वसंत त्योहार का न्येन ह्वा

2019-02-11 10:00:00
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वसंत त्योहार का न्येन ह्वा

वसंत त्योहार का न्येन ह्वा

वसंतोत्व को मनाने के लिए चीनी लोग आम तौर पर अपने घर के द्वारों या दीवारों पर न्येन ह्वा लगाते हैं। न्येन ह्वा (नये साल का चित्र) वसंत उत्सव के दौरान चीनी लोगों द्वारा जीवन वातावरण और निवास स्थान को सजाने वाला एक विशेष शैली का चित्र है। प्राचीन काल में ही चीन में न्येन ह्वा चिपकाने का रिवाज था, लेकिन उस समय इस का नाम“न्येन ह्वा”नहीं था। छिंग राजवंश के विद्वान ली क्वांगथिंग ने अपनी पुस्तक“श्यांग येन च्येई यी”(स्थानीय बोलियों का व्याख्यान) में“न्येन ह्वा”का उल्लेख किया था, बाद में इस नाम का व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया गया।। न्येन ह्वा चीनी चित्रकारी की एक किस्म है, जो प्राचीन काल के“मन शन ह्वा(द्वार देवता का चित्र)”से रूपांतरित होकर विकसित हुआ था। वह चीन में चित्रकला का एक विशेष प्रकार है और ग्रामीण जनता में लोकप्रिय कला विशेष भी। न्येन ह्वा आम तौर पर नव वर्ष के अवसर पर लगाए जाते हैं। वातावरण को सुसज्जित करने के साथ साथ नव वर्ष को शुभ कामना देने व खुशहाली की प्रार्थना करने का महत्व भी है। इसी से न्येन ह्वा यानी नव वर्ष का चित्र नाम पड़ा है।

न्येन ह्वा चित्र में सरल रेखाएं, चमकीले रंग व खुशहाल माहौल का चित्रण है, मिसाल के लिए छ्वुन न्यू चित्र(वसंत ऋतु में जुताई में लगे बैल का चित्र), स्वेई छाओ चित्र( फूल पौधे व बर्तन का चित्र), चा स्वेई चित्र( अच्छी फ़सल का चित्र), शी यिंग चित्र (शिशु क्रीड़ा चित्र), ह चा ह्वेन चित्र (पारिवारिक मिलन चित्र), खान ह्वा तंग चित्र(लालटेन देखने का चित्र) और फांग वा वा चित्र(मोटा प्यारा बालक चित्र) आदि मशहूर हैं। न्येन ह्वा नव वर्ष के अवसर पर खूबसूरत सजावट ही नहीं, साथ ही सांस्कृतिक आदान प्रदान, नैतिकता की शिक्षा, सौंदर्य के प्रचार और वैचारिक विश्वास की विरासत का वाहक साधन व माध्यम है। वह चित्र देखने से अक्षर सीखने की जन पठन सामग्री है और जनता की लोकप्रिय मीडिया भी है। यह विश्वकोश तूल्य लोक कला विधि है, जिसमें समूचे चीन की जन भावना गर्भित है। न्येन ह्वा के विषय रंगबिरंगे व विविध हैं, द्वार देवता व रसोई देवता आदि विभिन्न देवताओं की तस्वीरों के रूप में है, त्योहार के चित्र, शुभमंगल सूचक चित्र, कहानी, ओपेरा व उपन्यास पर आधारित चित्र, सफ़र और पालतू पशु को वरदान देने वाला चित्र (जी मा यानी कागजी घोड़ा भी कहलाता है) इत्यादि। यह कहा जा सकता है कि न्येन ह्वा रीति रिवाजों और जन मान्यताओं को अभिव्यक्त करने वाला विश्वकोश का काम आता है। इतना ही नहीं, न्येन ह्वा रंग में चटकीला, चित्रण में परिपूर्ण और आकृति में सजीव होने के कारण एक विशेष कला विधि है।

न्येन ह्वा एक क्षेत्रीय संस्कृति का शब्दकोश है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की स्पष्ट सांस्कृतिक विशेषताएं पायी जा सकती हैं। न केवल चित्रों के विषयों से, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के चित्रकारी के प्रकार, रंग, रेखा व संस्करण से भी ये स्थानीय विशेषताएं स्पष्ट पायी जा सकती हैं। चीन में न्येन ह्वा के दो प्रमुख उत्पादन केंद्र हैं। वे उत्तरी चीन के थ्येन चिन शहर के यांग ल्योछिंग और शान तुंग प्रांत के वेई फ़ांग शहर के हान थिंग और दक्षिण चीन के सछ्वान के म्येन जू और सूचो शहर के थाओह्वा वू और क्वांग तुंग प्रांत के फ़ो शान में हैं। उपरोक्त क्षेत्रों में न्येन ह्वा की उत्पादन मात्रा भिन्न भिन्न है और चित्रकला की अपनी अपनी स्पष्ट शैली होती है।

न्येन ह्वा चीनी लोक चित्रकला की एक अपेक्षाकृत बड़ी किस्म है। वह शुरूआती काल की प्रकृति व देवता की उपासना से धीरे धीरे दानव के वशीकरण और शुभ मंगल की प्रार्थना, विपत्ति पर काबू और त्योहार के वातावरण को खुशगवार करने के रीति रिवाज में परिणत हो गया, जिससे जनता की भावना और सुन्दर जीवन बिताने की अभिलाषा व्यक्त हुई है। न्येन ह्वा का लम्बा इतिहास है और तेज़ विकास भी हुआ है। उस के अनेक उत्पादन स्थल हैं और व्यापक तौर से प्रचलित और लोकप्रिय हैं। उस के बेशुमार पाठक भी हैं। उसने अपना जोरदार विकास का जमाना भी देखा था। चाहे विषय, उत्कीर्णन व मुद्रण की तकनीक या कला शैली में न्येन ह्वा की स्पष्ट अपनी पहचान है। उसमें भद्रता व लोकप्रियता की संधि है, जिससे न केवल लोक ललित कला की अन्य किस्मों पर गहरा प्रभाव पड़ता है, बल्कि उस ने अन्य चित्रकारी के मेल से एक परिपक्व चित्रकारी की शाखा कायम की है।

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