चीनी जनता को सुधार व खुलेपन की नीति से सब से ज्यादा लाभ मिला है

2018-11-29 08:00:00
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“पूरे देश यहां तक पूरी दुनिया के लिए 60 प्रतिशत के स्कार्फ चीन के ईवू शहर से आते हैं। ईवू में स्कार्फ बहुत सस्ते मिलते हैं और उस की विविधतापूर्ण किस्में हैं। हमारी दुकान में रोज 20 से 30 नये उत्पादों का उत्पादन किया जा सकता है। हमारे स्कार्फ की करीब 600 किस्में हैं, जिन्हें दुनिया के 30 देशों में निर्यातित किया जाता है।”

जो बोल रही है, उन का नाम ह हाईमेई है, जो ईवू की निवासी हैं। अब ह हाईमेई ईवू हाईमेई वेशभूषा कंपनी लिमिटेत की डिरेक्टर हैं। 1987 से स्काफ के उत्पादन व बिक्री शुरू करने से अब तक यह कंपनी ईवू अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाजार में स्कार्फ उद्योग के सब से श्रेष्ठ उद्यमों में से एक बनी है, जिस की वार्षिक बिक्री रकम 5 करोड़ चीनी युआन तक पहुंची है और हर साल सरकार को 40 लाख से ज्यादा चीनी युआन का टैक्स देती है।

लेकिन 40 साल पहले ह हाईमेई ने नहीं सोचा था कि अपना कार्य इतना बड़ा बन सकेगा और अपनी जन्मभूमि ईवू चीन की मुख्यभूमि की छह शक्तिशाली काउंटियों में से एक बनेगी। आज ईवू संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व बैंक आदि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा संस्थाओं द्वारा दुनिया का सब से बड़ा बाजार तय किया गया। 40 साल पहले के ईवू की याद करते हुए ह हाईमेई ने कहा,“चूंकि ईवू के तीनों ओर पहाड़ हैं। यहां आबादी ज्यादा और भूमि कम है, इसलिए अपेक्षाकृत गरीब क्षेत्र था। मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी, मैं शहर के परिवारजनों के घर जाकर नया साल मनाती थी। मेरे आसपास के अनेक लोग भर पेट खाना भी नहीं खा पाते थे। उस समय ईवू का वातावरण बहुत खराब था। सड़कों पर कोई रास्ता नहीं था, सब जीर्ण मकान थे।”

1978 में जब फिल्म अ ड्रीम इन रेड मेनशन्ज़ (A Dream in Red Mansions) ईवू में प्रसारित की गयी, तो हांगचो से घर वापस लौटने वाले बड़े भाई ने ह हाईमेई के लिए कुछ प्ले के पोस्ट कार्ड लाये। ह हाईमेई ने इन पोस्ट कार्डों को थियेटर के द्वार लाकर बेचा, परिणामस्वरूप पोस्ट कार्डों का गर्मागर्म स्वागत मिला। सिर्फ तीन दिनों में उन्होंने 30 युआन कमाये, जो उस समय उन की पत्नी के एक महीने के सैलरी के बराबर है। इस के बाद ह हाईमेई ने अपना व्यापार करने लगा। ह हाईमेई पोस्ट कार्डों को लेकर ईवू के आसपास छोटी बड़ी गांव गयी। 1981 में ह हाईमेई के पास 50 हजार चीनी युआन का बैंक बचत था। उन का व्यवसाय भी ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों तक स्थानांतरित किया।

1982 से ह हाईमेई मोजे और बच्चों के कपड़े बेचने लगे। उस समय ईवू हूछिंगमन छोटे स्टोर बाजार खुल गया। ह हाईमेई इस बाजार में व्यापार करने वाले पहली दुकानदार हैं। लेकिन सिर्फ तीन महीनों के बाद बाजार में स्टोरों की संख्या में दोगुनी हुई, जो 700 से ज्यादा स्टोर तक पहुंची थीं। 1984 में इस बाजार में व्यापारिक रकम 2 खरब 32.1 लाख चीनी युआन तक पहुंची।

1984 के दिसम्बर माह में बाजार एक नये स्थल में स्थानांतरित किया गया, जिस का नाम भी ईवू छोटे कमोडिटी बाजार में बदला गया। इस बाजार में कुल 2800 से ज्यादा स्टोर थे और कपड़े, मोजे और अंडरवियर आदि किस्में हुई थीं। 1986 में बाजार का फिर एक बार स्थानांतरण किया गया। नये बाजार का क्षेत्रफल 44 हजार वर्गमीटर तक पहुंचा। जिस में निश्चित और अस्थायी स्टोरों की संख्या क्रमशः 4096 और 1000 थीं। उस साल बाजार का व्यापारिक रकम 10 करोड़ चीनी युआन को भी पार कर गयी। दो बार के विस्तार होने के बाद यह बाजार चीन का सब से बड़ा छोटा कमोडिटी बाजार बन गया।

क्यों ईवू के लोग सफलता पा सकते हैं? इस के जवाब में ह हाईमेई ने कहा कि ईवू के लोग बहुत मेहनती हैं। उन के मुताबिक,“ईवू के लोग बहुत मेहनती हैं। मैं भी हूं। मेरे परिवार के लोग अकसर मुझे सलाह देते हैं कि इतना धनी होने के बाद तुम काम न करो और बाहर घूमो, लेकिन मैं आराम करना नहीं पसंद करती हूं। मुझे काम करना पसंद है। आजकल वातावरण इतना अच्छा है। सरकार हमें बड़ी मदद देती है और नीतियां इतनी उदार हैं। रोज मैं दस घंटे काम करती हूं।”

ईवू छोटा कमोडिटी बाजार के व्यापारियों में श्रेष्ठ प्रतिनिधि होने के नाते ह हाईमेई ने क्रमशः ईवू निजी श्रमिक संघ की उपाध्यक्ष, चच्यांग श्रमिक संघ के उपाध्यक्ष आदि पद सँभाले थे। वे हमेशा ही ईवू के विकास पर सोच-विचार करती रही हैं। साथ ही उन्होंने अनेक उचित सुझाव भी पेश किये थे।

सुधार व खुलेपन की नीति लागू होने के 40 साल भी ईवू के तेज़ विकास के 40 साल हैं। पिछले 40 सालों में ह हाईमेई और ईवू की जनता ने अपनी मेहनती व साहसी भावना व कार्यवाइयों से अपने सुन्दर जीवन की रचना की। ईवू में सुधार व खुलेपन के गवाही की हैसियत से ह हाईमेई का मानना है कि वे लोग सुधार व खुलेपन की नीति पर कायम रहेंगे और आगे चलते रहेंगे। उन्होंने कहा,“सुधार व खुलेपन के बिना ईवू का आज नहीं होता। ईवू सुधार व खुलेपन की नीति का लाभ पाने वाला क्षेत्र है। एक ईवूवासी होने के नाते मुझे बहुत गौरव महसूस होता है। सुधार व खुलेपन से सब से बड़ा लाभ पाने वाले लोग जनता यानी हम ही हैं। इसलिए हमें सुधार व खुलेपन की नीति लागू करते रहेंगे।”

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