हूं।

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