शि लिन क्षेत्र का जातीय दृश्य

2019-07-31 09:00:00
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युनान प्रांत के शि लिन क्षेत्र में चीनी अल्पसंख्यक जातियों में से एक ई जाति की सानी शाखा रहती है। इस सानी शाखा ने शि लिन क्षेत्रीय आशमा संस्कृति और रंगारंग जातीय नृत्य गान रचे हैं।

छोटे शि लिन पर्यटन क्षेत्र में एक स्वच्छ पानी वाली झील स्थित है। इस झील के तट पर एक पत्थर चोटी है। इस पत्थर चोटी का आकार प्रकार सुन्दर सानी युवती जैसा जान पड़ता है। इसलिए हर रोज बड़ी संख्या में पर्यटक इस चोटी को देखने और फोटो खिंचवाने के लिए यहां आते हैं। कहा जाता है कि यह प्रसिद्ध आशमा पत्थर चोटी है। यहां की सभी युवतियों को आशमा कहा जाता है। ई जाति में आशमा का अर्थ है खूबसूरत युवतियां। जबकि युवकों को आहे भैया कहा जाता है। मतलब है कि मेहनती और बहादुर।

आशमा पत्थर चोटी के बारे में यहां एक मर्मस्पर्शी पौराणिक कहानी अभी तक खूब प्रचलित है। कहा जाता है कि एक गरीब परिवार में एक बहुत सुन्दर बच्ची का जन्म हुआ। उस के मां बाप ने उस का आशमा नाम रखा। बड़ी होकर आशमा को नाचने और गाने में खूब महारत हासिल हो गई। अतः बहुत से स्थानीय युवक आशमा से प्यार करने लगे। युवती आशमा ने अपने गांव के अनाथ गरीब युवक आहे से प्रेम किया और उस के साथ शादी करने की कसम भी खायी। एक साल मशाल उत्सव में आशमा और आहे ने बंधन का रिश्ता पक्का कर लिया। गांव के जमींदार के बेटे को भी आशमा पसंद आ गई और उस ने शादी का संबंध तय करने के लिए एक परिचायक को आशमा के घर भेजा। पर युवती आशमा किसी भी शर्त पर उस के साथ शादी करने को तैयार नहीं हुई। एक दिन जब आहे भैया बकरियों को चराने के लिए बाहर गया, तो जमींदार ने इस मौके का फ़ायदा उठाकर युवती आशमा का अपहरण कर लिया और उसे अपने बेटे के साथ शादी करने पर मज़बूत कर दिया। पर युवती आशमा अंतिम दम तक इस बात पर राजी नहीं हुई। युवक आहे ने जब वापस लौटकर सुना कि युवती आशमा का अपहरण हो गया है, तो वह शीघ्र ही ज़मींदार के घर जा कर युवती आशमा को मुक्त करा कर बाहर भागा। ज़मींदार यह जानकर बहुत आग बबूला हुआ। उसने बदला लेने के लिए युवती आशमा और युवक आहे का पीछा किया। जब वे दोनों उफनती पार कर रहे थे, तो जमींदार ने नदी के तेज़ बहाव में उन दोनों को डुबो दिया। बाद में इंग शान की युवती ने आशमा को बचा लिया, फिर आशमा ने एक पत्थर चोटी के रूप धारण कर लिया।

ई जाति की सानी शाखा पीढ़ी दर पीढ़ी शि लिन क्षेत्र में रहती आई है। यहां के वासी आम तौर पर पत्थर के मकानों में रहते हैं। पिछले कई सालों में यहां पत्थर के मकान बनाने और सड़कें निर्मित करने की परम्परा बनी हुई है।

