क्यूरेटर पुल की स्थापना करते हैं कलाकारों और दर्शकों के बीच

2018-10-30 10:00:00
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क्यूरेटर पुल की स्थापना करते हैं कलाकारों और दर्शकों के बीच

क्यूरेटर पुल की स्थापना करते हैं कलाकारों और दर्शकों के बीच

इधर के सालों में विविधतापूर्ण प्रदर्शनियां चीन में बहुत आयोजित होती रही हैं। प्रदर्शनियां देखना फिल्म देखने और पुस्तक दुकान का दौरा करने की तरह सामान्य चीनियों के दैनिक जीवन में एक बहुत महत्वपूर्ण भाग बन चुका है। जबकि एक नया पेशा क्यूरेटर धीरे धीरे लोगों के लिए परिचित होने लगा है। आज के प्रोग्राम में हम क्यूरेटरों के पास जाएंगे और उन की कहानियां सुनेंगे।

यांग श्याओपो को बचपन से पेटिंग करना बहुत पसंद था। विश्वविद्यालय में उन्होंने डिजाइनिंग का अध्ययन किया। स्नातक होने के बाद वह सांस्कृतिक उद्योग से संबंधित एक कारोबार में काम करने लगे। कला के प्रति दीवानगी के चलते यांग श्याओपो फुरसत के समय कला क्षेत्र के मित्रों और सहपाठियों के लिए संपर्क का काम करते हैं और उन्हें प्रदर्शनी करने में मदद देते हैं। इस प्रक्रिया में क्यूरेटर के पेशे ने यांग श्याओपो का ध्यान खींचा। करीब दस साल पहले यांग श्याओपो ने पहले की कंपनी   छोड़ी और अपने क्यूरेटर का जीवन बिताने लगे। “क्यूरेटर का मकसद नागरिकों को और आसानी से कला को समझाना है। नागरिकों के लिए एक अनुवादक की जरूरत होती है। क्योंकि आम लोगों की तुलना में कलाकार खास होते हैं। उनके कार्यों को समझने के लिए लोगों को एक अनुवादक की आवश्यकता होती है। यह अनुवादक सिर्फ लोगों को नहीं समझाता है, बल्कि लोगों को विभिन्न विकल्प भी देता है, ताकि लोग कलाकारों और उन के कार्यों को और अच्छी तरह समझ सकें।”

गत् 70 के दशक में पश्चिमी देशों के कला संग्रहालयों में संग्रहों का अध्ययन करने वाले लोगों को क्यूरेटर माने जाते थे। उन का मकसद संग्रहों को प्रदर्शनी के रूप में समाज में प्रसारित करना है। बाद में अनेक बड़ी प्रदर्शनियों में क्यूरेटरों की भागीदारी होने लगी। चीनी केंद्रीय कला अकादमी के अध्यक्ष फान दीआन ने कहा कि चीन में सुधार व खुलेपन की नीति के लागू होने के बाद चीन में कला रचना की उत्पादन शक्ति मुक्त हो गयी। क्यूरेटर का पेशा भी धीरे धीरे चीन के समाज में प्रवेश करने लगा। “लम्बे अरसे से चीन में कला तरीका अपेक्षाकृत सरल रहा है। 1978 से शुरू हुए सुधार व खुलेपन की प्रक्रिया से कलाकारों ने स्वतंत्र रूप से रचना करने की कोशिश की। पूरा समाज कला रचना का सम्मान करता है और कलाकारों की अपनी विशेषता का सम्मान करता है। पश्चिमी देशों की विविध कला शाखाओं और दृष्टिकोणों ने भी चीन में प्रवेश किया। चीनी कलाकार विश्व कला क्षेत्र की नयी प्रगतियां जानने लगे।”

90 के दशक में चीनी कला जगत में क्यूरेटर नजर आने लगे। क्यूरेटरों का पैदा होना इस बात का द्योतक है कि चीन में प्रदर्शनी उद्योग में सुधार हो गया है। चीन में कला रचना में नयी जीवित शक्ति दिखायी गयी है। फान दीआन के अनुसार,“जब क्यूरेटर एक थीम प्रस्तुत करता है, तो इस बात का द्योतक है कि कला रचना पर उन्होंने अपना रुख ले लिया है। क्यूरेटर की मेहनत से चीन में विविधतापूर्ण प्रदर्शनियां होने लगी।”

बीते बीस सालों में चीन में प्रदर्शनी उद्योग के निरंतर विकास होने के नाते क्यूरेटरों को भी दर्शकों की मान्यता मिली है। दर्शक श्वेई ने कहा,“मुझे लगता है कि एक प्रदर्शनी की सफलता या असफलता कार्य खुद पर निर्भर है। लेकिन प्रदर्शनी की रचना भी अति महत्वपूर्ण है। इसलिए क्यूरेटर इस अहम भूमिका निभाते हैं। मिसाल के लिए, किस तरह के काम चुनने हैं, किस तरह के स्थान पर प्रदर्शनी करनी है, कैसा लेआउट करना है इत्यादि। ये सब प्रदर्शनी के प्रति दर्शकों के अनुभव पर असर डालते हैं। मुझे लगता है कि एक श्रेष्ठ क्यूरेटर बनने के लिए अनेक क्षमताओं की जरूरत होती है।”  

क्यूरेटर कलाकारों और दर्शकों को जोड़ने वाला पुल है। दस साल तक एक क्यूरेटर होने के नाते यांग श्याओपो ने न सिर्फ चीन में प्रदर्शनी व्यवसाय के निरंतर परिपक्व होने को देखा है, साथ ही उन्हें चीनी दर्शकों की प्रगति का भी अहसास किया है। उन के मुताबिक,“आज स्थिति में सचमुच परिवर्तन आय चुका है। कलेक्टरों की गुणवत्ता में उन्नति आयी है। वे न केवल भविष्य में कलाकृतियों के दाम में बढ़ोतरी की वजह से कलाकृतियों को चुनते हैं। बल्कि अपनी पसंद के मुताबिक कलाकृतियों को खरीदते हैं।”

21वीं शताब्दी के चीन में क्यूरेटर सांस्कृतिक क्षेत्र में एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

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