भीतरी मंगोलिया का दौरा

2019-09-04 09:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
1/5

शायद आप ने उत्तरी चीन के सीमांत क्षेत्र में स्थित भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश का नाम सुना होगा। आज के इस प्रोग्राम में हम आप को इसी भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश का दौरा करने ले चलते हैं। मुझे विश्वास है कि इस दौरे में आप को मंगोल जाति के विशेष रीति रिवाजों का नया अनुभव होगा। तो आइए, अब हम भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश की यात्रा करें।

भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश में मंगोल, हान, ह्वी और मंचूरिया समेत कुल 49 जातियां रहती हैं, जिन में मंगोल जाति की जनसंख्या कोई 40 लाख से अधिक है, इसलिए यह स्वायत्त प्रदेश एक मंगोल जाति बहुलक्षेत्र जाना जाता है। यदि पर्यटक भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश में मंगोल जातीय रीति रिवाजों का अनुभव करना चाहते हैं, तो उन्हें विशाल हरे भरे घास मैदान जाना जरूरी है। इस प्रदेश के शिलिनकोल, हुलुंबेर और कोल्सिन जैसे विशाल घास मैदान बहुत विख्यात हैं।

भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के घास मैदानों का दौरा करने में बड़ा मजा आता है। वहां की बढ़िया पारिस्थितिकी, चरवाहे और खानाबदोश जीवन ने लोगों पर बहुत गहरी छाप छोड़ी है। अपार हरे भरे घास मैदानों में रहने वाले चरवाहे मेहमानों का उत्साह से सत्कार करते हैं। किसी भी चरवाहे के घर में आप प्रवेश करें, उस घर की मालकिन तुरंत ही मेहमान के सम्मान में मंगोल जाति के परम्परागत रीति रिवाज के अनुसार दूध से बनी चाय और पका हुआ मटन परोसती है। भोजन करते समय मालिक अवश्य ही सफेद शराब से भरा चाँदी का कटोरा मेहमान को पेश करता है।

भेड़ बकरियों के सफेद झुंड, गायों के पीले झुंड और ऊंटों के सुनहरे झुंड विशाल हरे-भरे घास मैदानों के बीच चलते-फिरते दिखाई देते हैं। उन के बीच सफेद मंगोल तंबू तने हुए हैं। भीरती मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के घास मैदानों का यह अनोखा दृश्य पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है। शहरवासियों के लिए भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश का दौरा करना और मंगोल जाति के परम्परागत रीति रिवाजों को महसूस करने का मौका मिलना एक उद्धुत सुखद अनुभव है।

विमान द्वारा पेइचिंग से भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश की राजधानी हुहोहोथ शहर पहुंचने में केवल 45 मिनट लगते हैं, सुपर हाइवे से साढ़े चार घंटे लगते हैं, जबकि रेल से 11 घंटे लग जाते हैं। इस राजधानी से हमारे प्रदेश के हरेक घास मैदान में जाने में कोई दिक्कत नहीं है। समूचे स्वायत्त प्रदेश में राजमार्गों का जाल सा बिछा हुआ है, यातायात अत्यंत सुविधाजनक है। राजधानी पेइचिंग से भीतरी मंगोलिया के शइलिनकोल जिले के कुंगपोलाग घास मैदान पहुंचने में सिर्फ तीन घंटे का रास्ता है। यह चीन की राजधानी पेइचिंग से सब से नजदीक प्राकृतिक घास मैदान है। कई सौ साल पहले सुन्दर कुंगपोलाग घास मैदान छिंग राजवंश के राजाओं का शाही घोड़ा पालन अड्डा रहा था। इस अड्डे में विशेष तौर पर शाही परिवारों को घोड़े और गायों, बकरियों का मीट भेंट किया जाता था। इधर के सालों में भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश में चरवाहा पारिवारिक पर्यटन शुरू हो गया है। पर्यटक अपनी इच्छा से स्थानीय चरवाहों के घर में रह सकते हैं।

विशाल घास मैदान बहुत सुन्दर है। पर्यटक हरे-भरे घास मैदान में अपनी रूचि के साथ जा सकते हैं। दूध दुह सकते हैं और चरवाहों से पनीर बनाने का तरीका सीख सकते हैं। इतना ही नहीं, वे स्थानीय चरवाहों से नाना प्रकार के दुग्ध पकवान, सूखा बीफ व मटन जैसे बहुत से स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ तैयार करने के तरीके भी सीख सकते हैं।

मंगोल जाति के लोग बहुत मेहमानवाज हैं। जब घर में कोई मेहमान आता है, तो वे अवश्य ही उस के सम्मान में मटन व सफेद शराब पेश करते हैं। साथ ही मक्खन और पनीर जैसे परम्परागत पकवानों के अतिरिक्त वे खुशबूदार भुना हुआ बकरा भी खिलाते हैं। मालिक खुशी में सुरक्षित बढ़िया शराब भी मेहमान के सम्मान में पिलाते हैं। यदि कोई मेहमान शराब नहीं पीता है, तो मालिक उसे दुविधा में नहीं डालते। ऐसे मौकों पर वह मंगोल जाति की तरह अपनी अनामिका ऊंगली से शराब को आकाश और जमीन की ओर छिड़क सकता है। मतलब है कि आसमान व भूमि देवों की पूजा की जा रही है।

नीला आसमान, सफेद बादल, विशाल घास मैदान और घोड़ों के झुंड भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश का पूरा मनमोहक दृश्य नहीं हैं। इस स्वायत्त प्रदेश के पश्चिमी भाग में ऊँट की जन्मभूमि के नाम से प्रसिद्ध अराशान और अरडोस पठार असीमित गोबीस्थान व विशाल रेगिस्तान ने भी अपनी विशेष पहचान बना रखी है। पर्यटक यहां के सुनहरे रेगिस्तान में ऊँट पर सवार होकर शांत व विरान दृश्यों का मज़ा उठा सकते हैं।

यदि पर्यटक भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश की जातीय संस्कृति के बारे में जानकारी पाना चाहते हैं, तो उन्हें मंगोल जाति के रहस्यमय अंत्येष्टि संस्कार भी देखने चाहिए। मंगोल जाति के महा वीर चंगोजखान की कब्र की रक्षा मंगोल जाति की दारहूत शाखा के वंशज करते आये हैं। हर वर्ष के वसंत में और सर्दियों में धूमधाम से विशाल भव्यदार पूजा समारोह आयोजित किये जाते हैं। वैसे आम दिनों में तो अकसर भव्य पूजा प्रार्थना गतिविधि तो रहती ही है।

हर वर्ष मंगोल स्वायत्त प्रदेश में आयोजित नादाम समारोह मंगोल जाति के परम्परागत सांस्कृतिक जीवन की अलग पहचान है। मंगोल भाषा में नादाम का अर्थ मनोरंजन है। हर वर्ष गर्मियों व शरद में यह सारोह होता है। मौके पर चरवाहे शानदार जातीय पोशाक में घुड़ दौड़, कुश्ती और तीरंदाजी प्रतियोगिता करते हैं। ये गतिविधियां मंगोल जाति की हजारों वर्षों से चली आयीं घास मैदान की परम्पराओं से जुड़ी हुई हैं।

शेयर