क्योंकि पिछले लम्बे अर्से से ई जाति के पूर्वज इसी कार्स्ट भूतत्वीय सूरती क्षेत्र में रहते आये थे, इसलिए उन्होंने 8 लाख साल पहले पत्थरों से प्रकृति के साथ संघर्ष करने का पता लगाया, फिर धीरे धीरे पत्थरों से समृद्ध संबंधित संस्कृति रची। उदाहरण के लिए पुरातन पाषाण युग के कुछ औजारों से लेकर आज के कुछ उत्पाद साधन पत्थरों से जुड़े हुए हैं।

शि लिन क्षेत्र में सानी लोगों के हरेक गांव के पास एक हरा-भरा जंगल जरूर हैं। स्थानीय लोग इसे घना जंगल कहते हैं। कहा जाता है कि घने जंगल में मी ची देवता रहता है। यह देवता सानी गांव का रक्षक है। यदि कोई आदमी असावधानी से ऐसे जंगल में प्रविष्ट हुआ, तो मी लिन देवता क्रोधित होकर उसे बीमार करने या मृत्यु की सज़ा दे देता है। चीनी पंचांग के अनुसार हर वर्ष के 11वें महीने में शि लिन क्षेत्र में रहने वाले ऐसे घने जंगल में मी ची देवता की पूजा करते हैं, ताकि मी ची देवता समूचे गांववासियों व पशुओं और शानदार फसल की रक्षा कर सके। यह ही सानी वासियों का महत्वपूर्ण मी ची उत्सव है। इन जंगल का सानी लोगों के लिए विशेष महत्व है। इसलिए स्थानीय लोगों में पिछले हजारों वर्षों से पवित्र जंगलों की पूजा व रक्षा करने की परम्परा बनी हुई है।

दीर्घकानिक के ऐतिहासिक परिवर्तन में स्थानीय लोगों और शि लिन भूतत्वीय सूरत और इसी भूतत्वीय सूरत से बनने वाले पत्थरों के बीत अटूट संबंध कायम हो गया है। शि लिन क्षेत्र के पत्थरों पर सानी लोगों ने पूर्वजों के पत्थर चित्र व शिला लेख चित्रित किये थे, जिससे पुराने जमाने में सानी वासियों द्वारा पूजा प्रार्थना करने, नृत्यनाट्य व शिकार करने और लड़ाई लड़ने की प्राचीन परम्परागत स्थितियों का पता चलता है। ऐसा कहा जा सकता है कि पत्थर स्थानीय सानी वासियों के धर्म, पौराणिक कथा, कविता, नृत्यनाट्य, कसीदा, पोशाक, भवन निर्माण और उत्सव जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। इस से प्रभावित होकर यहां बसी हुई अल्पसंख्यक जातियों के रीति रिवाजों की अलग पहचान भी बनी है। ठीक इसी अलग पहचान ने देशी-विदेशी पर्यटकों पर गहरी छाप छोड़ी है।

पिछले हजारों वर्षों में पत्थर जंगलों में रहने वाले सानी वासियों ने न सिर्फ शानदार इतिहास व संस्कृति का सृजन किया है, बल्कि विविधतापूर्ण रंगारंग लोक सांस्कृतिक कलाओं का आविष्कार भी किया है। सानी वासियों की विशेष भाषा व लिपि, भावार्थ, कविताओं व सुंदर पौराणिक कथाओं, चमकदार जातीय पोशाकों व आभूषणों, रंगारंग जातीय नृत्य-गानों, सीधे सादे कुश्ती कौशल और अलग ढंग के शादी ब्याह व अंतिम संस्कारों में इस अल्पसंख्यक जाति की पुरानी सांस्कृतिक व क्षेत्रीय विशेषताएं अभिव्यक्ति होती हैं।

आज न जाने कितनी शताब्दियां लग गयी हैं। युवती आशमा की पौराणिक कथा सानी वासियों के दैनिक जीवन, शादी ब्याह व अंतिम संस्कार और अन्य विविधतापूर्ण रीति रिवाजों का एक भाग बन गयी है और यह सुन्दर कहानी सानी वासियों के बीच लोकप्रिय भी रही है और आइंदे भी रहेगी।

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